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16 September 2019

शारदीय नवरात्रि कब है | Navratri kab hai 2019 | Durga Puja | Ghat Sthapana | Shardiya Navratra 2019 #Navratri

शारदीय नवरात्रि कब है | Navratri kab hai 2019 | Durga Puja | Ghat Sthapana | Shardiya Navratra 2019 #Navratri

2019 Durga Puja
Navratri kab hai 2019 Durga Puja
सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥
        जय माता दी  
जय श्री कालका माँ
नवरात्र हिन्दुओं का अत्यंत पवित्र तथा प्रमुख त्यौहार हैं। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक होती हैं तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती हैं। माताजी के नौ रूप इस प्रकार हैं- माँ शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा माँ, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, माँ महागौरी तथा सिद्धिदात्रि माँ। प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्र आते हैं, तथा गुप्त नवरात्र भी आते हैं। पहले नवरात्र का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष से होता हैं। तथा अगले नवरात्र शारदीय नवरात्रे कहलाते हैं, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक रहते हैं। इन नवरात्रों के पश्चात दशहरा या विजयादशमी पर्व मनाया जाता हैं। यह नवरात्र आश्विन मास के शरद ऋतू में आते हैं, अतः इन नवरात्रों को शारदीय नवरात्र कहा जाता हैं। यह नवरात्र को सभी नवरात्रों में सर्वाधिक प्रमुख तथा महत्वपूर्ण माना गया हैं, अतः शारदीय नवरात्रों को महा-नवरात्रि भी कहा जाता हैं। यह त्यौहार गुजरात तथा बंगाल के साथ-साथ सम्पूर्ण भारत-वर्ष में अत्यंत धूम-धाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। माताजी के इस त्योहार को सम्पूर्ण उत्तर भारत में नवरात्र कहा जाता हैं, वहीं पश्चिम बंगाल तथा उसके आसपास के राज्यों में इसे दुर्गा पूजा के नाम से जाना जाता हैं, साथ ही गुजरात में यह पर्व अत्यंत उत्साह के साथ, डांडिया तथा गरबा खेलकर, धूमधाम से मनाया जाता हैं। दोनों ही नवरात्रों में माताजी का पूजन विधिवत् किया जाता हैं। देवी के पूजन करने की विधि दोनों ही नवरात्रों में लगभग एक समान ही रहती हैं। इस त्यौहार पर सुहागन या कन्या, सभी अपने सामर्थ्य अनुसार दो, तीन या सम्पूर्ण नौ दिनों तक का व्रत रखते हैं तथा दसवें दिन कन्या पूजन के पश्चात व्रत खोला जाता हैं। नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का संकल्प किया जाता हैं। अतः व्रत का संकल्प लेते समय उसी प्रकार संकल्प लें जीतने दिन आपको व्रत रखना हैं। व्रत-संकल्प के पश्चात ही घट स्थापना की विधि प्रारंभ की जाती हैं। घट स्थापना सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में ही करना चाहिए, ऐसा करने से घर में सुख तथा समृद्धि व्याप्त रहती हैं।

हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा से पहले भगवान गणेश जी की पूजा का विधान हैं, अतः नवरात्र की शुभ पूजा से पहले कलश के रूप में श्री गणेश महाराज को स्थापित किया जाता हैं। नवरात्र के आरंभ की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश या घट की स्थापना की जाती हैं। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता हैं।
आइये हम आपको बताते हैं, देवी माताजी के शारदीय नवरात्र के कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-

कलश स्थापना करते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए-

कृपया ध्यान दे:-
1.     नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता हैं, वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए। लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग पूजा में नहीं करना चाहिए।
2.     नवरात्र में कलश स्थापना किसी भी समय किया जा सकता हैं। नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा समय प्रारंभ हो जाता हैं, अतः यदि जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाते हैं तो वे सम्पूर्ण दिवस किसी भी समय कलश स्थापित कर सकते हैं।
3.     नवरात्रों में माँ भगवती की आराधना “दुर्गा सप्तसती” से की जाती है, परन्तु यदि समयाभाव है तो भगवान् शिव रचित “सप्तश्लोकी दुर्गा” का पाठ अत्यंत ही प्रभाव शाली है एवं दुर्गा सप्तसती का पाठ सम्पूर्ण फल प्रदान करने वाला है।

शारदीय नवरात्र 2019 के कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

29 सितम्बर रविवार शुभ के दिवस से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो रहा हैं। तथा यह पर्व 08 अक्तूबर मंगलवार के दिन तक मनाया जाएगा। नवरात्र के प्रथम दिन अर्थात 29 सितम्बर रविवार के दिन को माता दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा होगी। पार्वती तथा हेमवती भी माँ शैलपुत्री के अन्य नाम हैं। इस वर्ष 2019 में देवी दुर्गा माताजी का आगमन हाथी पर होगा तथा उनका प्रस्थान चरणायुध पर होगा।
इस वर्ष, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 28 सितम्बर, शनिवार के रात्रि 11 बजकर 56 मिनिट से आरंभ हो कर 29 सितम्बर, रविवार की रात्रि 08 बजकर 14 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।
अतः इस वर्ष 2019 में शारदीय नवरात्र के कलश स्थापना करने का शुभ मुहूर्त 29 सितम्बर, रविवार की प्रातः 06 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक का रहेगा। यदि इस, चित्रा नक्षत्र के सर्वश्रेष्ट मुहूर्त में आप कलश स्थापना करेंगे तो आपके लिए यह लाभदायक एवं अत्यंत शुभ रहेगा।
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धन्यवाद!

 नवरात्र तिथि | Dates of Navratra

पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 29 सितम्बर 2019, दिन रविवार
दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि, 30 सितम्बर 2019, दिन सोमवार.
तीसरा नवरात्र, तृतीया तिथि, 1 अक्तूबर 2019, दिन मंगलवार.
चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 2 अक्तूबर 2019, बुधवार.
पांचवां नवरात्र पंचमी तिथि , 3 अक्तूबर 2019, बृहस्पतिवार.
छठा नवरात्र, षष्ठी तिथि, 4 अक्तूबर 2019, शुक्रवार.
सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि, 5 अक्तूबर 2019, शनिवार
आठवां नवरात्र, अष्टमी तिथि, 6 अक्तूबर 2019, रविवार
नौवां नवरात्र, नवमी तिथि, 7 अक्तूबर 2019, सोमवार
         दशहरा, दशमी तिथि, 8 अक्तूबर 2019, मंगलवार

21 September 2017

9 दिन के 9 भोग | माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये | Navratri 2018 | Navratra Prasad


9 दिन के 9 भोग | माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये | Navratri 2018 | Navratra Prasad

जानिए, नवरात्रि के 9 दिन नवदुर्गाओं को क्या भोग चढ़ाएं जिससे माता प्रसन्न हो तथा आपको आशीर्वाद के रूप में सारी मनोकामनाए पूर्ण करे तथा मनोवांछित फल प्रदान करे






नमस्कार दोस्तों! में विनोद पांडे, आपका हार्दिक स्वागत करता हु!

दोस्तों, स्वयं भोजन करने से पूर्व माताजी को भोग लगाने से मनुष्य के प्रत्येक पापकर्म का नाश हो जाता है तथा उसे पुण्य प्राप्त होता है। कोई भी पूजा माताजी को भोग लगाए बिना अधूरी मानी गयी हैं।
नवरात्र हिन्दुओं का एक पवित्र त्यौहार है। सनातन धर्म में नवरात्री पर्व अत्यंत विशेष महत्व रखता है. इस पावन पर्व पर आप भी दुर्गा माता जी को प्रसन्न कर के उनका पावन आशीर्वाद पाप्त कर सकते है। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती है। माता जी के यह सभी स्वरूपों का भिन्न-भिन्न प्रभाव तथा भिन्न-भिन्न महत्व है।
विनोद पांडे
माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये
आइये आज हम आपको बताएँगे की इन नो देवियो को कौन से तिथि पर कौनसा भोग लगाने से वे अत्यंत प्रसन्न होते है तथा अपनी कृपादृष्टी आप पर बना कर, आपकी समस्त मनोकामनाए पूर्ण करते हैं।

1- प्रतिपदा का भोग - नवरात्री का प्रथम दिन माँ शेलपुत्री का होता है
शैलपुत्री माता को सफेद चीजों का भोग लगाये तथा माँ शैलपुत्री के चरणों में गाय का शुध्द घी अर्पित करे ऐसा करने से माँ शैलपुत्री अति प्रसन्न होते है तथा घर के सभी व्यक्ति को रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है
2- द्वितीया का भोग - नवरात्री का द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारणी का होता है
ब्रह्मचारिणी माता को मिश्री, चीनी एवं पंचामृत का भोग लगाये ऐसा करने से व्यक्ति आयुष्यमान होता है तथा स्त्रियों को अखंड-सौभाग्य की प्राप्ति होती है
3- तृतीया का भोग- नवरात्री का तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा का होता है
चंद्रघंटा माता को दूध तथा दूधसे बने अन्य पदार्थ जेसे की खीर या मिठाई का भोग लगाएं ऐसा करने से माता जी प्रसन्न होती हैं तथा सभी दुखों का नाश करती हैं तथा आपको सुख-शांति का वरदान देती है
4- चतुर्थी का भोग:- नवरात्री का चतुर्थ दिन माँ कुष्मांडा का होता है
कुष्मांडा माता को घर पर ही बनाये गए मालपुए का भोग लगाएं ऐसा करने से बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ मन शांत रहेने लगता है तथा निर्णय लेने की क्षमता भी अच्छी हो जाती है
5- पंचमी का भोग:- नवरात्री का पांचवा दिन माँ स्कन्दमाता का होता है
स्कंदमाता जी को केले का भोग लगाए ऐसा करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य का लाभ होता है तथा दुर्लभ से दुर्लभ रोगों से भी मुक्ति प्राप्त होती है
6- षष्ठी का भोग:- नवरात्री का छठा दिन माँ कात्यानी का होता है
कात्यायनी माता को मधु अर्थात शहद का भोग लगाए ऐसा करने से सुंदरता की प्राप्ती होती है तथा समाज में आपका व्यक्तित्व प्रभावशाली बन जाता है
7- सप्तमी का भोग:- नवरात्री का सातवा दिन माँ कालरात्रि का होता है
कालरात्रि माता को गुड़ का भोग लगाए ऐसा करने से व्यक्ति को आने वाले शोक तथा संकटो से मुक्ती मिलती है
8- अष्टमी का भोग:- नवरात्री का आठंवा दिन माँ महागौरी का होता है
महागौरी माता को नारियल का भोग लगाएं तथा उस नारियल को घर के सभी सदस्यों के सिर से सात घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें, ऐसा करने से आपकी समस्त मनोकामनाए पूर्ण होगी तथा संतान सुख भी प्राप्त होता है
9- नवमी का भोग:- नवरात्री का नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री का होता है
माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये
माँ दुर्गा देवी जी को किस तिथि पर कौन सा भोग लगाये
सिद्धिदात्री माता को तिल का तथा अन्य अनाज का भोग लगाएं ऐसा करने से जीवन में प्रत्येक सुख-शांति तथा वैभव की प्राप्ति होती है तथा अकाल मृत्यु से माता आपकी रक्षा करेगी
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