20 March 2020

जनता कर्फ्यू क्या है? क्या जनताकर्फ्यू व्यावहारिक है?

जनता कर्फ्यू क्या है? क्या जनता कर्फ्यू व्यावहारिक है?

What is Janata Curfew? Is Janta Curfew practical?




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनोवायरस प्रकोप पर देश को संबोधित करते हुए रविवार (22 मार्च) को 'जनता (सार्वजनिक) कर्फ्यू' की घोषणा की है। भारत में 180 से अधिक प्रभावित कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास में, पीएम मोदी ने 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सभी नागरिकों से 'जनता कर्फ्यू' का पालन करने का अनुरोध किया।

1. पीएम मोदी ने रविवार (22 मार्च) को देश के सभी नागरिकों से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रुकने का आग्रह किया
2. रविवार को जनता कर्फ्यू सुबह 7 बजे शुरू होगा और रात 9 बजे तक जारी रहेगा।
3. पुलिस, चिकित्सा सेवा, मीडिया, होम डिलीवरी, अग्निशमन आदि जैसी आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले लोग जनता कर्फ्यू से मुक्त रहेंगे।
4. शाम 5 बजे, सभी नागरिकों से अनुरोध किया जाता है कि वे आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले लोगों को कोरोनोवायरस के समय में काम करने के लिए प्रोत्साहित करें, ताली बजाकर और घंटी बजाकर।
5. पीएम मोदी ने कहा, "यदि संभव हो, तो हर दिन कम से कम 10 लोगों को फोन करें और उन्हें 'जनता कर्फ्यू' के बारे में बताएं और साथ ही बचाव के उपाय भी बताएं


  • वह व्यक्ति जिसकी अपील पर पूरा देश धरने पर खड़ा था।
  • वह आदमी जिसके आदेश पर पूरे देश ने आधार कार्ड का समर्थन किया।
"वह व्यक्ति जिसके शासन में अयोध्या का फैसला बिना किसी दुर्व्यवहार के आया था"

  • यह शायद सबसे अच्छा समय है यह दिखाने के लिए कि वास्तविक खतरे के समय में नेता को सभी समर्थन करते हैं।
"सभी कुख्यात और कहने के लिए रहस्यमय निर्णय लोगों ने इस सरकार का समर्थन किया"
जबकि अब एक ज्ञात दुश्मन के खिलाफ हमें वास्तव में सरकार द्वारा इस तरह की पहल की सराहना करने और समर्थन करने की आवश्यकता है।
“शहर मे लोग तो है काम के भी पर
तन्हा जानते है सहारों की कीमत

साल तो आतें है आतें रहेंगे ही पर
सब जानते है इतवारों की कीमत “

मेरे द्वारा कुछ लाइनें !!
  • इसके अलावा राष्ट्र के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर यह बिना किसी उच्चारण के काफी आसानी से संभव लगता है।
धन्यवाद !!

17 March 2020

पापमोचनी एकादशी कब हैं 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Papmochani Ekadashi 2020


पापमोचनी एकादशी कब हैं 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Papmochani Ekadashi 2020 #EkadashiVrat


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वैदिक विधान कहता हैं की, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का भिन्न भिन्न महत्व होता हैं तथा प्रत्येक एकादशीयों की एक पौराणिक कथा भी होती हैं। एकादशियों को वास्तव में मोक्षदायिनी माना गया हैं। भगवान श्रीविष्णु जी को एकादशी तिथि अति प्रिय मानी गई हैं चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुकल पक्ष की। इसी कारण एकादशी के दिन व्रत करने वाले प्रत्येक भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा-दृष्टि सदा बनी रहती हैं, अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान श्रीविष्णु जी की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं, साथ ही रात्री जागरण भी करते हैं। किन्तु इन प्रत्येक एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी हैं जिस एकादशी का व्रत साधक को उसके प्रत्येक पापों से मुक्त कर, उसके लिये मोक्ष के मार्ग खोल देती हैं। अतः चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाने वाला व्रत पाप मोचनी एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता हैं। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णुजी के चतुर्भुज रूप का पूजन सम्पूर्ण विधि-विधान के अनुसार करने पर व्रत के शुभ फलों में अति वृद्धि होती हैं। पापमोचनी एकादशी के महात्म्य के श्रवण व पठन करने मात्र से समस्त पाप एवं संकट नष्ट हो जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पापों को नष्ट करने वाली तिथि मानी गई हैं। स्वयं भगवान श्रीकृष्णजी ने इसके फल एवं महत्व को कुंतीपुत्र के समक्ष प्रस्तुत किया था। पापमोचनी एकादशी का अर्थ पाप को नष्ट करने वाली एकादशी होता हैं। अतः पापमोचिनी एकादशी के प्रभाव से मनुष्य के प्रत्येक पाप नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी की कथा के श्रवण तथा पठन मात्र से एक हजार गौदान करने का फल प्राप्त होता हैं। इस पावन व्रत को निष्ठापूर्वक  करने से ब्रह्महत्या करने वाले, अगम्या गमन करने वाले, स्वर्ण चुराने वाले, मद्यपान करने वाले जैसे अनेक भयंकर पाप भी नष्ट किए जा सकते हैं तथा अन्त में स्वर्गलोक की प्राप्ति होती हैं।

पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ती करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण ना किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिवस सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता हैं।

ध्यान रहे,
१- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।
२- यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।
३- द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।
४- एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
५- व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।
६- व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
७- जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि होती हैं।
८- यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।


इस वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 19 मार्च, गुरुवार की प्रातः 04 बजकर 25 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 20 मार्च, शुक्रवार की प्रातः 05 बजकर 58 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2020 में पापमोचनी एकादशी का व्रत 19 मार्च, गुरुवार के दिन किया जाएगा।

इस वर्ष, पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 20 मार्च, शुक्रवार की दोपहर 01 बजकर 47 मिनिट से साँय 04 बजकर 09 मिनिट तक का रहेगा।
हरि वासर समाप्त होने का समय – 12:28

वैष्णव पापमोचिनी एकादशी - 20 मार्च 2020, शुक्रवार

वैष्णव एकादशी के लिए पारण - 06:33 से 07:55
वैष्णव हरि वासर समाप्त होने का समय – 07:55

14 March 2020

श्री राम नवमी कब है 2020 | रामनवमी 2020 में कब है | Ram Navami kab ki hai | 2020 RamNavami | शुभ मुहूर्त

श्री राम नवमी कब है 2020 | रामनवमी 2020 में कब है | Ram Navami kab ki hai | 2020 RamNavami | शुभ मुहूर्त #RamNavami

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रामनवमी का त्यौहार सम्पूर्ण भारतवर्ष में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाया जाता हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। भगवान श्री राम वैकुंठ धाम निवासी श्रीविष्णुजी के सातवें अवतार हैं। भगवान श्रीराम राजा दशरथ कुल के ज्येष्ठ पुत्र हैं। जिन्होंने सतयुग के समय पृथ्वी पर बुराई तथा अधर्म का नाश कर के धर्म तथा सत्य की स्थापना की थी। भगवान श्रीराम अपने कर्मो के आधार पर पुरुषों में उत्तम कहलाए गए हैं। अतः उन्हें मर्यादा-पुरुषोत्तम राम के नाम से भी जाना जाता हैं। चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता हैं। अतः इस पावन दिवस को रामनवमी के महापर्व के नाम से मनाया जाता हैं।
इस शास्त्रोक्त नियम हैं की, जब नवमी दो तिथियों में हो तथा प्रथम तिथि के मध्याह्न में नवमी हो, तो व्रत या त्योहार उसी दिवस किया जाना चाहिए। किन्तु यदि नवमी दोनों दिनों के मध्याह्न में पड़ रही हो, या जब किसी भी दिन मध्याह्न को नवमी न हो, तो दशमी से युक्त नवमी में व्रत करना चाहिए।

       
        श्रीराम का जन्म

        चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ ।
        उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ्चके ॥
        मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये ।
        आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान् ॥
                                        -निर्णयसिन्धु
निर्णयसिन्धु, पौराणिक ग्रंथ के अनुसार, भगवान श्रीरामजी, त्रेता युग में, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि तथा पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न तथा मध्याह्न-काल में अवतरित हुए थे। उनका अवतरण अयोध्या के राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या माता के पावन आँचल में हुआ था।

नवमी तिथि मधुमास पुनीता,
सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।
मध्य दिवस अति सीत न घामा,
पावन काल लोक बिश्रामा।।
सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।
जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम॥
।। जय श्री राम ।।
                                -रामचरितमानस
साथ ही रामचरितमानस की चोपाई के अनुसार कहा गया हैं की, “सुकल पच्छ अभिजित हरि प्रीता॥” अर्थात नवमी तिथि, पवित्र चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, भगवानजी के प्रिय अभिजित मुहूर्त में, मध्याह्न-काल में मर्यादा पुरुषोत्तम अति कृपालु, माता कौशल्या के हितकारी, भगवान श्रीराम जी प्रकट हुए थे।

इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 02 अप्रैल, गुरुवार की प्रातः 03 बजकर 40 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 03 अप्रैल, शुक्रवार की प्रातः 02 बजकर 43 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

इस वर्ष 2020 में श्री राम नवमी का पर्व या राम जन्मोत्सव 02 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।
क्योंकि, श्रीराम जी का अवतरण, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि तथा कर्क लग्न के मध्याह्न के समय में ही हुआ था।

इस वर्ष, श्री राम नवमी के शुभ दिवस पर भगवान राम जी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त, 02 अप्रैल, गुरुवार की दोपहर 11 बजकर 16 मिनिट से 01 बजकर 42 मिनिट तक का रहेगा।
सीता नवमी - 02 मई 2020, शनिवार

राम नवमी के अन्य महत्वपूर्ण समय इस प्रकार हैं-

02 अप्रैल 2020, गुरुवार
रामनवमी मध्याह्न समय : 12:29
अभिजित मुहूर्त:- 12:06 से 12:55
राहुकाल:- 14:04 से 15:37
सूर्योदय:- 06:18    सूर्यास्त:- 18:43
चन्द्रोदय:- 12:44   चन्द्रास्त:- 02:38 (मध्यरात्रि)

09 March 2020

होली 2020 | ज्योतिष शास्त्र | Holi Ke Upay In Hindi | धन प्राप्ति के उपाय | Holi 2020 by Vinod Pandey

 होली 2020 | ज्योतिष शास्त्र | Holi Ke Upay In Hindi | धन प्राप्ति के उपाय | Holi 2020 by Vinod Pandey

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फाल्गुन मास में आने वाली पूर्णिमा तिथि को फाल्गुन पूर्णिमा कहते हैं। इस शुभ दिवस होलिका दहन किया जाता हैं। हिन्दु धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, होलिका दहन को होलिका दीपक तथा छोटी होली के नाम से भी जाना जाता हैं। होली हिन्दुओं के प्रमुख एवं महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं, जिसे सम्पूर्ण भारतवर्ष में अत्यंत उत्साह तथा धूम-धाम के साथ मनाया जाता हैं। हिन्दू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक महत्व अत्यंत अधिक हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिवस किए गए उपाय अत्यंत ही शीघ्र शुभ फल प्रदान करते हैं। इस दिवस सूर्योदय से प्रारम्भ कर चंद्रोदय तक व्रत-उपवास भी किया जाता हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा का उपवास रखने से प्रत्येक मनुष्य के समस्त दुखों का नाश होता हैं तथा उस भक्त को भगवान श्री हरी विष्णुजी की विशेष कृपादृष्टि प्राप्त होती हैं।

आज हम आपको होली पर किए जाने वाले ऐसे ही सरल किन्तु अचूक उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें होली के पर्व पर कर के आप सभी परेशानियों से मुक्त हो जायेंगे।


उपाय इस प्रकार हैं-
                               १:-   यदि आपके जीवन में राहु के कारण कोई परेशानी हैं, तो एक नारियल का गोला लेकर उसमें अलसी का तेल भरें। उसी में थोड़ा सा गुड़ डालें तथा इस गोले को जलती हुई होलिका में अर्पित कर दें। इस प्रयोग से राहु का बुरा प्रभाव स्वयं ही समाप्त हो जाएगा।
                               २:-   यदि आपको कोई अज्ञात भय रहता हैं, तो होली पर एक सूखा जटा वाला नारियल, काले तिल तथा पीली सरसों एक साथ लेकर उसे सात बार अपने सिर के ऊपर उतार कर जलती होलिका में अर्पित कर देने से अज्ञात भय समाप्त हो जाएगा।
                               ३:-   यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो 21 गोमती चक्र लेकर होलिका दहन की रात्रि में शिवलिंग पर चढ़ा दें। इससे व्यापार तथा नौकरी में लाभ तथा प्रगति प्राप्त होगी।
                               ४:-   होलिका दहन के दूसरे दिवस होलिका की राख को घर लाकर उसमें थोड़ी सी राई तथा नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूत-प्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती हैं।
                               ५:-   घर की सुख-समृद्धि हेतु परिवार के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा तथा एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। साथ ही होली की 11 परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए।
                               ६:-   होली की रात्रि सरसों के तेल का चौमुखी दीपक घर के मुख्य द्वार पर लगाएं तथा उसकी पूजा करें। इसके पश्चात भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से प्रत्येक प्रकार की बाधा का निवारण होता हैं।
                               ७:-   धन हानि से बचने हेतु होली के दिवस घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें तथा उस पर दोमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धन हानि से बचाव की प्रार्थना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में अर्पित कर दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, आपको कभी भी धन की हानि नहीं होगी।
                               ८:-   जिसके पास कोई नौकरी या व्यापार नहीं हैं, तो ऐसे जातकों को होली की रात्रि 12 बजे से पूर्व एक नींबू लेकर किसी चौराहे पर जाना चाहिए तथा उसके चार टुकड़े कर चारों दिशाओं में फेंक देना चाहिए एवं तुरंत वापस घर आ जाना चाहिए, किन्तु ध्यान रहे की, वापसी के समय पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।
                               ९:-   होली पर किसी योग्य निर्धन को यथासंभव भोजन अवश्य कराएं। इससे आपकी समस्त मनोकामना अत्यंत शीघ्र पूर्ण होगी।
                         १०:-   शीघ्र विवाह हेतु होली के दिवस किसी शिव मंदिर जाएं तथा अपने साथ 1 साबुत  पान, 1 साबुत  सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी तथा हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके पश्चात पीछे देखे बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिवस भी करें। इसके साथ ही समय-समय पर शुभ मुहूर्त में यह उपाय करते रहें । जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।
                         ११:-   यदि किसी ने आप पर कोई टोटका या काला जादू किया हैं तो होली की रात्रि जहां होलिका दहन हो, उस जगह एक गड्ढा खोदकर उसमें 11 अभिमंत्रित कौड़ियों को दबा दें। अगले दिवस कौड़ियों को निकालकर अपने घर की मिट्टी के साथ नीले कपड़े में बांधकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। जो भी तंत्र क्रिया आप पर किसी ने की होगी वह नष्ट हो जाएगी।
                         १२:-   यदि आपके घर में किसी भूत-प्रेत का साया हैं तो जब होली जल जाए, तब आप होलिका की थोड़ी सी अग्नि अपने घर ले आएं तथा अपने घर के आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व के मध्य के कोण में उस अग्नि को तांबे या मिट्टी के पात्र में रखें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इस उपाय से आपकी समस्त परेशानियाँ नष्ट हो जाएगी।
                         १३:-   यदि आपका पैसा कहीं फंसा हैं तो, होली के दिवस 11 गोमती चक्र हाथ में लेकर जलती हुई होलिका की 11 बार परिक्रमा करते हुए धन प्राप्ति की प्रार्थना करें। उसके पश्चात एक सफेद कागज पर उस व्यक्ति का नाम लाल चन्दन से लिखें जिससे पैसा लेना हैं तथा उस सफेद कागज को 11 गोमती चक्र के साथ में कहीं गड्ढा खोदकर दबा दें। इस प्रयोग से धन प्राप्ति की संभावना अत्यंत बढ़ जाएगी।
                         १४:-   शत्रुओं से छुटकारा पाने हेतु होलिका दहन के समय 7 गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि, आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा तथा विश्वास के साथ गोमती चक्र जलती हुई होलिका में अर्पित कर दें।
                         १५:-   होली से प्रारम्भ कर के बजरंग बाण का 40 दिवस तक नियमित पाठ करने से प्रत्येक प्रकार की मनोकामना पूर्ण हो सकती हैं।

आप सभी दर्शक-मित्र को हमारी ओर से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

08 March 2020

होलिका दहन कब है | शुभ मुहूर्त | होली 2020 | Holika Dahan 2020 शास्त्रोक्त पौराणिक नियम

होलिका दहन कब है शुभ मुहूर्त | होली 2020 | Holika Dahan 2020 शास्त्रोक्त पौराणिक नियम #Holi #Holika #Holi2020

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होली हिन्दुओं के प्रमुख एवं महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं, जिसे सम्पूर्ण भारतवर्ष में अत्यंत उत्साह तथा धूम-धाम के साथ मनाया जाता हैं। हिन्दु धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार, होलिका दहन को होलिका दीपक तथा छोटी होली के नाम से भी जाना जाता हैं। होलिका दहन का दिवस अर्थात फाल्गुन मास में आने वाली पूर्णिमा तिथि को फाल्गुन पूर्णिमा कहते हैं। हिन्दू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक महत्व अत्यंत अधिक हैं। इस दिवस सूर्योदय से प्रारम्भ कर चंद्रोदय तक व्रत-उपवास भी किया जाता हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा का उपवास रखने से प्रत्येक मनुष्य के समस्त दुखों का नाश होता हैं तथा उस भक्त को भगवान श्री हरी विष्णुजी की विशेष कृपादृष्टि प्राप्त होती हैं।

सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार होलिका दहन का मुहूर्त किसी अन्य त्यौहार के मुहूर्त से अधिक महत्वपूर्ण तथा अति आवश्यक हैं। यदि किसी अन्य त्यौहार की पूजा उपयुक्त समय पर ना की जाये तो मात्र पूजा के लाभ से वर्जित होना पड़ता हैं किन्तु होलिका दहन की पूजा यदि अनुपयुक्त समय पर हो जाये तो यह एक दुर्भाग्य तथा भारी पीड़ा का कारण बनाता हैं।
हमारे द्वारा बताया गया मुहूर्त धर्म-शास्त्रों के अनुसार निर्धारित किया हुआ श्रेष्ठ मुहूर्त हैं। यह मुहूर्त सदैव भद्रा मुख का त्याग करके निर्धारित होता हैं।
होली के पर्व को सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष के समय, जब पूर्णिमा तिथि व्याप्त हो, तभी मनाना चाहिये। पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्ध में भद्रा व्याप्त होती हैं, प्रत्येक शुभ कार्य भद्रा में वर्जित होते हैं। अतः इस समय होलिका पूजा तथा होलिका दहन नहीं करना चाहिये। यदि भद्रा पूँछ प्रदोष से पहले तथा मध्य रात्रि के पश्चात व्याप्त हो तो उसे होलिका दहन के लिये नहीं लिया जा सकता क्योंकि होलिका दहन का मुहूर्त सूर्यास्त तथा मध्य रात्रि के बीच ही निर्धारित किया जाता हैं।

होलिका दहन का शास्त्रोक्त नियम

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होलाष्टक माना जाता हैं, जिसमें शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन होलिका-दहन किया जाता हैं। जिसके लिए मुख्यतः दो नियम ध्यान में रखने चाहिए -
1.   प्रथम, उस दिन भद्रान हो। भद्रा का ही एक दूसरा नाम विष्टि करण भी हैं, जो कि 11 करणो में से एक हैं। एक करण तिथि के आधे भाग के बराबर होता हैं।
2.   द्वितीय, पूर्णिमा प्रदोषकाल-व्यापिनी होनी चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो उस दिन सूर्यास्त के पश्चात के तीन मुहूर्तों में पूर्णिमा तिथि होनी आवश्यक हैं।

होलिका दहन के मुहूर्त के लिए यह बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिये -

भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती हैं। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो परन्तु भद्रा मध्य रात्रि से पूर्व समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो, तब होलिका दहन करना चाहिये। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो, तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूँछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता हैं। किन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। धर्मसिन्धु में भी इस मान्यता का समर्थन किया गया हैं। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भद्रा मुख में किया होली दहन अनिष्ट का स्वागत करने के जैसा हैं, जिसका परिणाम न केवल दहन करने वाले को किन्तु नगर तथा देशवासियों को भी भुगतना पड़ सकता हैं। किसी-किसी वर्ष भद्रा पूँछ प्रदोष के पश्चात तथा मध्य रात्रि के बीच व्याप्त ही नहीं होती हैं, तो ऐसी स्थिति में प्रदोष के समय होलिका दहन किया जा सकता हैं। कभी दुर्लभ स्थिति में यदि प्रदोष तथा भद्रा पूँछ दोनों में ही होलिका दहन सम्भव न हो तो प्रदोष के पश्चात होलिका दहन करना चाहिये।

होलिका दहन मुहूर्त

इस वर्ष, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 09 मार्च, सोमवार की प्रातः 03 बजकर 03 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 09 मार्च, सोमवार की ही रात्रि 11 बजकर 17 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2020 में होलिका दहन 09 मार्च, सोमवार के दिन किया जाएगा।

इस वर्ष, होलिका दहन का शुभ समय, 09 मार्च, सोमवार की साँय 06 बजकर 33 मिनिट से रात्रि 08 बजकर 58 मिनिट तक का रहेगा।
भद्रा पूँछ - प्रातः 09:37 से 10:38
भद्रा मुख - 10:38 से 12:19

रंगवाली होली

रंगवाली होली, जिसे धुलण्डी के नाम से भी जाना जाता हैं, वह होलिका दहन के पश्चात ही मनायी जाती हैं, जो की 10 मार्च के दिन आयेगी तथा इसी दिन को होली खेलने के लिये मुख्य दिन माना जाता हैं।

05 March 2020

आमलकी एकादशी कब है 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Amalaki Ekadashi 2020

आमलकी एकादशी कब है 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Amalaki Ekadashi 2020 #EkadashiVrat


amla ekadashi in hindi 2020
amla ekadashi in hindi
वैदिक विधान कहता हैं की, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का भिन्न भिन्न महत्व होता हैं तथा प्रत्येक एकादशीयों की एक पौराणिक कथा भी होती हैं। एकादशियों को वास्तव में मोक्षदायिनी माना गया हैं। भगवान श्रीविष्णु जी को एकादशी तिथि अति प्रिय मानी गई हैं चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुकल पक्ष की। इसी कारण एकादशी के दिन व्रत करने वाले प्रत्येक भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा-दृष्टि सदा बनी रहती हैं, अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान श्रीविष्णु जी की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं, साथ ही रात्री जागरण भी करते हैं। किन्तु इन प्रत्येक एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी हैं जिसका व्रत महाशिवरात्रि तथा होली के मध्य में आता हैं, तथा इस एकादशी में आवले के फल का अति विशेष महत्व होता हैं। अतः फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी या आमला एकादशी अथवा आंवला एकादशी के रूप में मनाया जाता हैं। आमलकी एकादशी को आमलक्य एकादशी भी कहा जाता हैं।

        आमलकी का अर्थ आंवला ही होता हैं, जिसे हिन्दू धर्म शास्त्रों में गंगा नदी के समान श्रेष्ठ बताया गया हैं। पद्म पुराण के अनुसार आंवला का वृक्ष भगवान विष्णुजी को अत्यंत प्रिय माना गया हैं। पीपल के समान आंवले के पेड़ में प्रत्येक देवी-देवताओं का वास माना गया हैं। स्वर्ग तथा मोक्ष की प्राप्ति की इच्छा रखने वाले प्रत्येक मनुष्य को फाल्गुन मास की आमला एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिये। आँवला को देवतुल्य माना गया हैं। आमलकी एकादशी के व्रत में आँवले के कृक्ष का पूजन किया जाता हैं। इस वृक्ष के प्रत्येक अंग में ईश्वर का वास कहा गया हैं। आंवले के वृक्ष में भगवान श्रीविष्णु का वास होने के कारण वृक्ष के नीचे श्रीहरी का पूजन किया जाता हैं। इस पावन दिवस आंवले का उबटन, आंवले के जल से स्नान, आंवला पूजन, आंवले का भोजन तथा आंवले का दान करने का विधान हैं।

आमलकी एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ती करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण ना किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिवस सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता हैं।

ध्यान रहे,
१- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।
२- यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।
३- द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।
४- एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
५- व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।
६- व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
७- जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि होती हैं।
८- यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।


इस वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 05 मार्च , गुरुवार की दोपहर 01 बजकर 18 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 06 मार्च, शुक्रवार की दोपहर 11 बजकर 46 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2020 में आमलकी एकादशी का व्रत 06 मार्च, शुक्रवार के दिन किया जाएगा।
               
इस वर्ष, आमलकी एकादशी व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 07 मार्च, शनिवार की प्रातः 06 बजकर 48 मिनिट से 09 बजकर 06 मिनिट तक का रहेगा।

द्वादशी समाप्त होने का समय - 09:28

आमलकी एकादशी का व्रत कब किया जाता हैं?

आमलकी एकादशी महाशिवरात्रि तथा होली के मध्य में आती हैं। सनातन हिन्दू पंचाङ्ग के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत सम्पूर्ण भारत-वर्ष में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष के एकादशी के दिन किया जाता हैं। साथ ही, अङ्ग्रेज़ी कलेंडर के अनुसार यह व्रत फरवरी या मार्च के महीने में आता हैं।