10 August 2022

रक्षा बंधन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है 2022 Raksha Bandhan Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat kab hai

rakhi bandhan rakhi bandhne muhurat 2022
Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat 

 रक्षा बंधन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है 2022 Raksha Bandhan Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat kab hai

रक्षाबन्धन मन्त्रः (Raksha Bandhan Mantra)

येन बद्धो वली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वा रक्षबध्नामी रक्षे माचल माचल ॥
Yen Baddho bali raja danvendro mahabal,
ten twam RakshBadhnami rakshe machalmachal.
The meaning of Raksha Mantra - "I tie you with the same Raksha thread which tied the most powerful, the king of courage, the king of demons, Bali. O Raksha (Raksha Sutra), please don't move and keep fixed throughout the year."
 

🌷 रक्षाबंधन 🌷

सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम् ।
सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्।।
 
🙏🏻 इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है ।इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्षभर मनुष्य रक्षित हो जाता हैं। (भविष्य पुराण)
 
रक्षाबंधन का पर्व सनातन भारतवर्ष में मनाये जाने वाले पवित्र तथा प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। रक्षाबंधन का पर्व भाई व बहन के अतुल्य स्नेह के प्रतीक के स्वरूप में भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता हैं, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं साथ ही अपने भाई की दिर्ध आयु के लिए प्रार्थना करती हैं तथा भाई अपनी बहनकी रक्षा करने का वचन देता हैं। हिंदुओ में रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ, धूमधाम से मनाया जाता हैं। साथ ही सिख, जैन, तथा लगभग सभी भारतीय समुदायों में यह पर्व बिना किसी रुकावट के तथा प्रेम-भाव के साथ मनाया जाता हैं। रक्षाबंधन के पर्व में रक्षा सूत्र अर्थात राखीका सबसे अधिक विशेष महत्व होता हैं। माना जाता हैं की राखीबहन का अपने भाई के प्रति स्नेह व आदर का प्रतीक होती हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं जो की अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता हैं। रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन के पश्चात भगवान् श्री कृष्ण का जन्मदिन अर्थात श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता हैं।
रक्षाबंधन के शुभ दिवस पर प्रत्येक जातक को चाहिए की वह रक्षा सूत्र को भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष अर्पित कर 108 या उस से भी अधिक बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या शिव के पंचाक्षरी तथा अत्यंत प्रभावशाली मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें तथा उसके पश्चात ही रक्षा सूत्र को अपने भाईयों की कलाई पर बांधे। ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं। क्योंकि श्रावण का पवित्र मास सम्पूर्ण प्रकार से भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता हैं।
 

रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त 2022

इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त, गुरुवार के दिन 10 बजकर 38 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 12 अगस्त, शुक्रवार की प्रातः 07 बजकर 05 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।
 
अतः इस वर्ष 2022 में रक्षा-बंधन का पर्व 11 अगस्त, गुरुवार के शुभ दिवस मनाया जाएगा। 
 
इस वर्ष, रक्षाबंधन के त्योहार पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त 11 अगस्त, गुरुवार की साँय 08 बजकर 52 से 09 बजकर 12 मिनिट तक का रहेगा।
 

यह भी ध्यान रहे की,

१.  रक्षा बन्धन के दिन भद्रा, 11 अगस्त, गुरुवार की साँय 08 बजकर 51 मिनिट पर समाप्त हो जाने के कारण राखी बांधने का शुभ मुहूर्त साँय 08 बजकर 52 मिनिट से साँय 09 बजकर 12 मिनिट तक, तथा पुनः 12 अगस्त की प्रातः 05 बजकर 52 मिनिट अर्थात सूर्योदय होने के साथ ही प्रारम्भ हो कर प्रातः 07 बजकर 05 मिनिट तक अर्थात पूर्णिमा तिथि के समाप्ति तक का रहेगा।
२.  वैदिक मतानुसार अपराह्न का समय राखी बांधने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त माना गया हैं, जो कि हिन्दु समय गणना के अनुसार दोपहर के पश्चात का समय होता हैं।
३.  यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि के कारण उपयुक्त नहीं हैं तो, प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना गया हैं।
४.  हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्यों हेतु भद्रा का त्याग किया जाना चाहिये। अतः भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना गया हैं।


रक्षाबंधन पर राखी बांधने की संपूर्ण विधि (Raksha Bandhan Par Rakhi Bandhane Ki Sampurn Vidhi)

 
1. रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भाई और बहन को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर लेना चाहिए।
 
2. इसके बाद बहन एक चांदी या स्टील की थाली में रोली, चंदन, अक्षत राखी, मिठाई, घी का दीपक और पानी वाला नारियल लें। जिसके चारो तरफ रोली बंधी हुई हो।
 
3. इसके बाद रक्षाबंधन की इस थाली में घी का दीपक प्रज्वलित करें और फिर सबसे पहले अपने ईष्ट देव की पूजा करके उनकी आरती करें।
 
4. आरती करने के बाद अपने ईष्ट को राखी अर्पित करें। इसके बाद एक चौक बनाए और अपने भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठा एक लकड़ी के पटरे पर बैठा दें।
 
5. इसके बाद भाई अपने सिर पर कोई रुमाल या फिर साफ वस्त्र रख ले।
 
6.इसके बाद भाई को रोली और चंदन का तिलक करें और फिर उस तिलक पर अक्षत लगाएं।
 
7. भाई को तिलक करने के बाद उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधें।
 
8.जब आप अपने भाई को राखी बांध रही हों तो इस मंत्र को अवश्य बोलें।
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः|
तेन त्वां मनुबध्नामि, रक्षंमाचल माचल ||
 
9. इसके बाद अपने भाई की आरती उतारकर उसे मिठाई खिलाएं और भगवान से उनकी लंबी आयु के लिए प्रार्थना करें।
 
10. इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार स्वरूप कुछ अवश्य दे और अपनी बहन के पैर अवश्य छुए।

14 July 2022

सावन का महीना कब से शुरू हैं | श्रावण मास सोमवार व्रत कब से हैं 2022 | Sawan Kab se Start hai

सावन का महीना कब से शुरू हैं | श्रावण मास सोमवार व्रत कब से हैं 2022 | Sawan Kab se Start hai 

sawan mahina somvar kab se hai
Sawan Kab se Start hai

#Sawan #SawanSomvar #ShravanSomvar #SawanMahina

 करपूर गौरम करूणावतारम, संसार सारम भुजगेन्द्र हारम ।

सदा वसंतम हृदयारविंदे, भवम भवानी सहितं नमामि ॥

जिनका शरीर कपूर के समान गोरा हैं, जो करुणा के अवतार हैं, जो शिव संसार के सार अर्थात मूल हैं। तथा जो महादेव सर्पराज को गले के हार के रूप में धारण करते हैं, ऐसे सदैव प्रसन्न रहने वाले भगवान शिव को मैं अपने हृदय कमल में शिव तथा पार्वती के साथ नमस्कार करता हूँ।

 

सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार चतुर्थी, एकादशी, त्रयोदशी-प्रदोष, अमावस्या, पूर्णिमा आदि जैसे अनेक व्रत तथा उपवास किए जाते हैं। किन्तु चातुर्मास को व्रतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया हैं। चातुर्मास का समय 4 मास की अवधि में होता हैं, जो की आषाढ़ शुक्ल एकादशी अर्थात देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात प्रबोधिनी एकादशी तक चलता हैं। चातुर्मास के चार मास इस प्रकार हैं:- श्रावण, भाद्रपद, आश्विन तथा कार्तिक।

चातुर्मास के प्रथम मास को ही श्रावण मास कहा जाता हैं। श्रावण शब्द, श्रवण से बना हैं जिसका अर्थ होता हैं सुनना, अर्थात सुनकर धर्म को समझना। वेदों के ज्ञान को ईश्वर से सुनकर ही ऋषियों ने समस्त प्राणियों को सुनाया था। सावन का महीना भक्तिभाव तथा सत्संग के लिए विशेष होता हैं। सावन के मास में विशेष रूप से भगवान शिव, माता पार्वती तथा श्री कृष्णजी की पूजा-अर्चना की जाती हैं। भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु सम्पूर्ण सावन के मास को अत्यंत शुभ व फलदायक माना जाता हैं। अतः भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु समस्त भक्तगण श्रावण मास के दौरान विभिन्न प्रकार से व्रत तथा उपवास रखते हैं।

श्रावण मास के दौरान समस्त उत्तरी भारत के राज्यों में सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ माना जाता हैं। कई भक्त सावन मास के प्रथम सोमवार के दिन से ही सोलह सोमवार उपवास का प्रारम्भ करते हैं। श्रावण मास में प्रत्येक मंगलवार भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती माँ को समर्पित होते हैं। श्रावण मास के दौरान मंगलवार का उपवास मंगल-गौरी व्रत के रूप में जाना जाता हैं।

वैसे तो प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की उपासना के लिये उपयुक्त माना जाता हैं किन्तु सावन के सोमवार का महत्व अधिक माना गया हैं। श्रावण के सोमवार व्रत की पूजा भी अन्य सोमवार व्रत के अनुसार की जाती हैं। इस व्रत में केवल एकाहार अर्थात एक समय भोजन ग्रहण करने का संकल्प लिया जाता हैं। भगवान भोलेनाथ तथा माता पार्वती जी की धूप, दीप, जल, पुष्प आदि से पूजा करने का विधान हैं। शिव पूजा के लिये सामग्री में उनकी प्रिय वस्तुएं भांग, धतूरा आदि भी रख सकते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को जल अवश्य अर्पित करना चाहिये। रात्रि में भूमि पर आसन बिछा कर शयन करना चाहिये। सावन के पहले सोमवार से आरंभ कर 9 या 16 सोमवार तक लगातार उपवास करना चाहिये तथा उसके पश्चात 9वें या 16वें सोमवार पर व्रत का उद्यापन अर्थात पारण किया जाता हैं। यदि लगातार 9 या 16 सोमवार तक उपवास करना संभव न हो तो आप केवल सावन के चार सोमवार इस व्रत को कर सकते हैं।

 

सावन के सोमवार का व्रत 2022

इस वर्ष, श्रावण सोमवार का व्रत कब से प्रारम्भ हैं तथा कब तक किया जाएगा?

भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों में चंद्र पंचांग के आधार पर श्रावण मास के प्रारम्भ के समय में पंद्रह दिनों का अंतर आ जाता हैं। पूर्णिमांत पंचांग में श्रावण मास अमांत पंचांग से पंद्रह दिन पहले प्रारम्भ हो जाता हैं। अमांत चंद्र पंचांग का प्रयोग गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, कर्नाटक तथा तमिलनाडु में किया जाता हैं, वहीं पूर्णिमांत चंद्र पंचांग का उपयोग उत्तरी भारत के राज्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, बिहार तथा झारखंड में किया जाता हैं। साथ ही, नेपाल तथा उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में तो सावन के सोमवार को सौर पंचांग के अनुसार मनाया जाता हैं। अतः सावन सोमवार की आधी तारीखें दोनों पंचांग में भिन्न-भिन्न होती हैं।

 

सावन सोमवार व्रत 2022

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, बिहार तथा झारखण्ड के लिए सावन के सोमवार का व्रत

 

श्रावण सोमवार व्रत 2022

 

श्रावण प्रारम्भ (उत्तर)

14 जुलाई 2022

गुरुवार

 

प्रथम श्रावण सोमवार व्रत

18 जुलाई 2022

सोमवार

 

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत

25 जुलाई 2022

सोमवार

 

तृतीय श्रावण सोमवार व्रत

01 अगस्त 2022

सोमवार

 

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत

08 अगस्त 2022

सोमवार

 

श्रावण समाप्त (उत्तर)

12 अगस्त 2022

शुक्रवार

 

 

सावन सोमवार व्रत 2022

गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, कर्नाटक तथा तमिलनाडु के लिए सावन के सोमवार का व्रत

 

श्रावण प्रारम्भ (दक्षिण)

29 जुलाई 2022

शुक्रवार

 

प्रथम श्रावण सोमवार व्रत

01 अगस्त 2022

सोमवार

 

द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत

08 अगस्त 2022

सोमवार

 

तृतीय श्रावण सोमवार व्रत

15 अगस्त 2022

सोमवार

 

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत

22 अगस्त 2022

सोमवार

 

श्रावण समाप्त (दक्षिण)

27 अगस्त 2022

शनिवार



Sawan Somwar Vrat 2022

Monday fast of Sawan for Uttar Pradesh, Rajasthan, Madhya Pradesh, Punjab, Himachal Pradesh, Uttarakhand, Chhattisgarh, Bihar and Jharkhand


Shravan Monday Vrat 2022


Shravan Begins (North)

14 July 2022

Thursday


first shravan monday fast

18 July 2022

monday


Second Shravan Monday fast

25 July 2022

monday


third shravan monday fast

01 August 2022

monday


4th Shravan Monday fast

08 August 2022

monday


Shravan ends (answer)

12 August 2022

Friday



Sawan Somwar Vrat 2022

Sawan Monday fasting for Gujarat, Maharashtra, Andhra Pradesh, Telangana, Goa, Karnataka and Tamil Nadu


Shravan Begins (South)

29 July 2022

Friday


first shravan monday fast

01 August 2022

monday


Second Shravan Monday fast

08 August 2022

monday


third shravan monday fast

15 August 2022

monday


4th Shravan Monday fast

22 August 2022

monday


Shravan ends (South)

27 August 2022

Saturday

03 May 2022

श्री हवन पूजन सामग्री सूची | Shri Hawan Puja Samagri List

 श्री हवन पूजन सामग्री सूची
(Shri Hawan Puja Samagri List)

Puja Samagri List
Hawan Puja Samagri List

1) श्री फल/नारियल - 1-पानीवाला साबूत कलश के लिए, 1-कोपा (कोपरा) पूर्णाहुति के लिए
2) भगवान जी प्रतिमा या तस्वीर
3) मिट्टी या तांबे का कलश व ढक्कन-1, मिट्टी/तांबे का दीया बड़ा-1, छोटा-1
4) लौंग - 10 ग्राम, इलायची - 10 ग्राम
5) पान के पत्ते - 5, सुपारी - 5
6) पंच मेवा (गरी/नारियल), चिरौंजी, बादाम, छुहारा और किशमिश का मिश्रण) - 200 ग्राम
7) रोली (सिंदूर) -1 पैकेट, मोली - 1गोली, जनेऊ (यज्ञोपवीत) - 3
8) पीला/सफ़ेद या लाल कपड़ा - सवा मीटर
9) पंचामृत (दूध,दही,घी,शहद,चीनी)
10) धूप, रूई/बाती, सलाई/माचिस -1 पैकेट
11) शुद्ध देशी घी - 500 ग्राम, गंगाजल - 250 मिली
12) शहद - 250 ग्राम, इत्र- छोटी सीसी
13) गुड या गुड वाली शक्कर - 250 ग्राम
14) साबुत चावल और गेंहू का आंटा - 250 ग्राम,  हल्दी - 50 ग्राम
15) हल्दी की गाँठ - 1 गाँठ
16) नैवेद्य (प्रसाद) के लिए लड्डू/हलुआ/मिठाई - 500 ग्राम
17) ॠतु फल - श्रद्धा अनुसार (5 प्रकार के)
18) कुशा/दूर्वा/दुप, फूल की माला और फूल
19) भगवान जी के लिए चौकी, यजमान के बैठने के लिए आसन
20) कपूर टिक्की (Saraswati Camphor) - 10 टिक्की
21) हवन सामग्री - 500 ग्राम, काले तिल - 250 ग्राम, जौ - 75 ग्राम
22) हवन कुण्ड और आम की लकडियां - 1.25 किलो, आम के पत्ते - 11 पत्ते
23) आम की लकड़ी और नवग्रह समिधा
24) दोने/कटोरी - 5, बड़ी साफ थाली-3
25) गूगल, इंद्रजौं, कमल गट्टा, अगर, तगर, बेलगिरी, बालछड़ - यथासंभव

 - पंडित विनोद पांडे

7878489588

 vkjpandey.in

नोट  शक्कर गुड वाली होनी चाहिए। चावल टूटे हुए न हो। पंच मेवा मे बादाम, छुवारे, किशमिश, मखाने, काजू पांच होने चाहिए। मिठाई में बुन्दी के लड्डू, बर्फी, बेसन के लड्डू या बर्फी, मिल्क केक, कलाकन्द, नारियल की बर्फी या कोई भी सुखी मिठाई लेनी है। आटे का घी में चूर्ण (कषार, महाभोग) सूखा प्रसाद भी बना सकते है। ॠतु फल मौसम के कोई भी पांच फल लेने है। जिसमे केला, आनार लेना जरूरी है। तीन फल कुछ भी मौसम वाले फल ले सकते है। दूध,दही, पान के पत्ते बसी नहीं होने चाहिए। पूजन कोई भी हो लकडी की चौकी जरूर होनी चाहिए। अगर आप स्वयं भी पूजन कर रहे हो या करवा रहे हो। यदि माताजी की पुजा है तो, भगवती श्रृंगार में अपने हाथ की चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, हार, माला,कंघी, दर्पण, सैंट, जो आप उपयोग में स्वयं के लिए लाते है और भगवती की साड़ी काले, नीले रंग की ना हो। सुनार से चांदी की देवी की मूर्ति में सोने की बिंदी मस्तक में लगवा दे। यदि भगवान शिव का पूजन है तो, बेलपत्र पर ॐ नमः शिवाय लिखें। भगवान विष्णु जी के पूजन में, पंचामृत, केले के पत्ते और तुलसी अवश्य होनी चाहिए। भगवान गणेश जी के पूजन में भोग लड्डुओ का लगाया जाता है। किसी भी पूजन में शुभ मुहूर्त का ध्यान अवश्य रखें। इस के लिये एक विद्वान ब्राह्मण की सहायता लें, जो विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण कर पूजा को संपूर्ण करता हैं। धन्यवाद!


18 January 2022

पूर्णिमा का व्रत कब है 2022 में | Purnima Vrat kab hai 2022 Dates List | Pournami Days | पूनम कब है

पूर्णिमा का व्रत कब है 2022 में | Purnima Vrat kab hai 2022 Dates List | Pournami Days | पूनम कब है 

poonam purnima vrat kab hai 2022
poonam purnima vrat


पूर्णिमा पूजन मंत्र -

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे,
महादेवाय धीमहि,
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
 
पूर्णमासी का व्रत पूर्णिमा के दिवस या पूर्णिमा के एक दिवस पूर्व हो सकता हैं साथ ही, यह पिछले दिवस पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ होने के समय पर निर्भर करता हैं।
पूर्णिमा व्रत तथा श्री सत्यनारायण पूजा जो कि पूर्ण चन्द्रमा के दिवस होते हैं, पूर्णिमा तिथि के एक दिवस पहले भी कर सकते हैं। श्री सत्यनारायण व्रत के दिनों के बारे में जानने के लिए श्री सत्यनारायण पूजा का विडियो देखिये।
पूर्णमासी व्रत पूर्णिमा के दिवस या पूर्णिमा के एक दिवस पहले अर्थात चतुर्दशी के दिवस किया जाता हैं। उपवास का दिवस पूर्णिमा तिथि के प्रारम्भ होने के समय पर निर्भर करता हैं।
पूर्णिमा का व्रत चतुर्दशी के दिवस केवल तब होता हैं जब पूर्णिमा पिछले दिवस मध्याह्न के दौरान ही प्रारम्भ हो जाती हैं। ऐसा माना जाता हैं कि अगर चतुर्दशी मध्याह्न के पश्चात भी व्याप्त रहती हैं तो वह पूर्णिमा तिथि को अशुद्ध कर देती हैं तथा ऐसा चतुर्दशी का दिवस पूर्णिमा उपवास के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। ऐसा होने पर सम्पूर्ण सायंकाल व्यापनी पूर्णिमा वाले दिवस का भी त्याग कर दिया जाता हैं। पूर्णमासी के इस नियम पर कोई मतभेद नहीं हैं।
उत्तरी भारत में जिस दिवस पूर्ण चंद्रमा होता हैं उसे पूर्णिमा कहते हैं तथा दक्षिणी भारत में जिस दिवस पूरा चाँद होता हैं उसे पूर्णामी कहते हैं। दक्षिणी भारत में इस दिवस का उपवास पूर्णामी व्रतम के नाम से जाना जाता हैं। पूर्णामी व्रतम सूर्योदय से प्रारम्भ कर चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता हैं।
पूर्णिमा व्रत के दिवस किन्हीं दो स्थानों के लिए भिन्न-भिन्न भी हो सकते हैं।
 

2022 में पूर्णिमा व्रत के दिन -

17 जनवरी, सोमवार
पौष पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 03:18 am, 17 जनवरी
समाप्त- 05:17 am, 18 जनवरी
 
16 फरवरी, बुधवार
माघ पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 09:42 pm, 15 फरवरी
समाप्त- 10:25 pm, 16 फरवरी
 
17 मार्च 17, गुरुवार
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 01:29 pm, 17 मार्च
समाप्त- 12:47 pm, 18 मार्च
 
16 अप्रैल, शनिवार
चैत्र पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 02:25 am, 16 अप्रैल
समाप्त- 12:24 am, 17 अप्रैल
 
15 मई 2022, रविवार
वैशाख पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 12:45 pm, 15 मई
समाप्त- 09:43 am, 16 मई
 
14 जून 2022, मंगलवार
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 09:02 pm, 13 जून
समाप्त- 05:21 pm, 14 जून
 
13 जुलाई, बुधवार
आषाढ़ पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 04:00 am, 13 जुलाई
समाप्त- 12:06 am, 14 जुलाई
 
11 अगस्त, गुरुवार
श्रावण पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 10:38 am, 11 अगस्त
समाप्त- 07:05 am, 12 अगस्त
 
10 सितम्बर, शनिवार
भाद्रपद पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 06:07 pm, 09 सितम्बर
समाप्त- 03:28 pm, 10 सितम्बर
 
09 अक्तूबर, रविवार
आश्विन पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 03:41 am, 09 अक्तूबर
समाप्त- 02:24 am, 10 अक्तूबर
 
08 नवम्बर, मंगलवार
कार्तिक पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 04:15 pm, 07 नवम्बर
समाप्त- 04:31 pm, 08 नवम्बर
 
07 दिसम्बर, बुधवार
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 08:01 am, 07 दिसम्बर
समाप्त- 09:37 am, 08 दिसम्बर
 
06 जनवरी 2023, शुक्रवार
पौष पूर्णिमा व्रत
प्रारम्भ- 02:14 am, 06 जनवरी
समाप्त- 04:37 am, 07 जनवरी


Purnima Puja Mantra -

Tatpurushaya Vidmahe,
Mahadevay Dhimahi,
Tanno Rudra: Prachodayat
 
Purnimaasi fasting can be done on the full moon day or one day before the full moon day, depending on the time of the start of the full moon day on the previous day.
Purnima Vrat and Shree Satyanarayan Puja, which is a full moon day, can be done a day before the full moon date. To know about the days of Shree Satyanarayan Vrat, watch the video of Shree Satyanarayan Puja.
Poornima Vrat is observed on the full moon day or one day before the full moon i.e. on Chaturdashi. The day of fasting depends on the time of the start of Purnima Tithi.
Poornima fasting is observed on Chaturdashi day only when the full moon starts during midday on the previous day. It is believed that if Chaturdashi prevails even after midday, then it makes Purnima Tithi impure and such Chaturdashi day is not considered suitable for Purnima fasting. When this happens, even the full moon day of the entire evening is abandoned. There is no difference of opinion on this rule of the full moon.
The day on which there is a full moon in northern India is called Poornima and in southern India, the day on which there is a full moon is called Poornima. In Southern India, the fasting of this day is known as Poornima Vratam. Poornima Vratam is performed from sunrise to sunrise and till the sighting of the moon.
The days of Purnima Vrat can also be different for any two places.
 

Purnima fasting day in 2022 -

January 17, Monday
Paush Purnima Vrat
Starts- 03:18 am, January 17
Ends- 05:17 am, January 18
 
February 16, Wednesday
Magha Purnima Vrat
Begins - 09:42 pm, February 15
Ends - 10:25 pm, February 16
 
March 17, Thursday
Falgun Purnima Vrat
Begins - 01:29 pm, March 17
Ends - 12:47 pm, March 18
 
April 16, Saturday
Chaitra Purnima Vrat
Starts- 02:25 am, April 16
Ends - 12:24 am, April 17
 
15 May 2022, Sunday
Vaishakh Purnima Vrat
Begins - 12:45 pm, May 15
Ends- 09:43 am, May 16
 
14 June 2022, Tuesday
Jyeshtha Purnima Vrat
Starts - 09:02 pm, June 13
Ends - 05:21 pm, June 14
 
July 13, Wednesday
Ashadh Purnima Vrat
Starts - 04:00 am, July 13
Ends - 12:06 am, July 14
 
August 11, Thursday
Shravan Purnima Vrat
Starts - 10:38 am, August 11
Ends- 07:05 am, August 12
 
September 10, Saturday
Bhadrapada Purnima Vrat
Start- 06:07 pm, 09 September
Ends - 03:28 pm, September 10
 
09 October, Sunday
Ashwin Purnima Vrat
Starts- 03:41 am, October 09
Ends - 02:24 am, October 10
 
08 November, Tuesday
Kartik Purnima Vrat
Begins - 04:15 pm, 07 November
Ends - 04:31 pm, 08 November
 
07 December, Wednesday
Margashirsha Purnima Vrat
Starts- 08:01 am, 07 December
Ends- 09:37 am, December 08
 
06 January 2023, Friday
Paush Purnima Vrat
Starts- 02:14 am, January 06
Ends- 04:37 am, Jan 07

16 January 2022

प्रदोष व्रत कब है 2022 | Trayodashi Vrat kab hai | Pradosh Vrat kab hai Dates List 2022 Teras kab hai

प्रदोष व्रत कब है 2022 | Trayodashi Vrat kab hai | Pradosh Vrat kab hai Dates List 2022 Teras kab hai 

pradosh vrat 2022 dates in hindi
pradosh vrat kab hai 2022


प्रदोषम मंत्र
।। ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।।
 
सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है। इस दिन भगवान शिव एवं देवी पार्वती माँ की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है एवं मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रत्येक मास में दो प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष आते हैं।
 

        प्रदोष व्रत के लाभ

सोमवार के दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
मंगलवार के दिन व्रत रखने से बीमारीयों से राहत मिलती है।
बुधवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं एवं इच्छाएं पूर्ण होती है।
गुरुवार को व्रत रखने से दुश्मनों का नाश होता है।
शुक्रवार को व्रत रखने से शादीशुदा जिंदगी एवं भाग्य अच्छा होता है।
शनिवार को व्रत रखने से संतान प्राप्त होती है।
रविवार के दिन व्रत रखने से अच्छी सेहत एवं उम्र लम्बी होती है।
 
शिव मन्दिरों में सायंकाल के समय प्रदोषम मंत्र का जाप किया जाता है।


        प्रदोषम मंत्र

।। ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।।
 

प्रदोष व्रत की सूची 2022

प्रदोष पूजा का समय

15 जनवरी, शनिवार
शनि प्रदोष व्रत
06:02 से 08:40
पौष, शुक्ल त्रयोदशी
 
30 जनवरी, रविवार
रवि प्रदोष व्रत
06:13 से 08:48
माघ, कृष्ण त्रयोदशी
 
13 फरवरी, रविवार
रवि प्रदोष व्रत
06:42 से 08:53
माघ, शुक्ल त्रयोदशी
 
28 फरवरी, सोमवार
सोम प्रदोष व्रत
06:29 से 08:57
फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी
 
15 मार्च, मंगलवार
भौम प्रदोष व्रत
06:36 से 09:00
फाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी
 
29 मार्च, मंगलवार
भौम प्रदोष व्रत
06:41 से 09:01
चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी
 
14 अप्रैल, गुरुवार
गुरु प्रदोष व्रत
06:47 से 09:03
चैत्र, शुक्ल त्रयोदशी
 
28 अप्रैल, गुरुवार
गुरु प्रदोष व्रत
06:53 से 09:06
वैशाख, कृष्ण त्रयोदशी
 
13 मई, शुक्रवार
शुक्र प्रदोष व्रत
07:00 से 09:09
वैशाख, शुक्ल त्रयोदशी
 
27 मई, शुक्रवार
शुक्र प्रदोष व्रत
07:07 से 09:14
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी
 
12 जून, रविवार
रवि प्रदोष व्रत
07:13 से 09:19
ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी
 
26 जून, रविवार
रवि प्रदोष व्रत
07:16 से 09:22
आषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी
 
11 जुलाई, सोमवार
सोम प्रदोष व्रत
07:16 से 09:23
आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी
 
25 जुलाई, सोमवार
सोम प्रदोष व्रत
07:12 से 09:21
श्रावण, कृष्ण त्रयोदशी
 
09 अगस्त, मंगलवार
भौम प्रदोष व्रत
07:04 से 09:15
श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी
 
24 अगस्त, बुधवार
बुध प्रदोष व्रत
06:52 से 09:07
भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी
 
08 सितम्बर, गुरुवार
गुरु प्रदोष व्रत
06:38 से 08:56
भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी
 
23 सितम्बर, शुक्रवार
शुक्र प्रदोष व्रत
06:22 से 08:45
आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी
 
07 अक्तूबर, शुक्रवार
शुक्र प्रदोष व्रत
06:09 से 08:35
आश्विन, शुक्ल त्रयोदशी
 
22 अक्तूबर, शनिवार
शनि प्रदोष व्रत
06:02 से 08:26
कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी
 
05 नवम्बर, शनिवार
शनि प्रदोष व्रत
05:46 से 08:20
कार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी
 
21 नवम्बर, सोमवार
सोम प्रदोष व्रत
05:41 से 08:18
मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी
 
05 दिसम्बर, सोमवार
सोम प्रदोष व्रत
05:41 से 08:20
मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी
 
21 दिसम्बर, बुधवार
बुध प्रदोष व्रत
05:46 से 08:26
पौष, कृष्ण त्रयोदशी
 
04 जनवरी, 2023, बुधवार
बुध प्रदोष व्रत
05:55 से 08:33
पौष, शुक्ल त्रयोदशी
 

Pradosh Vrat List 2022

Pradosh Puja Time

 
Benefits of Pradosh Vrat
By observing fast on Monday, all the wishes are fulfilled.
Keeping a fast on Tuesday gives relief from diseases.
By observing Pradosh fast on Wednesday, all the wishes and desires are fulfilled.
Enemies are destroyed by observing fast on Thursday.
Keeping fast on Friday brings good luck and married life.
Keeping a fast on Saturday gives birth to a child.
Keeping fast on Sunday brings good health and long life.
 
Pradosham mantra is chanted in Shiva temples in the evening.

Pradosham Mantra

, Om Panchavaktraya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi Tanno Rudrah Prachodayat.
 
List of Pradosh Vrat 2022
Pradosh Puja Timings
15 January, Saturday
Shani Pradosh fast
06:02 to 08:40
Paush, Shukla Trayodashi
 
30 January, Sunday
ravi pradosh fast
06:13 to 08:48
Magha, Krishna Trayodashi
 
February 13, Sunday
ravi pradosh fast
06:42 to 08:53
Magha, Shukla Trayodashi
 
28 February, Monday
som pradosh fast
06:29 to 08:57
Falgun, Krishna Trayodashi
 
March 15, Tuesday
bhum pradosh fast
06:36 to 09:00
Falgun, Shukla Trayodashi
 
March 29, Tuesday
bhum pradosh fast
06:41 to 09:01
Chaitra, Krishna Trayodashi
 
April 14, Thursday
Guru Pradosh Vrat
06:47 to 09:03
Chaitra, Shukla Trayodashi
 
April 28, Thursday
Guru Pradosh Vrat
06:53 to 09:06
Vaishakh, Krishna Trayodashi
 
May 13, Friday
Shukra Pradosh fast
07:00 to 09:09
Vaishakh, Shukla Trayodashi
 
May 27, Friday
Shukra Pradosh fast
07:07 to 09:14
Eldest, Krishna Trayodashi
 
June 12, Sunday
ravi pradosh fast
07:13 to 09:19
Jyeshtha, Shukla Trayodashi
 
June 26, Sunday
ravi pradosh fast
07:16 to 09:22
Ashadha, Krishna Trayodashi
 
July 11, Monday
som pradosh fast
07:16 to 09:23
Ashadh, Shukla Trayodashi
 
July 25, Monday
som pradosh fast
07:12 to 09:21
Shravan, Krishna Trayodashi
 
09 August, Tuesday
bhum pradosh fast
07:04 to 09:15
Shravan, Shukla Trayodashi
 
August 24, Wednesday
Mercury Pradosh fast
06:52 to 09:07
Bhadrapada, Krishna Trayodashi
 
08 September, Thursday
Guru Pradosh Vrat
06:38 to 08:56
Bhadrapada, Shukla Trayodashi
 
September 23, Friday
Shukra Pradosh fast
06:22 to 08:45
Ashwin, Krishna Trayodashi
 
07 October, Friday
Shukra Pradosh fast
06:09 to 08:35
Ashwin, Shukla Trayodashi
 
October 22, Saturday
Shani Pradosh fast
06:02 to 08:26
Kartik, Krishna Trayodashi
 
05 November, Saturday
Shani Pradosh fast
05:46 to 08:20
Kartik, Shukla Trayodashi
 
November 21, Monday
som pradosh fast
05:41 to 08:18
Margashirsha, Krishna Trayodashi
 
05 December, Monday
som pradosh fast
05:41 to 08:20
Margashirsha, Shukla Trayodashi
 
December 21, Wednesday
Mercury Pradosh fast
05:46 to 08:26
Paush, Krishna Trayodashi
 
January 04, 2023, Wednesday
Mercury Pradosh fast
05:55 to 08:33
Paush, Shukla Trayodashi
 
 
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत त्रयोदशी के दिन रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत {शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष} होते हैं।

13 January 2022

एकादशी व्रत कब है | Ekadashi Vrat Kab hai | आज कौन सी एकादशी है | Ekadashi Dates 2022 | ग्यारस कब है

एकादशी कब की है? ग्यारस का व्रत कब का है | Ekadashi kab hai? Ekadashi Vrat Kab hai 2022 Dates List

ekadashi vrat kab ki hai 2022
ekadashi vrat kab hai

 २०२२ एकादशी उपवास कब है?

Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी

Shattila Ekadashi षटतिला एकादशी

Jaya Ekadashi जया एकादशी

Vijaya Ekadashi विजया एकादशी

Amalaki Ekadashi आमलकी एकादशी

Papmochani Ekadashi पापमोचिनी एकादशी

Kamada Ekadashi कामदा एकादशी

Varuthini Ekadashi वरुथिनी एकादशी

Mohini Ekadashi मोहिनी एकादशी

Apara Ekadashi अपरा एकादशी

Nirjala Ekadashi निर्जला एकादशी

Yogini Ekadashi योगिनी एकादशी

Devshayani Ekadashi देवशयनी एकादशी

Kamika Ekadashi कामिका एकादशी

Putrada Ekadashi पुत्रदा एकादशी

Aja Ekadashi अजा एकादशी

Padma Ekadashi पद्मा एकादशी

Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी

Adhik Maas Ekadashi अधिक मास एकादशी

Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी

Rama Ekadashi रमा एकादशी

Devutthana Ekadashi देवोत्थान एकादशी

Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी

Mokshada Ekadashi मोक्षदा एकादशी

Saphala Ekadashi सफला एकादशी

Vaikuntha Ekadashi वैकुण्ठ एकादशी


॥ श्री जानकी बल्लभो सीताराम हरिहरो विजयतेतराम ॥

2022 एकादशी उपवास कब है?

 

13 जनवरी, गुरुवार

पौष पुत्रदा-वैकुण्ठ एकादशी

पौष, शुक्ल एकादशी

 

28 जनवरी, शुक्रवार

षटतिला एकादशी

माघ, कृष्ण एकादशी

 

12 फरवरी, शनिवार

जया एकादशी

माघ, शुक्ल एकादशी

 

26 फरवरी, शनिवार

विजया एकादशी

फाल्गुन, कृष्ण एकादशी

 

27 फरवरी, रविवार

गौण- वैष्णव विजया एकादशी

फाल्गुन, कृष्ण एकादशी

 

14 मार्च, सोमवार

आमलकी एकादशी

फाल्गुन, शुक्ल एकादशी

 

28 मार्च, सोमवार

पापमोचिनी एकादशी

चैत्र, कृष्ण एकादशी

 

12 अप्रैल, मंगलवार

कामदा एकादशी

चैत्र, शुक्ल एकादशी

 

26 अप्रैल, मंगलवार

बरूथिनी एकादशी

वैशाख, कृष्ण एकादशी

 

12 मई, गुरुवार

मोहिनी एकादशी

वैशाख, शुक्ल एकादशी

 

26 मई, गुरुवार

अपरा एकादशी

ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी

 

10 जून, शुक्रवार

निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी

 

11 जून, शनिवार

गौण-वैष्णव निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी

 

24 जून, शुक्रवार

योगिनी एकादशी

आषाढ़, कृष्ण एकादशी

 

10 जुलाई, रविवार

देवशयनी एकादशी

आषाढ़, शुक्ल एकादशी

 

24 जुलाई, रविवार

कामिका एकादशी

श्रावण, कृष्ण एकादशी

 

08 अगस्त, सोमवार

श्रावण पुत्रदा एकादशी

श्रावण, शुक्ल एकादशी

 

23 अगस्त, मंगलवार

अजा एकादशी

भाद्रपद, कृष्ण एकादशी

 

06 सितम्बर, मंगलवार

परिवर्तिनी एकादशी

भाद्रपद, शुक्ल एकादशी

 

07 सितम्बर, बुधवार

वैष्णव परिवर्तिनी एकादशी

भाद्रपद, शुक्ल एकादशी

 

21 सितम्बर, बुधवार

इन्दिरा एकादशी

आश्विन, कृष्ण एकादशी

 

06 अक्तूबर, गुरुवार

पापांकुशा एकादशी

आश्विन, शुक्ल एकादशी

 

21 अक्तूबर, शुक्रवार

रमा एकादशी

कार्तिक, कृष्ण एकादशी

 

04 नवम्बर, शुक्रवार

देवोत्थान एकादशी

कार्तिक, शुक्ल एकादशी

 

20 नवम्बर, रविवार

उत्पन्ना एकादशी

मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी

 

03 दिसम्बर, शनिवार

मोक्षदा एकादशी

मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी

 

04 दिसम्बर, रविवार

वैष्णव मोक्षदा एकादशी

मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी

 

19 दिसम्बर, सोमवार

सफला एकादशी,

पौष, कृष्ण एकादशी

 

02 जनवरी 2023, सोमवार

पौष पुत्रदा वैकुण्ठ एकादशी

पौष, शुक्ल एकादशी

 

॥ श्री जानकी बल्लभो सीताराम हरिहरो विजयतेतराम ॥

 

Ekadashi Vrat Calendar 2022

 

When is the 2022 Ekadashi fasting?

Putrada Ekadashi Putrada Ekadashi

Shattila Ekadashi

Jaya Ekadashi Jaya Ekadashi

Vijaya Ekadashi Vijaya Ekadashi

Amalaki Ekadashi

Papmochani Ekadashi Papmochani Ekadashi

Kamada Ekadashi Kamada Ekadashi

Varuthini Ekadashi Varuthini Ekadashi

Mohini Ekadashi

Apara Ekadashi

Nirjala Ekadashi Nirjala Ekadashi

Yogini Ekadashi

Devshayani Ekadashi Devshayani Ekadashi

Kamika Ekadashi

Putrada Ekadashi Putrada Ekadashi

Aja Ekadashi

Padma Ekadashi Padma Ekadashi

Indira Ekadashi Indira Ekadashi

Adhik Maas Ekadashi

Papankusha Ekadashi Papankusha Ekadashi

Rama Ekadashi Rama Ekadashi

Devutthana Ekadashi

Utpanna Ekadashi

Mokshada Ekadashi Mokshada Ekadashi

Saphala Ekadashi

Vaikuntha Ekadashi

 

Shri Janaki Ballabho Sitaram Hariharo Vijayateram

 

When is 2022 Ekadashi fasting?

 

January 13, Thursday

Paush Putrada - Vaikuntha Ekadashi

Paush, Shukla Ekadashi

 

January 28, Friday

Shatila Ekadashi

Magha, Krishna Ekadashi

 

February 12, Saturday

Jaya Ekadashi

Magha, Shukla Ekadashi

 

26 February, Saturday

Vijaya Ekadashi

Falgun, Krishna Ekadashi

 

February 27, Sunday

Minor - Vaishnava Vijaya Ekadashi

Falgun, Krishna Ekadashi

 

March 14, Monday

Amalaki Ekadashi

Falgun, Shukla Ekadashi

 

28 March, Monday

Papmochini Ekadashi

Chaitra, Krishna Ekadashi

 

April 12, Tuesday

Kamada Ekadashi

Chaitra, Shukla Ekadashi

 

26 April, Tuesday

Baruthini Ekadashi

Vaishakh, Krishna Ekadashi

 

12 May, Thursday

Mohini Ekadashi

Vaishakh, Shukla Ekadashi

 

26 May, Thursday

Apara Ekadashi

Eldest, Krishna Ekadashi

 

June 10, Friday

Nirjala Ekadashi

Jyeshtha, Shukla Ekadashi

 

June 11, Saturday

Minor-Vaishnava Nirjala Ekadashi

Jyeshtha, Shukla Ekadashi

 

June 24, Friday

Yogini Ekadashi

Ashadh, Krishna Ekadashi

 

July 10, Sunday

Devshayani Ekadashi

Ashadh, Shukla Ekadashi

 

July 24, Sunday

Kamika Ekadashi

Shravan, Krishna Ekadashi

 

08 August, Monday

Shravan Putrada Ekadashi

Shravan, Shukla Ekadashi

 

August 23, Tuesday

Aja Ekadashi

Bhadrapada, Krishna Ekadashi

 

06 September, Tuesday

Parivartini Ekadashi

Bhadrapada, Shukla Ekadashi

 

07 September, Wednesday

Vaishnav Parivartini Ekadashi

Bhadrapada, Shukla Ekadashi

 

September 21, Wednesday

Indira Ekadashi

Ashwin, Krishna Ekadashi

 

06 October, Thursday

Papankusha Ekadashi

Ashwin, Shukla Ekadashi

 

October 21, Friday

Rama Ekadashi

Kartik, Krishna Ekadashi

 

04 November, Friday

Devotthan Ekadashi

Kartik, Shukla Ekadashi

 

November 20, Sunday

Uttana Ekadashi

Margashirsha, Krishna Ekadashi

 

03 December, Saturday

Mokshada Ekadashi

Margashirsha, Shukla Ekadashi

 

04 December, Sunday

Vaishnava Mokshada Ekadashi

Margashirsha, Shukla Ekadashi

 

December 19, Monday

Saphala Ekadashi,

Paush, Krishna Ekadashi

 

02 January 2023, Monday

Paush Putrada Vaikuntha Ekadashi

Paush, Shukla Ekadashi

 

Shri Janaki Ballabho Sitaram Hariharo Vijayateram