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18 August 2024

रक्षा बंधन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है 2024 Raksha Bandhan Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat kab hai ?

रक्षा बंधन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है 2024 Raksha Bandhan Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat kab hai ? 

rakhi bandhne ka shubh muhurat kab hai 2024
Raksha Bandhan 2024 Muhurat

रक्षा बन्धन भद्रा अन्त समय - दोपहर 01 बजकर 31 मिनिट
रक्षा बन्धन भद्रा पूँछ - 09:51 से 10:53
रक्षा बन्धन भद्रा मुख - 10:53 से 12:37
 

रक्षाबन्धन मन्त्रः (Raksha Bandhan Mantra)

येन बद्धो वली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वा रक्षबध्नामी रक्षे माचल माचल ॥
Yen Baddho bali raja danvendro mahabal,
ten twam RakshBadhnami rakshe machalmachal.
The meaning of Raksha Mantra - "I tie you with the same Raksha thread which tied the most powerful, the king of courage, the king of demons, Bali. O Raksha (Raksha Sutra), please don't move and keep fixed throughout the year."
 
येन=जिसके द्वारा  बद्धो= प्रतिबद्ध हुए, बली राजा= राजा बलि, दानवेन्द्रो=दानवों के राजामहाबल: = महाबलशाली,
तेन= उसी प्रतिबद्धता के सूत्र द्वारा  त्वाम=तुम्हे  अनुबध्नामि= मैं भी उसी रक्षा सूत्र मे बनाता हूँ, रक्षे=हे रक्षा सूत्रमा चल=स्थिर रहो  मा चल=स्थिर रहो, चलायमान मत रहो।
 
 
🌷 रक्षाबंधन 🌷
सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम् ।
सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्।।
 
🙏🏻 इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है ।इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्षभर मनुष्य रक्षित हो जाता हैं। (भविष्य पुराण)
 
🌷 Shubh Muhurat for Raksha Bandhan 2024:
In this video, we present the specific shubh muhurat for Raksha Bandhan 2024. This muhurat is considered auspicious for performing the rituals, tying the sacred thread, and exchanging gifts. Following this muhurat can add an extra layer of positivity to this already special occasion.
 
🌷 Importance of Muhurat:
Choosing the right muhurat is an age-old tradition in Hindu culture. It is believed that certain timings hold specific energies, and by aligning our actions with these timings, we can enhance the positive outcomes of our endeavors.
 

🌷 रक्षाबंधन की संस्कृत में शुभकामनाएं

 
मम भ्राता!
प्रार्थयामहे भव शतायु: ईश्वर सदा त्वाम् च रक्षतु।
पुण्य कर्मणा कीर्तिमार्जय जीवनम् तव भवतु सार्थकम् ।।
अर्थ
मेरे भैया!
प्रार्थना है की आप सौ साल जीयें, ईश्वर सदा आपकी रक्षा करें,
पुण्य कर्मों से कीर्ति अर्जित करें और इस तरह आपका जीवन सार्थक हो।
 
रक्षाबन्धनस्य हार्दिक्य: शुभकामना:।
अर्थ
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
 
रक्षाबन्धनस्य कोटिश: शुभकामना:।
अर्थ
रक्षाबंधन की कोटि कोटि शुभकामनाएँ।
 
रक्षाबन्धनस्य अनेकश: शुभकामना:।
अर्थ
रक्षाबंधन की अनेक शुभकामनाएँ।
 
भ्राता! त्वं जीव शतं वर्धमान:।
अर्थ
भाई! तुम सौ साल जिओ।
 
भगिनी! त्वं शतं जीव शरदः वर्धमाना।
अर्थ
बहन! तुम सौ साल जिओ।
 
प्रिय भ्राता;
पश्येम शरद: शतं जीवेम शरद: शतं श्रुणुयाम शरद: शतं
प्रब्रवाम शरद: शतमदीना: स्याम शरद: शतं भूयश्च शरद: शतात् ।
रक्षाबन्धनस्य हार्दिक्य: शुभकामना:।
अर्थ
मेरे भैया,
सौ वर्षों तक आँखों का प्रकाश स्पष्ट बना रहे।
आप सौ साल तक जीते रहें; सौ साल तक आपकी बुद्धि समर्थ रहे,
आप ज्ञानी बने रहे; आप सौ साल तक बढ़ते रहें, और बढ़ते रहें;
आपको पोषण मिलता रहे; आप सौ साल तक जीते रहें
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
  
  
रक्षाबंधन का पर्व सनातन भारतवर्ष में मनाये जाने वाले पवित्र तथा प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। रक्षाबंधन का पर्व भाई व बहन के अतुल्य स्नेह के प्रतीक के स्वरूप में भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता हैं, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं साथ ही अपने भाई की दिर्ध आयु के लिए प्रार्थना करती हैं तथा भाई अपनी बहनकी रक्षा करने का वचन देता हैं। हिंदुओ में रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ, धूमधाम से मनाया जाता हैं। साथ ही सिख, जैन, तथा लगभग सभी भारतीय समुदायों में यह पर्व बिना किसी रुकावट के तथा प्रेम-भाव के साथ मनाया जाता हैं। रक्षाबंधन के पर्व में रक्षा सूत्र अर्थात राखीका सबसे अधिक विशेष महत्व होता हैं। माना जाता हैं की राखीबहन का अपने भाई के प्रति स्नेह व आदर का प्रतीक होती हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं जो की अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता हैं। रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन के पश्चात भगवान् श्री कृष्ण का जन्मदिन अर्थात श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता हैं।
रक्षाबंधन के शुभ दिवस पर प्रत्येक जातक को चाहिए की वह रक्षा सूत्र को भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष अर्पित कर 108 या उस से भी अधिक बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या शिव के पंचाक्षरी तथा अत्यंत प्रभावशाली मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें तथा उसके पश्चात ही रक्षा सूत्र को अपने भाईयों की कलाई पर बांधे। ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं। क्योंकि श्रावण का पवित्र मास सम्पूर्ण प्रकार से भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता हैं।
 

रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त 2024

इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त, सोमवार प्रातः 03 बजकर 04 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 19 अगस्त, सोमवार की ही मध्य-रात्रि 11 बजकर 55 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।
 
अतः इस वर्ष 2024 में रक्षा-बंधन का पर्व 19 अगस्त, सोमवार के शुभ दिवस मनाया जाएगा। 
 
इस वर्ष, रक्षाबंधन के त्योहार पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त 19 अगस्त, सोमवार की दोपहर 01 बजकर 32 मिनिट से रात्रि 09 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा।
 
यह भी ध्यान रहे की,
१.  हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्यों हेतु भद्रा का त्याग किया जाना चाहिये। अतः भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना गया हैं।
२.  रक्षा बन्धन के दिन अर्थात 19 अगस्त, सोमवार के दिन भद्रा, दोपहर 01 बजकर 31 मिनिट पर तक व्याप्त रहेगी, यह समय राखी बांधने के लिए उपयुक्त नहीं है।
३.  वैदिक मतानुसार अपराह्न का समय राखी बांधने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त माना गया हैं, जो कि हिन्दु समय गणना के अनुसार दोपहर के पश्चात का समय होता हैं, अपराह्न का शुभ मुहूर्त 13:47 से 16:22 तक रहेगा।
४.  यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि के कारण उपयुक्त नहीं हैं तो, प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना गया हैं, प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त 18:56 से 21:10।
 
 
रक्षा बन्धन भद्रा अन्त समय - दोपहर 01 बजकर 31 मिनिट
रक्षा बन्धन भद्रा पूँछ - 09:51 से 10:53
रक्षा बन्धन भद्रा मुख - 10:53 से 12:37

21 August 2021

रक्षा बंधन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है 2021 Raksha Bandhan Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat kab hai

 रक्षा बंधन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है 2021 Raksha Bandhan Rakhi Bandhne ka Shubh Muhurat kab hai

raksha bandhan ka shubh muhurat kab hai 2021
Raksha Bandhan


प्रदोष काल का मुहूर्त

भद्रा पूँछ

भद्रा मुख

भद्रा अन्त समय

 

रक्षाबन्धन मन्त्रः (Raksha Bandhan Mantra)

येन बद्धो वली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।

तेन त्वा रक्षबध्नामी रक्षे माचल माचल ॥

Yen Baddho bali raja danvendro mahabal,

ten twam RakshBadhnami rakshe machalmachal.

The meaning of Raksha Mantra - "I tie you with the same Raksha thread which tied the most powerful, the king of courage, the king of demons, Bali. O Raksha (Raksha Sutra), please don't move and keep fixed throughout the year."

 

🌷 रक्षाबंधन 🌷

सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम् ।

सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्।।

 

🙏🏻 इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है ।इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्षभर मनुष्य रक्षित हो जाता हैं। (भविष्य पुराण)

 

रक्षाबंधन का पर्व सनातन भारतवर्ष में मनाये जाने वाले पवित्र तथा प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। रक्षाबंधन का पर्व भाई व बहन के अतुल्य स्नेह के प्रतीक के स्वरूप में भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता हैं, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं साथ ही अपने भाई की दिर्ध आयु के लिए प्रार्थना करती हैं तथा भाई अपनी बहनकी रक्षा करने का वचन देता हैं। हिंदुओ में रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ, धूमधाम से मनाया जाता हैं। साथ ही सिख, जैन, तथा लगभग सभी भारतीय समुदायों में यह पर्व बिना किसी रुकावट के तथा प्रेम-भाव के साथ मनाया जाता हैं। रक्षाबंधन के पर्व में रक्षा सूत्र अर्थात राखीका सबसे अधिक विशेष महत्व होता हैं। माना जाता हैं की राखीबहन का अपने भाई के प्रति स्नेह व आदर का प्रतीक होती हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं जो की अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता हैं। रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन के पश्चात भगवान् श्री कृष्ण का जन्मदिन अर्थात श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता हैं।

रक्षाबंधन के शुभ दिवस पर प्रत्येक जातक को चाहिए की वह रक्षा सूत्र को भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष अर्पित कर 108 या उस से भी अधिक बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या शिव के पंचाक्षरी तथा अत्यंत प्रभावशाली मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें तथा उसके पश्चात ही रक्षा सूत्र को अपने भाईयों की कलाई पर बांधे। ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं। क्योंकि श्रावण का पवित्र मास सम्पूर्ण प्रकार से भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता हैं।

 

रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त 2021

इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त, शनिवार की साँय 07 बजकर 01 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 22 अगस्त, रविवार की साँय 05 बजकर 31 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

 

अतः इस वर्ष 2021 में रक्षा-बंधन का पर्व 22 अगस्त, रविवार के शुभ दिवस मनाया जाएगा। 

 

इस वर्ष, रक्षाबंधन के त्योहार पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त 22 अगस्त, रविवार की दोपहर 01 बजकर 47 से साँय 04 बजकर 18 मिनिट तक का रहेगा।

 

यह भी ध्यान रहे की,

१.  रक्षा बन्धन के दिन भद्रा प्रातः 06 बजकर 16 मिनिट पर समाप्त हो जाने के कारण राखी बांधने का शुभ मुहूर्त प्रातः 06 बजकर 16 मिनिट से साँय 05 बजकर 31 मिनिट तक, अर्थात पूर्णिमा तिथि के समाप्ति तक का रहेगा।

२.  वैदिक मतानुसार अपराह्न का समय राखी बांधने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त माना गया हैं, जो कि हिन्दु समय गणना के अनुसार दोपहर के पश्चात का समय होता हैं।

३.  यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि के कारण उपयुक्त नहीं हैं तो, प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना गया हैं।

४.  हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्यों हेतु भद्रा का त्याग किया जाना चाहिये। अतः भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना गया हैं।

14 August 2019

रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त 2019 । राखी बांधने का शुभ मुहूर्त । Raksha Bandhan 2019 Shubh Muhurat | रक्षा बंधन 2019

रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त 2019 । राखी बांधने का शुभ मुहूर्त । Raksha Bandhan 2019 Shubh Muhurat | रक्षा बंधन 2019

raksha bandhan shubh muhurat 2019
raksha bandhan muhurat in 2019

रक्षाबन्धन मन्त्रः (Raksha Bandhan Mantra)

येन बद्धो वली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वा रक्षबध्नामी रक्षे माचल माचल ॥
Yen Baddho bali raja danvendro mahabal,
ten twam RakshBadhnami rakshe machalmachal.
The meaning of Raksha Mantra - "I tie you with the same Raksha thread which tied the most powerful, the king of courage, the king of demons, Bali. O Raksha (Raksha Sutra), please don't move and keep fixed throughout the year."


रक्षाबंधन का पर्व सनातन भारतवर्ष में मनाये जाने वाले पवित्र तथा प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। रक्षाबंधन का पर्व भाई व बहन के अतुल्य स्नेह के प्रतीक के स्वरूप में भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता हैं, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं साथ ही अपने भाई की दिर्ध आयु के लिए प्रार्थना करती हैं तथा भाई अपनी बहनकी रक्षा करने का वचन देता हैं। हिंदुओ में रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ, धूमधाम से मनाया जाता हैं। साथ ही सिख, जैन, तथा लगभग सभी भारतीय समुदायों में यह पर्व बिना किसी रुकावट के तथा प्रेम-भाव के साथ मनाया जाता हैं। रक्षाबंधन के पर्व में रक्षा सूत्र अर्थात राखीका सबसे अधिक विशेष महत्व होता हैं। माना जाता हैं की राखीबहन का अपने भाई के प्रति स्नेह व आदर का प्रतीक होती हैं। रक्षाबंधन का त्योहार सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं जो की अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता हैं। रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन के पश्चात भगवान् श्री कृष्ण का जन्मदिन अर्थात श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता हैं।
rakshabandhan
raksha-bandhan
रक्षाबंधन के शुभ दिवस पर प्रत्येक जातक को चाहिए की वह रक्षा सूत्र को भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष अर्पित कर 108 या उस से भी अधिक बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या शिव के पंचाक्षरी तथा अत्यंत प्रभावशाली मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें तथा उसके पश्चात ही रक्षा सूत्र को अपने भाईयों की कलाई पर बांधे। ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं। क्योंकि श्रावण का पवित्र मास सम्पूर्ण प्रकार से भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता हैं।

इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 14 अगस्त, बुधवार की दोपहर 03 बजकर 45 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 15 अगस्त, गुरुवार की साँय 05 बजकर 58 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2019 में रक्षा-बंधन का पर्व 15 अगस्त, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। 

अतः इस वर्ष, रक्षाबंधन के त्योहार पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त 15 अगस्त, गुरुवार की दोपहर 01 बजकर 46 से साँय 04 बजकर 21 मिनिट तक का रहेगा।

यह भी ध्यान रहे की,
१.     रक्षा बन्धन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो जाने के कारण राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 06 बजकर 09 से साँय 05 बजकर 58 मिनिट तक, अर्थात पूर्णिमा तिथि के समाप्ति तक का रहेगा।
२.     वैदिक मतानुसार अपराह्न का समय राखी बांधने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त माना गया हैं, जो कि हिन्दु समय गणना के अनुसार दोपहर के पश्चात का समय होता हैं।
३.     यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि के कारण उपयुक्त नहीं हैं तो, प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना गया हैं।
४.     हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्यों हेतु भद्रा का त्याग किया जाना चाहिये। अतः भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना गया हैं।

25 August 2018

बहन को अवश्य दें यह 3 उपहार, कार्य में प्राप्त होगी सफलता, होंगे लाभ | Raksha Bandhan Gifts For Sister

बहन को अवश्य दें यह 3 उपहार, कार्य में प्राप्त होगी सफलता, होंगे लाभ | Raksha Bandhan Gifts For Sister

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रक्षाबंधन का पर्व सनातन भारतवर्ष में मनाये जाने वाले पवित्र तथा प्रमुख त्योहारों में से एक है। रक्षाबंधन का पर्व भाई व बहन के अतुल्य स्नेह के प्रतीक के स्वरूप में भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमे बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है साथ ही अपने भाई की दिर्ध आयु के लिए प्रार्थना करती हैं, वही भाई अपनी बहनकी रक्षा करने का वचन देता है तथा अपनी बहन को प्यार के साथ-साथ कई प्रकार के विभिन्न उपहार भी देता है। भाई तथा बहन के लिए रक्षाबंधन एक महापर्व की जैसा ही माना गया है। हिंदुओ में रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ, धूमधाम से मनाया जाता है। साथ ही सिख, जैन, तथा लगभग सभी भारतीय समुदायों में यह पर्व बिना किसी रुकावट के तथा प्रेम-भाव के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन के पर्व में रक्षा सूत्र अर्थात राखीका सबसे अधिक विशेष महत्व होता है। माना जाता है की राखीबहन का अपने भाई के प्रति स्नेह व आदर का प्रतीक होती है। रक्षाबंधन का त्योहार सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जो की अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर के महीने में आता है। रक्षा बंधन के ठीक आठ दिन के पश्चात भगवान् श्री कृष्ण का जन्मदिन अर्थात श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
        दोस्तो आज हम आपको बताएँगे वैदिक ग्रंथो में बताए गए ऐसे तीन ऐसे तीन उपहारो के बारे में , जो घर की महिलाओं को देने से घर में शांति तथा उन्नति बनी रहती है। तथा आपको लाभ प्राप्त होता है एवं सभी कार्यो में सफलता निश्चित प्राप्त होती है।

सर्वप्रथम हम आपको एक श्लोक तथा उसका भावार्थ बताते है-

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, 
रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते, 
सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।
(मनुस्मृति अध्याय ३, श्लोक ५६) (अथर्ववेद)

- जहाँ स्त्रीजाति का आदर-सम्मान होता है, उनकी आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं की निरंतर पूर्ति होती है, नारियों कि पूजा होती है, अर्थात सत्कार होता हैं, उस स्थान, समाज, कुल या परिवार पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं तथा दिव्यगुण, दिव्य-भोग एवं उत्तम-संतान उत्पन्न होते हैं।
       वही जहां ऐसा नहीं होता, स्त्रियों कि पूजा नहीं होती तथा उनके प्रति तिरस्कारमय व्यवहार किया जाता है, वहाँ देवकृपा नहीं रहती है तथा वहाँ संपन्न किये गये सभी कार्य असफल होते हैं तथा सभी क्रियाए निष्फल रहती हैं।

अब हम आपको बताएँगे बहन को अवश्य दें यह 3 उपहार, जिससे आपको लाभ प्राप्त होगा तथा प्रत्येक काम में सफलता प्राप्त होगी।

1- वस्त्र
वस्त्र अर्थात कपड़े। सजना-सवरना, श्रृंगार करना यह सब महिलाओं को अत्यंत प्रिय होता है। जिस घर के पुरुष अपनी माता, बहन या पत्नी को अच्छे वस्त्र प्रदान करते हैं, उस घर पर भगवान सदैव प्रसन्न रहते हैं। ऐसे घर में सदैव सुख-शांति बनी रहती है तथा समस्त कार्यो में सफलता निश्चित ही प्राप्त होती है। स्त्री को घर की लक्ष्मी माना जाता है, यदि महिलाएं गंदे या मैले वस्त्र पहन कर रहती हैं या घर के पुरुष अपनी माँ, बहन या पत्नी को समय-समय पर अच्छे वस्त्र प्रदान नहीं करते तो ऐसे घर पर लक्ष्मीमाता की कृपा क्षीण हो जाती है।

2- आभूषण
आभूषण अर्थात गहने। गहने महिलाओं की अत्यंत प्रिय वस्तुओं में से एक है। जैसा की हमने वैदिक श्लोक के माध्यम से बताया की जिस घर की महिलाएं प्रसन्न रहती हैं, वहाँ देवताओं का निवास माना जाता है। अतः प्रत्येक मनुष्य को अपने घर की महिलाओं को सुंदर गहने उपहार के स्वरूप में देने चाहिए। जिस घर की महिलाएं अच्छे कपड़े तथा गहनों से श्रृंगार करती है, वहाँ कभी भी दरिद्रता वास नहीं करती। ऐसे घर में सदैव खुशहाली तथा मां लक्ष्मीजी की कृपा-दृष्टि बनी रहती है।

3- मधुर वचन
हमारी संस्कृति में महिलाओं को सदैव पूजनीय माना गया है। कई ग्रंथों तथा पुराणों में महिलाओं का सम्मान करने की बात भी कही गई है। कहा गया है की, जिस घर में महिलाओं से बुरी तरह से बात की जाती है या उनका सम्मान नहीं किया जाता, ऐसे घर में भगवान कभी निवास नहीं करते है। स्त्रियों का सम्मान न करने वाले व्यक्ति को निरंतर किसी न किसी परेशानी, रोग या दुख का सामना करते रहना पड़ता है। अतः मनुष्य को सदैव महिलाओं का सम्मान करना चाहिए तथा अपने घर की स्त्रियों के साथ प्रत्येक समय प्रेम व आदर से ही व्यवहार करना चाहिए तथा भाषा में मीठी वाणी का प्रयोग करना उचित माना गया है।