02 August 2026

श्रावण सोमवार व्रत 2026: महिमा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम एवं वैज्ञानिक महत्व

श्रावण सोमवार व्रत 2026: महिमा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम एवं वैज्ञानिक महत्व 

श्रावण सोमवार व्रत 2026: महिमा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम एवं वैज्ञानिक महत्व
श्रावण सोमवार व्रत




श्रावण सोमवार व्रत 2026

श्रावण सोमवार व्रत 2026: महिमा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत नियम एवं वैज्ञानिक महत्व

श्रावण सोमवार व्रत 2026: भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर

"श्रद्धा जहाँ होती है, वहीं शिव का निवास होता है।"

सनातन धर्म में बारह महीनों का अपना-अपना धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है, किंतु श्रावण मास को भगवान शिव की उपासना का सर्वश्रेष्ठ काल माना गया है। यह महीना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप, सेवा और ईश्वर के प्रति समर्पण का दिव्य पर्व है।

पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष का पान भगवान शिव ने सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए किया था। देवताओं ने उनके शरीर की तपन शांत करने हेतु निरंतर जलाभिषेक किया। तभी से श्रावण मास में भगवान शिव पर जल अर्पित करने की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज भी करोड़ों शिवभक्त श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार करते हैं। इस अवधि में किया गया जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जप, 'ॐ नमः शिवाय' का स्मरण तथा सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना गया है।

श्रावण मास का आध्यात्मिक महत्व

श्रावण मास का उल्लेख शिवपुराण, स्कन्दपुराण, पद्मपुराण सहित अनेक ग्रंथों में मिलता है। इस मास में साधक केवल बाहरी पूजा ही नहीं करता, बल्कि अपने मन, वचन और कर्म को भी पवित्र बनाने का प्रयास करता है।

इस मास में किए जाने वाले प्रमुख आध्यात्मिक कार्य—

भगवान शिव का दैनिक जलाभिषेक।

पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जप।

महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान।

रुद्राध्याय का पाठ।

सोमवार व्रत।

दान, सेवा एवं गौ-सेवा।

सात्त्विक भोजन एवं संयमित जीवन।

श्रावण का वास्तविक संदेश यही है कि मनुष्य अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग कर करुणा, क्षमा, सत्य और सेवा का मार्ग अपनाए।

श्रावण सोमवार का महत्व

सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। 'सोम' का अर्थ चंद्रमा भी है और भगवान शिव अपने मस्तक पर चंद्रदेव को धारण करते हैं। यही कारण है कि सोमवार के दिन शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

श्रावण मास के सोमवार को किया गया व्रत—

मनोकामना पूर्ति का माध्यम माना जाता है।

दाम्पत्य जीवन में मधुरता लाने वाला माना जाता है।

मानसिक शांति एवं आत्मबल प्रदान करने वाला माना जाता है।

आध्यात्मिक उन्नति में सहायक माना जाता है।

जीवन में सकारात्मकता एवं संयम विकसित करने की प्रेरणा देता है।

अनेक श्रद्धालु पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु केवल प्रथम या अंतिम सोमवार का व्रत करते हैं। दोनों ही प्रकार की उपासना श्रद्धा के अनुसार स्वीकार्य मानी जाती है।

श्रावण सोमवार व्रत का संकल्प

व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है। 'व्रत' का वास्तविक अर्थ है—श्रेष्ठ आचरण का संकल्प।

इस दिन श्रद्धालु निम्न संकल्प लेते हैं—

असत्य का त्याग।

क्रोध पर नियंत्रण।

सात्त्विक भोजन।

नशामुक्त जीवन।

सेवा एवं दान।

ईश्वर का निरंतर स्मरण।

यदि इन नियमों का पालन किया जाए तो व्रत का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

श्रावण सोमवार की पूजा में निम्न सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है—

अभिषेक सामग्री

गंगाजल

स्वच्छ जल

कच्चा गौ-दूध

दही

घृत (घी)

शहद

शक्कर (पंचामृत हेतु)

पूजन सामग्री

बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला)

धतूरा

सफेद पुष्प

चंदन

अक्षत

धूप

दीपक

रुद्राक्ष माला

मौसमी फल

नैवेद्य

कपूर

ध्यान दें: भगवान शिव को तुलसी पत्र अर्पित नहीं किया जाता।

श्रावण सोमवार की सम्पूर्ण पूजा विधि

1. ब्रह्म मुहूर्त में जागरण

प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान करके स्वच्छ एवं हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।

2. पूजा स्थान की शुद्धि

घर के मंदिर या शिवालय की सफाई करें। दीप प्रज्वलित करें और भगवान गणेश का स्मरण करें।

3. व्रत का संकल्प

दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें तथा श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।

4. जलाभिषेक एवं पंचामृत अभिषेक

सबसे पहले स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें और पुनः गंगाजल या स्वच्छ जल अर्पित करें।

5. बेलपत्र अर्पित करें

बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखते हुए श्रद्धा से अर्पित करें। प्रत्येक अर्पण के साथ "ॐ नमः शिवाय" का जप करें।

6. मंत्र जप

कम से कम 108 बार पंचाक्षरी मंत्र—

ॐ नमः शिवाय

का जप करें। यदि संभव हो तो महामृत्युंजय मंत्र का भी जप करें।

7. आरती एवं प्रार्थना

धूप, दीप एवं कपूर से भगवान शिव की आरती करें। अंत में समस्त परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण की प्रार्थना करें।

श्रावण सोमवार पर कौन-से कार्य विशेष शुभ माने जाते हैं?

शिव मंदिर में जल अर्पित करना।

रुद्राभिषेक कराना।

गरीबों को अन्न एवं वस्त्र दान देना।

गौ-सेवा करना।

पक्षियों के लिए जल रखना।

पौधारोपण करना।

रुद्राक्ष धारण करना (योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में)।

शिवपुराण या शिव चालीसा का पाठ करना।

आज का प्रेरक संदेश

भगवान शिव केवल महंगे चढ़ावे से नहीं, बल्कि सच्चे मन, निष्कपट भक्ति और करुणा से प्रसन्न होते हैं। यदि श्रद्धा शुद्ध है, तो एक लोटा जल भी करोड़ों स्वर्णाभूषणों के समान मूल्यवान माना गया है।

हर हर महादेव! 🔱

रुद्राभिषेक का महत्व, व्रत के नियम, वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व

यह भाग पिछले लेख का क्रम है। यदि आपने पहला भाग नहीं पढ़ा है, तो पहले उसे पढ़ें। इस भाग में हम जानेंगे कि रुद्राभिषेक क्यों किया जाता है, श्रावण सोमवार के व्रत के नियम क्या हैं तथा उपवास का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है।

रुद्राभिषेक का शास्त्रीय महत्व

सनातन धर्म में रुद्राभिषेक को भगवान शिव की आराधना का अत्यंत प्रभावशाली अनुष्ठान माना गया है। यजुर्वेद के श्रीरुद्रम तथा शिवपुराण में भगवान रुद्र की उपासना का विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रद्धा, शुद्ध आचरण और वैदिक मंत्रों के साथ किया गया रुद्राभिषेक आध्यात्मिक शांति और आत्मबल प्रदान करने वाला माना गया है।

धार्मिक मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से—

मन की चंचलता कम होती है।

सकारात्मक विचारों का विकास होता है।

शिव कृपा प्राप्त करने की भावना प्रबल होती है।

परिवार में सौहार्द और शांति का वातावरण बनता है।

साधक का मन ईश्वर के प्रति अधिक एकाग्र होता है।

रुद्राभिषेक केवल इच्छापूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का एक आध्यात्मिक साधन है।

भगवान शिव को क्या अर्पित करें और उसका प्रतीकात्मक अर्थ

1. जल

जल शीतलता, पवित्रता और जीवन का प्रतीक है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना अपने भीतर के अहंकार और विकारों को शांत करने का प्रतीक माना जाता है।

2. गंगाजल

गंगा को पवित्रता और मोक्ष की प्रतीक माना गया है। गंगाजल से अभिषेक श्रद्धा और आंतरिक शुद्धि का भाव प्रकट करता है।

3. बेलपत्र

बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसकी तीन पत्तियाँ सत्त्व, रज और तम गुणों अथवा ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं।

4. पंचामृत

दूध, दही, घृत, शहद और शक्कर से बना पंचामृत समृद्धि, मधुरता, स्वास्थ्य और पवित्रता का प्रतीक है।

5. धतूरा और आक

शिव को धतूरा और आक अर्पित करने की परंपरा प्राचीन है। यह संदेश देती है कि भगवान शिव सभी को समान भाव से स्वीकार करते हैं।

श्रावण सोमवार व्रत के प्रमुख नियम

व्रत का उद्देश्य केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म को अनुशासित करना है।

ब्रह्म मुहूर्त में जागरण

प्रातःकाल शीघ्र उठकर स्नान करें तथा दिन की शुरुआत भगवान शिव के स्मरण से करें।

सात्त्विक भोजन

यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो फलाहार या सात्त्विक भोजन ग्रहण करें। तामसिक भोजन, नशा और हिंसात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहें।

सत्य एवं संयम

व्रत के दिन असत्य भाषण, क्रोध, कटु वचन और अनावश्यक विवाद से बचें।

सेवा और दान

आवश्यकतानुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। गौ-सेवा, पक्षियों के लिए जल रखना और वृक्षारोपण जैसे कार्य भी पुण्यकारी माने जाते हैं।

मंत्र जप

कम से कम 108 बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें। यदि समय हो तो महामृत्युंजय मंत्र का भी जप करें।

महामृत्युंजय मंत्र का महत्व

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

यह मंत्र भगवान शिव के त्र्यम्बक स्वरूप की उपासना का वैदिक मंत्र है। इसकी परंपरागत मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक जप करने से साधक के भीतर धैर्य, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है।

उपवास का वैज्ञानिक महत्व

आयुर्वेद में कहा गया है—

"लङ्घनम् सर्वोत्तम औषधम्।"

अर्थात उचित परिस्थितियों में संयमित उपवास शरीर के लिए लाभकारी माना गया है।

आधुनिक शोधों में भी समय-समय पर यह पाया गया है कि संतुलित और चिकित्सकीय दृष्टि से उपयुक्त उपवास कुछ लोगों में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। हालांकि यह सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू नहीं होता।

1. पाचन तंत्र को विश्राम

नियमित भोजन के बीच उचित अंतराल मिलने से पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है, जिससे शरीर अपनी अन्य जैविक प्रक्रियाओं पर बेहतर ध्यान दे सकता है।

2. आत्मानुशासन का विकास

उपवास केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन का भी अभ्यास है। इससे इच्छाओं पर नियंत्रण और धैर्य विकसित होता है।

3. मानसिक एकाग्रता

पूजा, ध्यान और मंत्रजप के साथ बिताया गया समय मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

4. संतुलित जीवनशैली

श्रावण मास सात्त्विक भोजन, नियमित दिनचर्या, समय पर जागरण और संयमित जीवन अपनाने की प्रेरणा देता है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

महत्वपूर्ण: यदि आप मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था, दीर्घकालिक रोग या किसी विशेष चिकित्सकीय स्थिति से गुजर रहे हैं, तो उपवास रखने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

श्रावण सोमवार का आध्यात्मिक विज्ञान

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव वैराग्य, करुणा और समत्व के प्रतीक हैं। श्रावण सोमवार का व्रत व्यक्ति को बाहरी आडंबर से अधिक आंतरिक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।

इस दिन साधक का प्रयास होना चाहिए कि वह—

क्रोध को क्षमा में बदले।

लोभ को संतोष में बदले।

अहंकार को विनम्रता में बदले।

ईर्ष्या को सद्भाव में बदले।

असत्य को सत्य में बदले।

यही वास्तविक शिव साधना है।

श्रावण सोमवार पर अवश्य करें

शिवलिंग का जलाभिषेक।

"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप।

शिव चालीसा या शिवपुराण का पाठ।

माता-पिता एवं गुरु का सम्मान।

गौ-सेवा और अन्नदान।

पर्यावरण संरक्षण हेतु एक पौधा लगाएँ।

किसी जरूरतमंद की निःस्वार्थ सहायता करें।

इन बातों से बचें

क्रोध और कटु वचन।

नशा एवं तामसिक भोजन।

असत्य और छल।

अनावश्यक विवाद।

किसी का अपमान।

प्रकृति या पशु-पक्षियों को कष्ट पहुँचाना।

प्रेरणादायी संदेश

श्रावण सोमवार हमें यह सिखाता है कि भगवान शिव की कृपा केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि सदाचार, सेवा, करुणा और सच्चे आचरण से प्राप्त होती है। जब मन निर्मल होता है, तब साधना का प्रत्येक क्षण ईश्वर से निकटता का अनुभव कराता है।

हर हर महादेव! 🔱

श्रावण मास के प्रमुख पर्व, व्रत उद्यापन विधि, दान का महत्व, शास्त्रीय सावधानियाँ एवं ज्योतिषीय दृष्टिकोण

यह लेख पिछले दो भागों का क्रम है। पहले भाग में हमने श्रावण मास का महत्व, पूजा विधि और व्रत का परिचय जाना था। दूसरे भाग में रुद्राभिषेक, व्रत के नियम तथा वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत वर्णन किया गया। इस भाग में हम श्रावण मास के प्रमुख पर्व, व्रत के उद्यापन, दान की महिमा तथा शास्त्रों में वर्णित आवश्यक सावधानियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

श्रावण मास: भक्ति और उत्सवों का पावन संगम

श्रावण मास केवल सोमवार व्रत तक सीमित नहीं है। यह संपूर्ण मास अनेक धार्मिक पर्वों, व्रतों और आध्यात्मिक अनुष्ठानों से परिपूर्ण रहता है। इस अवधि में भगवान शिव, माँ पार्वती, नागदेवता तथा अन्य देवताओं की आराधना का विशेष विधान है।

विभिन्न क्षेत्रों की परंपराओं तथा पंचांगों के अनुसार तिथियों में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग का अनुसरण करना सदैव उचित माना जाता है।

श्रावण मास के प्रमुख पर्व

1. मंगला गौरी व्रत

श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को विवाहित महिलाएँ माँ गौरी की पूजा करती हैं। यह व्रत अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि तथा दाम्पत्य जीवन की मंगलकामना के लिए रखा जाता है।

2. नाग पंचमी

नाग पंचमी के दिन नागदेवता की पूजा की जाती है। शास्त्रों में नागों को प्रकृति के संरक्षक तथा भगवान शिव के आभूषण के रूप में वर्णित किया गया है। इस दिन जीव-जंतुओं के प्रति दया, संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का संदेश भी मिलता है।

3. हरियाली तीज

श्रावण मास की हरियाली तीज माँ पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन की स्मृति में मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

4. श्रावण पूर्णिमा

श्रावण पूर्णिमा के दिन अनेक स्थानों पर रक्षा बंधन, उपाकर्म तथा यज्ञोपवीत परिवर्तन जैसे धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न किए जाते हैं। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा तथा पारिवारिक संबंधों के सम्मान का भी प्रतीक है।

व्रत उद्यापन का महत्व

सनातन परंपरा में किसी भी संकल्प या व्रत की पूर्णता उद्यापन द्वारा मानी जाती है। यदि किसी श्रद्धालु ने पूरे श्रावण मास अथवा निश्चित संख्या में सोमवार व्रत का संकल्प लिया हो, तो अंतिम व्रत के पश्चात उद्यापन करना शुभ माना जाता है।

उद्यापन का उद्देश्य केवल व्रत समाप्त करना नहीं, बल्कि भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।

उद्यापन की संपूर्ण विधि

1. पूजा स्थान की तैयारी

पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान शिव, माता पार्वती, श्रीगणेश, कार्तिकेय तथा नंदी का चित्र या विग्रह स्थापित करें।

2. गणेश पूजन

हर शुभ कार्य की तरह उद्यापन का प्रारंभ भगवान श्रीगणेश की पूजा से करें।

3. रुद्राभिषेक

गंगाजल, पंचामृत एवं स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। यदि संभव हो तो वैदिक आचार्य के मार्गदर्शन में रुद्राभिषेक कराया जा सकता है।

4. मंत्र जप

ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र

शिव पंचाक्षरी स्तोत्र

शिव चालीसा

इनमें से अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार जप एवं पाठ करें।

5. हवन

यदि संभव हो तो वैदिक विधि से लघु हवन करें। हवन में शुद्ध सामग्री का प्रयोग करें और वातावरण की पवित्रता का ध्यान रखें।

6. दान-दक्षिणा

शास्त्रों में दान को व्रत की पूर्णता का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार—

अन्न

वस्त्र

फल

दक्षिणा

धार्मिक पुस्तकें

गौ-सेवा

विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री

का दान किया जा सकता है।

दान सदैव निष्काम भाव से करना चाहिए।

श्रावण सोमवार पर दान का महत्व

धार्मिक परंपराओं में दान को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना गया है।

श्रावण मास में विशेष रूप से—

भूखे व्यक्ति को भोजन कराना।

प्यासे को जल पिलाना।

गौशाला में सहयोग करना।

निर्धन विद्यार्थियों की सहायता करना।

पौधारोपण करना।

पक्षियों के लिए जल-पात्र रखना।

जैसे कार्य अत्यंत पुण्यकारी माने गए हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से श्रावण सोमवार

वैदिक ज्योतिष में भगवान शिव को नवग्रहों के अधिष्ठाता देव के रूप में सम्मान दिया गया है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना से साधक के भीतर धैर्य, आत्मबल और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

अनेक श्रद्धालु ग्रह शांति, मानसिक संतुलन एवं आध्यात्मिक उन्नति की भावना से श्रावण सोमवार को विशेष पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जप तथा रुद्राभिषेक कराते हैं।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ज्योतिष आध्यात्मिक मार्गदर्शन का विषय है; जीवन के व्यावहारिक निर्णय विवेक, परिश्रम और उचित सलाह के साथ ही लेने चाहिए।

श्रावण सोमवार में इन बातों का रखें विशेष ध्यान

अवश्य करें

प्रतिदिन भगवान शिव का स्मरण।

सात्त्विक भोजन।

माता-पिता एवं गुरु का सम्मान।

गौ एवं अन्य जीवों के प्रति दया।

स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण।

संयमित दिनचर्या।

इन कार्यों से बचें

असत्य बोलना।

क्रोध एवं अपशब्द।

नशा।

हिंसा।

भोजन की बर्बादी।

किसी का अपमान।

श्रावण मास और पर्यावरण

भगवान शिव का स्वरूप प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके साथ गंगा, कैलाश, नंदी, सर्प, चंद्रमा, बेल वृक्ष और अनेक प्राकृतिक प्रतीकों का संबंध बताया गया है।

इसलिए श्रावण मास हमें पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

इस अवसर पर आप—

एक पौधा लगाएँ।

जल संरक्षण करें।

प्लास्टिक का कम उपयोग करें।

पक्षियों के लिए जल रखें।

वृक्षों की रक्षा का संकल्प लें।

यही भगवान शिव की सच्ची सेवा भी है।

जीवन के लिए शिव का संदेश

भगवान शिव हमें सिखाते हैं—

शक्ति के साथ विनम्रता।

वैभव के साथ वैराग्य।

ज्ञान के साथ करुणा।

सफलता के साथ सेवा।

परिवार के साथ समाज का भी ध्यान।

जब मनुष्य इन गुणों को जीवन में अपनाता है, तभी वास्तविक शिवभक्ति का आरंभ होता है।

प्रेरक संदेश

श्रावण सोमवार का व्रत केवल इच्छापूर्ति का साधन नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन का अवसर है। यदि इस मास में हम अपने स्वभाव को थोड़ा भी श्रेष्ठ बना सकें, किसी दुखी व्यक्ति के जीवन में मुस्कान ला सकें, प्रकृति की रक्षा कर सकें और ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा रख सकें, तो यही भगवान शिव की सर्वोत्तम आराधना होगी।

"शिव का अर्थ है – कल्याण। अतः जो स्वयं के साथ-साथ समस्त सृष्टि के कल्याण का भाव रखे, वही वास्तविक शिवभक्त है।"

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।।। नारायण नारायण ।।। जय सोमनाथ महादेव ।।। हर हर महादेव ।।। 😇 भक्ति स्पेशल🌟 🌷🪔📿 🕉️ सनातन धर्म 🚩 🌺 श्री गणेश ।।

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लेखक

पं॰ विनोद पान्डे जी 🚩
https://www.vkjpandey.in/

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