18 September 2017

नवरात्रि 2017 | कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2017 | आश्विन नवरात्रि | Ghat Sthapana Kalash Sthapana Muhurat


नवरात्रि 2017 | कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2017 | आश्विन नवरात्रि

Ghat Sthapana Kalash Sthapana Muhurat

        जय माता दी
जय श्री कालका माँ
नमस्कार दोस्तों! में विनोद पांडे, आपका हार्दिक स्वागत करता हु, आपके अपने youtube चेंनल पर!





नवरात्र हिन्दुओं का एक पवित्र त्यौहार है। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं तथा इन दिनों में माता के नौ रुपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्र आते है, तथा गुप्त नवरात्र भी आते है। पहले नवरात्र का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष से होता है। तथा अगले नवरात्र शारदीय नवरात्रे कहलाते है जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक रहते है। इन नवरात्रों के बाद दशहरा या विजयादशमी पर्व मनाया जाता है। इस त्यौहार में चाहे सुहागन हो कन्या नौ दिनों का व्रत सभी रखते है। यह त्यौहार गुजरात तथा बंगाल के साथ-साथ पूरे भारत में बड़े ही धूम-धाम एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है। दोनों ही नवरात्रों में माता जी का पूजन विधिवत् किया जाता है। देवी का पूजन करने की विधि दोनों ही नवरात्रों में लगभग एक समान रहती है।
हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा से पहले भगवन गणेश जी की पूजा का विधान है इसलिए नवरात्र की शुभ पूजा से पहले कलश के रूप में श्री गणेश महाराज को स्थापित किया जाता है। नवरात्र के आरंभ की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश या घट की स्थापना की जाती है। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है।
आइये हम आफो बताते है,
शारदीय नवरात्र कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
21 सितम्बर गुरूवार के दिन से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। तथा यह 29 सितम्बर तक रहेंगे। नवरात्र के प्रथम दिन अर्थात 21 सितंबर को माता दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होगी। इस दिन सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक का समय अमृत योग है। यदि इस समय आप कलश स्थापना करेंगे तो आपके लिए अत्यंत शुभ होगा। अतः अमृत योग का समय सर्वश्रेष्ट होने से आप कलश स्थापना सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक करे।
कृपया ध्यान दे:-
1.     नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता है वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए। लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
2.     नवरात्र में कलश स्थापना किसी भी समय की जाती है। नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा समय प्रारंभ हो जाता है अतः यदि जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाता है तो वो पूरे दिन किसी भी समय कलश स्थापित कर सकता है।
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             धन्यवाद!



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