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07 October 2018

कैसे करें घटस्थापना । नवरात्रि के पहले दिन क्या करे?


कैसे करें घटस्थापना । नवरात्रि के पहले दिन क्या करे? नवरात्रि के प्रथम दिन नियम से करें घटस्थापना, मिलेगा लाभ

नवरात्रि के प्रथम दिन नियम से करें घटस्थापना, मिलेगा लाभ
नवरात्रि के प्रथम दिन नियम से करें घटस्थापना

नवरात्रि का पवित्र त्यौहार बहुत ही जल्दी आने वाला है नवरात्रि के दिनों में 9 दिनों तक माता दुर्गा की उपासना की जाती है बहुत से श्रद्धालु नवरात्रि में अपने घर पर मंगल घट स्थापना करते हैं अखंड ज्योति जलाते हैं और 9 दिनों तक उपवास रखते हैं इस बार नवरात्रि का त्योहार 10 अक्टूबर से आरंभ होने वाला है आज हम आपको इस लेख के माध्यम से शारदीय नवरात्रि के मंगल कलश स्थापना की विधि और नियम के विषय में जानकारी देने वाले हैं आराधना का यह पर्व प्रथम तिथि को घटस्थापना से आरंभ होता है इसके साथ ही 9 दिनों तक अखंड ज्योति भी जलाई जाती है घटस्थापना करने के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बहुत ही आवश्यक है यदि आप इन नियमों का पालन करते हैं तो इससे माता रानी आपसे प्रसन्न होंगी और आपको शुभ फल की प्राप्ति मिलेगी।

किस प्रकार करें कलश स्थापना-

यदि आप नवरात्रि में अपने घर में कलश स्थापना कर रहे हैं तो सबसे पहले कलश पर स्वास्तिक बनाइए, फिर कलश पर मौली बांधे और उसमें जल भरिए कलश में साबुत सुपारी फूल इत्र और पंचरत्न और सिक्का डालिए इसके अंदर अक्षत भी डालें।
कलश स्थापना के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्र में घट स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए आप सुबह नित्य कर्म और स्नान करने के पश्चात ध्यान कीजिए इसके पश्चात पूजा स्थल से अलग एक पाटे पर लाल और सफेद कपड़ा बिछा दीजिए इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित कीजिए कलश का मुंह खुला ना रखें आपको इस बात का खास ध्यान रखना होगा आप इस को ढक कर रख दीजिए यदि कलश किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दीजिए और उसके बीचोबीच एक नारियल भी रखिए इस कलश में शतावरी जड़ी हलकुंड कमल गट्टे और रजत का सिक्का डालिए उसके पश्चात आप दीपक जलाकर इष्ट देव का ध्यान कीजिए और देवी मंत्र का जाप करें, अब कलश के सामने गेहूं और जौ को मिट्टी के पात्र में रोप दीजिए और इस ज्वारे को माता रानी का स्वरूप मानकर पूजा कीजिए।

 

घटस्थापना की सही दिशा-

यदि आप अपने घर में घटस्थापना करने जा रहे हैं तो आपको इसकी सही दिशा का पता होना बहुत ही आवश्यक है आप उत्तर पूर्व दिशा में इसकी स्थापना कीजिए क्योंकि यह दिशा देवताओं की दिशा मानी गई है आप माता की प्रतिमा के सामने अखंड ज्योति जलाएं तो उसको पूर्व दक्षिण में रखें घटस्थापना चंदन की लकड़ी पर कीजिए यह बहुत ही शुभ माना गया है आपको पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा।

अखंड ज्योत जलाए-

जिन घरों में नवरात्र के दिनों में अखंड ज्योत जलाया जाता है उन घरों के सदस्यों के ऊपर माता रानी की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है परंतु अखंड ज्योत जलाते समय कुछ नियमों का पालन करना बहुत ही आवश्यक है यदि आप अपने घर में अखंड ज्योत की स्थापना करने जा रहे हैं तो किसी भी हाल में यह ज्योत बुझनी नहीं चाहिए और इस दौरान घर में भी साफ सफाई का विशेष ध्यान रखिए ऐसा करने से आपके ऊपर मां का आशीर्वाद बना रहेगा।

कैसे करें घटस्थापना
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21 September 2017

9 दिन के 9 भोग | माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये | Navratri 2018 | Navratra Prasad


9 दिन के 9 भोग | माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये | Navratri 2018 | Navratra Prasad

जानिए, नवरात्रि के 9 दिन नवदुर्गाओं को क्या भोग चढ़ाएं जिससे माता प्रसन्न हो तथा आपको आशीर्वाद के रूप में सारी मनोकामनाए पूर्ण करे तथा मनोवांछित फल प्रदान करे






नमस्कार दोस्तों! में विनोद पांडे, आपका हार्दिक स्वागत करता हु!

दोस्तों, स्वयं भोजन करने से पूर्व माताजी को भोग लगाने से मनुष्य के प्रत्येक पापकर्म का नाश हो जाता है तथा उसे पुण्य प्राप्त होता है। कोई भी पूजा माताजी को भोग लगाए बिना अधूरी मानी गयी हैं।
नवरात्र हिन्दुओं का एक पवित्र त्यौहार है। सनातन धर्म में नवरात्री पर्व अत्यंत विशेष महत्व रखता है. इस पावन पर्व पर आप भी दुर्गा माता जी को प्रसन्न कर के उनका पावन आशीर्वाद पाप्त कर सकते है। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती है। माता जी के यह सभी स्वरूपों का भिन्न-भिन्न प्रभाव तथा भिन्न-भिन्न महत्व है।
विनोद पांडे
माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये
आइये आज हम आपको बताएँगे की इन नो देवियो को कौन से तिथि पर कौनसा भोग लगाने से वे अत्यंत प्रसन्न होते है तथा अपनी कृपादृष्टी आप पर बना कर, आपकी समस्त मनोकामनाए पूर्ण करते हैं।

1- प्रतिपदा का भोग - नवरात्री का प्रथम दिन माँ शेलपुत्री का होता है
शैलपुत्री माता को सफेद चीजों का भोग लगाये तथा माँ शैलपुत्री के चरणों में गाय का शुध्द घी अर्पित करे ऐसा करने से माँ शैलपुत्री अति प्रसन्न होते है तथा घर के सभी व्यक्ति को रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है
2- द्वितीया का भोग - नवरात्री का द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारणी का होता है
ब्रह्मचारिणी माता को मिश्री, चीनी एवं पंचामृत का भोग लगाये ऐसा करने से व्यक्ति आयुष्यमान होता है तथा स्त्रियों को अखंड-सौभाग्य की प्राप्ति होती है
3- तृतीया का भोग- नवरात्री का तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा का होता है
चंद्रघंटा माता को दूध तथा दूधसे बने अन्य पदार्थ जेसे की खीर या मिठाई का भोग लगाएं ऐसा करने से माता जी प्रसन्न होती हैं तथा सभी दुखों का नाश करती हैं तथा आपको सुख-शांति का वरदान देती है
4- चतुर्थी का भोग:- नवरात्री का चतुर्थ दिन माँ कुष्मांडा का होता है
कुष्मांडा माता को घर पर ही बनाये गए मालपुए का भोग लगाएं ऐसा करने से बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ मन शांत रहेने लगता है तथा निर्णय लेने की क्षमता भी अच्छी हो जाती है
5- पंचमी का भोग:- नवरात्री का पांचवा दिन माँ स्कन्दमाता का होता है
स्कंदमाता जी को केले का भोग लगाए ऐसा करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य का लाभ होता है तथा दुर्लभ से दुर्लभ रोगों से भी मुक्ति प्राप्त होती है
6- षष्ठी का भोग:- नवरात्री का छठा दिन माँ कात्यानी का होता है
कात्यायनी माता को मधु अर्थात शहद का भोग लगाए ऐसा करने से सुंदरता की प्राप्ती होती है तथा समाज में आपका व्यक्तित्व प्रभावशाली बन जाता है
7- सप्तमी का भोग:- नवरात्री का सातवा दिन माँ कालरात्रि का होता है
कालरात्रि माता को गुड़ का भोग लगाए ऐसा करने से व्यक्ति को आने वाले शोक तथा संकटो से मुक्ती मिलती है
8- अष्टमी का भोग:- नवरात्री का आठंवा दिन माँ महागौरी का होता है
महागौरी माता को नारियल का भोग लगाएं तथा उस नारियल को घर के सभी सदस्यों के सिर से सात घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें, ऐसा करने से आपकी समस्त मनोकामनाए पूर्ण होगी तथा संतान सुख भी प्राप्त होता है
9- नवमी का भोग:- नवरात्री का नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री का होता है
माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये
माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये
सिद्धिदात्री माता को तिल का तथा अन्य अनाज का भोग लगाएं ऐसा करने से जीवन में प्रत्येक सुख-शांति तथा वैभव की प्राप्ति होती है तथा अकाल मृत्यु से माता आपकी रक्षा करेगी
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