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12 September 2020

इन्दिरा एकादशी कब है 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Indira Ekadashi 2020

इन्दिरा एकादशी कब है 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Indira Ekadashi 2020

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वैदिक विधान कहता है की, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती है। प्रत्येक एकादशी का भिन्न भिन्न महत्व होता है तथा प्रत्येक एकादशीयों की एक पौराणिक कथा भी होती है। एकादशियों को वास्तव में मोक्षदायिनी माना जाता है। भगवानजी को एकादशी तिथि अति प्रिय मानी गई है चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुकल पक्ष की। इसी कारण एकादशी के दिन व्रत करने वाले भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा-दृष्टि सदा बनी रहती है, अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान श्रीविष्णु जी की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं, एवं रात्री जागरण करते है। किन्तु इन प्रत्येक एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी है जो की श्राद्ध पक्ष की एकादशी दिन आती है, तथा इस एकादशी के व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती हैं। यह पितरों को सद्गति देनेवाली एकादशी का नाम इंदिरा एकादशी है। जो की, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है। इस एकादशी की महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पितृपक्ष में आती है जिस कारण इसका महत्व अत्यंत अधिक हो जाता है। मान्यता है कि यदि कोई पूर्वज़ जाने-अंजाने हुए अपने पाप कर्मों के कारण यमदेव के पास अपने कर्मों का दंड भोग रहे हैं, तो इस एकादशी पर विधिपूर्वक व्रत कर इसके पुण्य को उनके नाम पर दान कर दिया जाये तो उन्हें मोक्ष प्राप्त हो जाता है तथा मृत्यु के उपरांत व्रती भी बैकुण्ठ में निवास करता है।

 

इन्दिरा एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ती करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण न किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता है।

 

ध्यान रहे,

१- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।

२- यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।

३- द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।

४- एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।

५- व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।

६- व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।

७- जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि होती हैं।

८- यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।

 

इस वर्ष, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 सितम्बर, रविवार की प्रातः 04 बजकर 13 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 14 सितम्बर, सोमवार की प्रातः 03 बजकर 16 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

 

अतः इस वर्ष 2020 में इन्दिरा एकादशी का व्रत 13 सितम्बर, रविवार के दिन किया जाएगा।

 

इस वर्ष, इन्दिरा एकादशी व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 14 सितम्बर, सोमवार की दोपहर  01 बजकर 36 से सायं 04 बजकर 04 मिनिट तक का रहेगा।

हरि वासर समाप्त होने का समय - प्रातः 08:49 

22 October 2019

रमा एकादशी कब हैं 2019 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Rama Ekadashi Vrat 2019

रमा एकादशी कब हैं 2019 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Rama Ekadashi Vrat 2019 #EkadashiVrat

Rama Ekadashi kab hai
Rama Ekadashi Vrat
    वैदिक विधान कहता हैं की, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का भिन्न भिन्न महत्व होता हैं तथा प्रत्येक एकादशीयों की एक पौराणिक कथा भी होती हैं। एकादशियों को वास्तव में मोक्षदायिनी माना जाता हैं। भगवान श्रीविष्णु जी को एकादशी तिथि अति प्रिय मानी गई हैं चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुकल पक्ष की। इसी कारण एकादशी के दिन व्रत करने वाले प्रत्येक भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा-दृष्टि सदा बनी रहती हैं, अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान श्रीविष्णु जी की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं, साथ ही रात्री जागरण भी करते हैं। किन्तु इन प्रत्येक एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी हैं जिसके प्रभाव से मनुष्य के प्रत्येक पाप नष्ट हो जाते हैं, तथा वे मोक्ष प्राप्त करते हैं। सनातन हिन्दू पंचाङ्ग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी परम कल्याणकारी “रमा एकादशी” के नाम से विख्यात हैं। रमा एकादशी को रम्भा एकादशी या कार्तिक कृष्ण एकादशी भी कहा जाता हैं। यह व्रत देवी लक्ष्मी के नाम से जाना जाता हैं। जो की दिवाली के त्योहार से चार दिन पूर्व आता हैं। रमा एकादशी का व्रत जातक को अर्थ व काम से ऊपर उठाकर मोक्ष तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता हैं। अतः यह व्रत अति उत्तम माना गया हैं। रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी का विशेष विधि-विधान से पूजन किया जाता हैं। इस दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए व्रत करने का विधान हैं। इस दिन भगवान श्री विष्णु जी का पूजन एवं भागवत गीता का पाठ करना उत्तम माना गया हैं।

रमा एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ती करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण ना किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिवस सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता हैं।

ध्यान रहे,
१- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।
२- यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।
३- द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।
४- एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
५- व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।
६- व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
७- जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि होती हैं।
८- यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।

इस वर्ष 2019 में, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अक्तूबर, बुधवार की मध्य-रात्रि 01 बजकर 08 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 24 अक्तूबर, गुरुवार की रात्रि 10 बजकर 18 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2019 में रमा एकादशी का व्रत 24 अक्तूबर, गुरुवार के शुभ दिवस किया जाएगा।

इस वर्ष, रमा एकादशी व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 25 अक्तूबर, शुक्रवार की प्रातः 06 बजकर 34 मिनिट से 08 बजकर 48 मिनिट तक का रहेगा।
द्वादशी समाप्त होने का समय- 19:08 Hrs.

26 July 2019

कामिका एकादशी कब हैं 2019 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Kamika Ekadashi 2019 #EkadashiVrat

कामिका एकादशी कब हैं 2019 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Kamika Ekadashi 2019 #EkadashiVrat

kamikaa ekadasi shubh Muhurt 2019
kamikaa ekadasi shubh Muhurt 2019
वैदिक विधान कहता हैं की, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। भगवान को एकादशी तिथि अति प्रिय हैं चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुक्ल पक्ष की। इसी कारण इस दिन व्रत करने वाले भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा सदा बनी रहती हैं अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान विष्णु की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं। किन्तु इन सभी एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी हैं जिसकी कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता हैं। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का नाम कामिका एकादशी हैं। गुजरात व महाराष्ट्र तथा दक्षिणी भारत में कामिका एकादशी का व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण एकादशी के दिन किया जाता हैं। इस एकादशी के पालक देवता भगवान विष्णु जी के अवतार “वामन देवता” को माना जाता हैं। जिस व्यक्ति ने कभी कोई पापकर्म किया हैं, तथा उसे इसका भय सताता हो, ऐसे व्यक्ति को कामिका एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धाभाव तथा विधि-विधान से अवश्य करना चाहिए। कामिका एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी की आराधना एवं पूजा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अवसर होता हैं। ऐसा करने से, जातक पाप रूपी संसार से उभर कर, मोक्ष की प्राप्ति करने में समर्थ हो पाता हैं। यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली तथा मनोवांछित फल प्रदान करने वाली होती हैं। एकादशी के प्रत्येक व्रतों में कामिका एकादशी को सर्वोत्तम व्रत माना जाता हैं। सुवर्ण, लालमणी मोती, दूर्वा आदि से पूजा होने पर भी भगवान श्री हरी उतने संतुष्ट नहीं होते, जितने की तुलसी पत्र से पूजा होने के पश्चात हो जाते हैं। जो जातक तुलसी पत्र से श्री माधव की पूजा करता हैं। उसके प्रत्येक जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। कामिका एकादशी को श्री विष्णु का उत्तम व्रत कहा गया हैं, कहा जाता हैं कि इस एकादशी की कथा स्वयं भगवान श्री कृष्ण जी ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। साथ ही, इससे पूर्व वशिष्ठ मुनि जी ने इस व्रत की कथा राजा दिलीप को भी सुनायी थी, जिसे सुनकर उन्हें समस्त पापों से मुक्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। धर्म-ग्रंथों के अनुसार, यह एकादशी उपासकों के सभी कष्टों का निवारण करने वाली तथा मनोवांछित इच्छापूर्ति करने वाली मानी गई हैं। इस एकादशी के व्रत को करने से पूर्वजन्म की बाधाएं भी दूर होती हैं। कामिका एकादशी भगवान विष्णु की आराधना तथा पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय होता हैं। अतः कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु का व्रत करने से व्रती को उनके समस्त पापों से मुक्ति प्राप्त होती हैं। इस एकादशी के विषय में यह भी मान्यता हैं कि, जो साधक सावन के पवित्र मास में भगवान विष्णु जी की पूजा तथा व्रत करता हैं, उसके द्वारा गंधर्वों तथा समस्त नागों की भी पूजा हो जाती हैं। कामिका एकादशी के दिन “गौ दुग्ध” का सागार लेना चाहिए तथा इस दिन भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।

कामिका एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ति करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण ना किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिवस सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता हैं।

ध्यान रहे,
१- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।
२- यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।
३- द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।
४- एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
५- व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।
६- व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
७- जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की प्रथम एक चौथाई अवधि होती हैं।
८- यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।

इस वर्ष, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 27 जुलाई, शनिवार की साँय 07 बजकर 45 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 28 जुलाई रविवार की साँय 06 बजकर 49 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2019 में कामिका एकादशी का व्रत 28 जुलाई, रविवार के दिन किया जाएगा।

इस वर्ष, कामिका एकादशी का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 29 जुलाई, सोमवार की प्रातः बजकर 05 बजकर 56 मिनिट से सायं 08 बजकर 24 मिनिट तक का रहेगा।
(द्वादशी समाप्त होने का समय - 17:10 Hrs)

07 January 2019

एकादशी कब है | Ekadashi Vrat 2019 | Ekadashi Kab hai | Ekadashi Kab ki hai 2019 | Ekadashi Dates 2019

एकादशी कब है | Ekadashi Vrat 2019 | Ekadashi Kab hai | Ekadashi Kab ki hai 2019 | Ekadashi Dates 2019
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१. सफला एकादशी व्रत {पौष कृष्ण एकादशी व्रत} :- मंगलवार, 1 जनवरी 2019
२. पौष पुत्रदा एकादशी व्रत {पौष शुक्ल एकदशी} :- गुरुवार, 17 जनवरी 2019
३. षटतिला एकादशी व्रत {माघ कृष्ण एकादशी व्रत} :- गुरुवार, 31 जनवरी 2019
४. जया एकादशी व्रत {माघ शुक्ल एकादशी व्रत} :- शनिवार, 16 फरवरी 2019
५. विजया एकादशी व्रत {फाल्गुन कृष्ण एकादशी व्रत} :- शनिवार, 2 मार्च 2019
६. आमलकी एकादशी व्रत {फाल्गुन शुक्ल एकादशी व्रत} :- रविवार, 17 मार्च 2019
७. पाप मोचिनी एकादशी व्रत {चैत्र कृष्ण एकादशी व्रत} :- रविवार, 31 मार्च 2019
८. कामदा एकादशी व्रत {चैत्र शुक्ल एकादशी व्रत} :- सोमवार, 15 अप्रैल 2019
९. वरुथिनी एकादशी व्रत {वैशाख कृष्ण एकादशी व्रत} :- मंगलवार, 30 अप्रैल 2019
१०. मोहिनी एकादशी व्रत {वैशाख शुक्ल एकादशी व्रत} :- बुधवार, 15 मई 2019
११. अपरा एकादशी व्रत {ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी व्रत} :- गुरुवार, 30 मई 2019
१२. निर्जला एकादशी व्रत {ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी व्रत} :- गुरुवार, 13 जून 2019
१३. योगिनी एकादशी व्रत {आषाढ़ कृष्ण एकादशी व्रत} :- शनिवार, 29 जून 2019
१४. देवशयनी एकादशी व्रत {आषाढ़ शुक्ल एकादशी व्रत} :- शुक्रवार, 12 जुलाई 2019
१५. कामिका एकादशी व्रत {श्रावण कृष्ण एकादशी व्रत} :- रविवार, 28 जुलाई 2019
१६. श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत {श्रावण शुक्ल एकादशी व्रत} :- रविवार, 11 अगस्त 2019
१७. अजा एकादशी व्रत {भाद्रपद कृष्ण एकादशी व्रत} :- सोमवार, 26 अगस्त 2019
१८. परिवर्तिनी/पार्श्व एकादशी व्रत {भाद्रपद शुक्ल एकादशी व्रत} :- सोमवार, 9 सितंबर 2019
१९. इंदिरा एकादशी व्रत {आश्विन कृष्ण एकादशी व्रत} :- बुधवार, 25 सितंबर 2019
२०. पापांकुश एकादशी व्रत {आश्विन शुक्ल एकादशी व्रत} :- बुधवार, 9 अक्तूबर 2019
२१. रमा एकादशी व्रत {कार्तिक कृष्ण एकादशी व्रत} :- गुरुवार, 24 अक्तूबर 2019
२२.  देवउठनी/प्रबोधिनी एकादशी व्रत {कार्तिक शुक्ल एकादशी व्रत} :- शुक्रवार, 8 नवम्बर 2019
२३. उत्पन्ना एकादशी व्रत {मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी व्रत} :- शुक्रवार, 22 नवम्बर 2019
२४. मोक्षदा एकादशी व्रत {मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी व्रत} :- रविवार, 8 दिसम्बर 2019
२५. सफला एकादशी व्रत {पौष कृष्ण एकादशी व्रत} :- रविवार, 22 दिसम्बर 2019

Ekadashi Vrat Dates 2019
January 01        Saphla Ekadashi       सफला एकादशी
January  17       Putrada Ekadashi      पुत्रदा एकादशी
January  31       Shattila Ekadashi      षट्तिला एकादशी
February 16      Jaya Ekadashi   जया एकादशी
March 02 Vijaya Ekadashi       विजया एकादशी
March 17 Amalaki Ekadashi    आमलकी एकादशी
March 31 Papmochani Ekadashi       पापमोचिनी एकादशी
April 15   Kamada Ekadashi     कामदा एकादशी
April 30   Varuthini Ekadashi   वरूथिनी एकादशी
May 15    Mohini Ekadashi      मोहिनी एकादशी
May 30    Apara Ekadashi        अपरा एकादशी
June 13    Nirjala Ekadashi       निर्जला एकादशी
June 29    Yogini Ekadashi       योगिनी एकादशी
July 12     Devshayani Ekadashi       देवशयनी एकादशी
July 28     Kamika Ekadashi     कामिका एकादशी
August 11        Putrada Ekadashi      पुत्रदा एकादशी
August 26        Aja Ekadashi    अजा एकादशी
September 09   Padma Ekadashi        पद्मा एकादशी
September 25   Indira Ekadashi        इंदिरा एकादशी
October 09       Papankusha Ekadashi       पापांकुशा एकादशी
October 24       Rama Ekadashi         रमा एकादशी
November 08   Devutthana Ekadashi        देवोत्थान एकादशी
November 22   Utpanna Ekadashi     उत्पन्ना एकादशी
December 08    Mokshada Ekadashi मोक्षदा एकादशी
December 22    Saphla Ekadashi       सफला एकादशी


01।Jan।2019
मंगलवार
सफला एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
पौष मास

17।Jan।2019
गुरुवार
पुत्रदा एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
पौष मास

31।Jan।2019
गुरुवार
षट्तिला एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
माघ मास


16।Feb।2019
शनिवार
जया एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
माघ मास

02।Mar।2019
शनिवार
विजया एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
फाल्गुन मास

17।Mar।2019
रविवार
आमलकी एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
फाल्गुन मास

31।Mar।2019
रविवार
पापमोचिनी एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
चैत्र मास

15।Apr।2019
सोमवार
कामदा एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
चैत्र मास

30।Apr।2019
मंगलवार
वरूथिनी एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
वैशाख मास


15।May।2019
बुधवार
मोहिनी एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
वैशाख मास

30।May।2019
गुरुवार
अपरा एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
ज्येष्ठ मास

13।Jun।2019
गुरुवार
निर्जला एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
ज्येष्ठ मास

29।Jun।2019
शनिवार
योगिनी एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
आषाढ़ मास

12।Jul।2019
शुक्रवार
देवशयनी एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
आषाढ़ मास

28।Jul।2019
रविवार
कामिका एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
श्रावण मास

11।Aug।2019
रविवार
पुत्रदा एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
श्रावण मास

26।Aug।2019
सोमवार
अजा एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
भाद्रपद मास

09।Sep।2019
सोमवार
पद्मा एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
भाद्रपद मास

25।Sep।2019
बुधवार
इंदिरा एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
आश्विन मास

09।Oct।2019
बुधवार
पापांकुशा एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
आश्विन मास

24।Oct।2019
गुरुवार
रमा एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
कार्तिक मास

08।Nov।2019
शुक्रवार
देवोत्थान एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
कार्तिक मास

23।Nov।2019
शनिवार
उत्पन्ना एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
मार्गशीर्ष मास

08।Dec।2019
रविवार
मोक्षदा एकादशी व्रत {शुक्ल पक्ष}
मार्गशीर्ष मास

22।Dec।2019
रविवार
सफला एकादशी व्रत {कृष्ण पक्ष}
पौष मास