09 October 2018

नवरात्रि व्रत के दौरान अवश्य पालन करें यह विशेष नियम । कैसे करें नवरात्रि पूजन । Navratri ke Niyam


नवरात्रि व्रत के दौरान अवश्य पालन करें यह विशेष नियम । कैसे करें नवरात्रि पूजन । Navratri ke Niyam


       नवरात्र का प्रारम्भ होने जा रहा हैं। आने वाले 9 दिनों तक माँ के 9 रुपों की पूजा की जाएगी। व्रत, पूजा पाठ का समय होगा। माँ दुर्गा की भक्ति में आलिन भक्त 9 दिन तक व्रत करेंगे। माँ की मूर्ति की स्थापना विधिवत की जाएगी एवं कलश स्थापित होगा, किन्तु इस पूजा-पाठ से पहले आपको इससे जुड़े नियमों के बारे में अवश्य जानना चाहिए।

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Navratri ke Niyam
       नवरात्रि में 9 दिनों तक देवी माँ की आराधना तथा व्रत करने से भक्तजनों को विशेष फल की प्राप्ति होती हैं। 9 दिनों का यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता हैं। आजकल व्रत का अर्थ ढेर सारा फलाहारी खाना तथा सजना-धजना, आराम करना मान लिया गया हैं किन्तु शास्त्र में व्रत संबंधी नियम बताए गए हैं। नवरात्रि पर देवी पूजन तथा 9 दिन के व्रत का बहुत महत्व हैं। इन 9 दिनों में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं। ऐसे में हम आपको ऐसे ही कुछ बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आपको व्रत के दौरान भूलकर भी नहीं करना चाहिए या नवरात्रि के व्रत में इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। व्रत के दौरान न केवल मन को शांति की प्राप्ति होती हैं किन्तु शरीर की भी आंतरिक रूप से सफाई जो जाती हैं। वैसे तो प्रत्येक कोई नवरात्रि का व्रत कर सकता हैं, लेकिन व्रत के दौरान कुछ आवश्यक बातों का ख्याल रखना चाहिए ताकि आपको मनोवांछित फल की प्राप्ति हो सके। आइए आज हम आपको बताते हैं कि नवरात्रि के दौरान आपको क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं।

·           9 दिन तक लगातार दीपक जलाना चाहिए।

·         9 दिनों तक अपनी स्वाद इंद्रिय पर नियंत्रण रखने के लिए व्रत करना चाहिए। व्रत के दौरान तामसिक भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
·         9 दिनों तक पूजा करने से पहले माँ का विधिवत श्रृंगार करें।
·         व्रत के दौरान सभी लाल रंग की चीजों का प्रयोग करें तथा गुड़हल का फूल अर्पित करें। माँ को ये अतिप्रिय हैं।
·         अनेक बार पानी पीने से, पान खाने से, दिन में सोने से, मैथुन करने से उपवास दूषित हो जाता हैं।
·         आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
·         इसके बाद कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुंह पर सूत्र बांधें। कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
·         एक घर में तीन शक्तियों की पूजा नहीं करनी चाहिए।
·         कन्या भोजन कराएं फिर स्वयं फलाहार ग्रहण करें।  
·         कलश स्थापना करने या अखंड दीप जलाने वालों को 9 दिनों तक अपना घर खाली नहीं छोड़ना चाहिए।
·         कलश स्थापना से पहले मिट्टी में जौ बोकर उसे स्थापित किया जाता हैं।
·         काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
·         किसी का दिल दुखाना सबसे बड़ी हिंसा मानी जाती हैं।
·         क्षमा, सत्य, दया, दान, शौच, इन्द्रिय संयम, देवपूजा, अग्निहो़त्र, संतोष तथा चोरी न करना- यह 10 नियम संपूर्ण व्रतों में आवश्यक माने गए हैं।
·         घर के ही किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
·         घर में सात्विक भोजन बनना चाहिए। लहसून-प्याज, नॉनवेज से बचना चाहिए।
·         मूर्ति का आसन, पाद्य, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।
·         दुर्गा सप्तशती का पाठ व दुर्गा स्तुति करें। पाठ-स्तुति के बाद दुर्गाजी की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
·         नवरात्र का व्रत करने वालों को पूजा के दौरान बेल्ट, चप्पल-जूते या फिर चमड़े की बनी चीजें नहीं पहननी चाहिए।
·         नवरात्रि में 9 दिन का व्रत रखने वालों को इस व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ तथा बाल नहीं कटवाने चाहिए।
·         नवरात्रि में प्रतिदिन मंदिर जा कर माँ के दर्शन करने चाहिए।
·         पूजा के दौरान चप्पल या जूते न धारण करें। ऐसा करने से माँ का अपमान होता हैं।
·         पूजा के बाद सूर्य देव को जल देना चाहिए।
·         प्रतिपदा के दिन घर में ही ज्वारे बोने का भी विधान हैं। नवमी के दिन इन्हीं ज्वारों को, जिसमें बोए हैं, सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब में विसर्जन करना चाहिए। अष्टमी तथा नवमी महातिथि मानी जाती हैं। इन दोनों दिनों पारायण के बाद हवन करें फिर यथाशक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
·         महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान 7 दिन पूजन नहीं करना चाहिए।
·         यदि आप नवरात्रि में विधिवत कलश स्थापित कर माँ का पूजन कर रहे हैं तो कभी भी घर को एकदम खाली न रहने दें। कोई न कोई लगातार घर में बना रहना चाहिए।
·         वेदी के किनारे पर देवी की किसी धातु, पाषाण, मिट्टी व चित्रमय मूर्ति को विधि-विधान से विराजमान करें।
·         वेदी पर या समीप के ही पवित्र स्थान पर पृथ्वी का पूजन कर वहां सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
·         वेदी में जौ तथा गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं।
·         व्रत करने वाले मनुष्य को कांसे का बर्तन, मधु व पराए अन्न का त्याग करना चाहिए तथा व्रती को कीमती वस्त्र, अलंकार, सुगंधित वस्तुएं, इत्र आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए लेकिन स्वच्छ रहने को निषेध नहीं कहा गया  हैं।
·         व्रत के दौरान तामसिक भोजन नहीं लेना चाहिए। मसलन खाने में प्याज, लहसुन नहीं डालना चाहिए। मन में किसी भी तरह के बुरे ख्याल नहीं रखने चाहिए या नहीं आने चाहिए ।।
·         व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ तथा बाल कटवाने से परहेज करें।
·         व्रत खोलने से पहले छोटी कन्याओं को भोजन कराएं। कन्या को माँ का रूप माना जाता हैं।
·         व्रत में खाने में अनाज तथा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
·         व्रती को 9 दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए।
       धन्यवाद.......


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