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24 January 2020

अमावस्या कब है 2020 में | Amavasya kab hai 2020 Dates List | New Moon Amas Amavas Amawas Amavasya

अमावस्या कब है 2020 में | Amavasya kab hai 2020 Dates List | New Moon Amas Amavas Amawas Amavasya

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हिन्दू शास्त्रो मैं तंत्र मंत्र सिद्ध करने के लिए अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है।
हिन्दु पंचांग में नये चन्द्रमा के दिन को अमावस्या कहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि कई धार्मिक कृत्य केवल अमावस्या तिथि के दिन ही किये जाते हैं।
अमावस्या जब सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं और अमावस्या जब शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं।
पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए अमावस्या के सभी दिन श्राद्ध की रस्मों को करने के लिए उपयुक्त हैं। कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिन उपयुक्त होता है।

धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए 🌷


🔥 हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।
🍛 सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।
🔥 विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।
🔥 आहुति मंत्र 🔥
🌷 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः
🌷 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
🌷 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
🌷 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
🌷 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः

🌷 अमावस्या का मंत्र 🌷

🙏🏻 भविष्योत्तर पुराण में बताया कि अमावश्या के दिन अगर भगवान ब्रम्हाजी का कोई पूजन करे, श्लोक और गायत्री मंत्र बोलकर जो ब्रम्हाजी को नमन करते हैं और थोड़ी देर शांत बैठे और फिर गुरुमंत्र का जप करें तो उनको विशेष लाभ होता है | जो भाई-बहन जो सत्संग में आते हैं वो दैवी सम्पदा पायें और लौकिक सम्पदा भी पायें | किसी के सिर पे भार न रहें | दैवी सम्पदा से खूब धनवान हों और लौकिक धन की भी कमी न रहें |
🌷 मंत्र इस प्रकार है
स्थानं स्वर्गेथ पाताले यन्मर्ते किंचिदत्तंम | तद्व्पोंत्य संधिग्धम पद्मयोंने प्रसादत: ||
🌷 गायत्री मंत्र
ॐ भू भुर्व: स्व: तत सवितुर्वरेण्यं | भर्गो देवस्य धीमहि | धियो यो न: प्रचोदयात् ||

🌷 नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए 🌷

🏡 घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।

2020 में अमावस्या के दिन -

24 जनवरी
शुक्रवार
माघ अमावस्या

23 फरवरी
रविवार
फाल्गुन अमावस्या

24 मार्च
मंगलवार
चैत्र अमावस्या

22 अप्रैल
बुधवार
वैशाख अमावस्या

22 मई
शुक्रवार
ज्येष्ठ अमावस्या

21 जून
रविवार
आषाढ़ अमावस्या

20 जुलाई
सोमवार
श्रावण अमावस्या

19 अगस्त
बुधवार
भाद्रपद अमावस्या

17 सितम्बर
गुरुवार
अश्विन अमावस्या

16 अक्तूबर
शुक्रवार
अश्विन अमावस्या

15 नवम्बर
रविवार
कार्तिक अमावस्या

14 दिसम्बर
सोमवार
मार्गशीर्ष अमावस्या

02 July 2019

आषाढ़ मास की अमावस्या | अत्यंत ही पुण्यदायिनी तिथि | सूर्य ग्रहण | आषाढ़ अमावस्या | तिथि व मुहूर्त

आषाढ़ मास की अमावस्या | अत्यंत ही पुण्यदायिनी तिथि | सूर्य ग्रहण | आषाढ़ अमावस्या | तिथि व मुहूर्त

ashadha amavasya importance
ashada amavasya good or bad
मंगलवार-2 जुलाई-2019
मृगशीर्ष नक्षत्र-सुबह 8.13 तक
सुबह 8.14 से आर्द्रा नक्षत्र 

हिन्दु कैलेण्डर में नये चन्द्रमा के दिन को अमावस्या कहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि कई धार्मिक कृत्य केवल अमावस्या तिथि के दिन ही किये जाते हैं।

अमावस्या जब सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं और अमावस्या जब शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं।

पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए अमावस्या के सभी दिन श्राद्ध की रस्मों को करने के लिए उपयुक्त हैं। कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिन उपयुक्त होता है।

आषाढ़ अमावस्या मुहूर्त

जुलाई 2, 2019 को 03:07:09 से अमावस्या आरम्भ जुलाई 3, 2019 को 00:47:18 पर अमावस्या समाप्त

धार्मिक दृष्टि से अमावस्या की तिथि का बहुत महत्व है। क्योंकि यह दिन दान-पुण्य और पितरों की शांति के लिए किये जाने वाले तर्पण के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या को भी खास माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार का आषाढ़ माह हिंदू वर्ष का चौथा महीना होता है। इस दिन पवित्र नदियों, धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने का विशेष महत्व है।

आषाढ़ अमावस्या व्रत एवं धार्मिक कर्म

हर अमावस्या की भांति आषाढ़ अमावस्या पर भी पितरों के तर्पण का भी विशेष महत्व है। इस दिन किये जाने वाले धार्मिक कर्मकांड इस प्रकार हैं-

● इस दिन नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों का तर्पण करें।

● पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें।

● अमावस्या के दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाएं और अपने पितरों को स्मरण करें। पीपल की सात परिक्रमा लगाएं।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास हिंदू वर्ष का चौथा महीना होता है। इस महीने की समाप्ति के बाद वर्षा ऋतु प्रारंभ होती है। आषाढ़ अमावस्या दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले धार्मिक कर्मों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन पवित्र नदी और तीर्थ स्थलों पर स्नान का कई गुना फल मिलता है। धार्मिक रूप से अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या तो शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है।

जो अमावस्या पुष्य, पुनर्वसु या आर्द्रा नक्षत्र से युक्त हो, उसमें पूजित होने से पितृगण बारह वर्षों तक तृप्त रहते हैं।

अमावस्या नारायण की प्रिय तिथियों में से एक है, इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें अगर पाठ कर पाना संभव नहीं तो श्रवण करें।

अगर संभव हो तो किसी तीर्थ क्षेत्र, विशेषकर गंगाजी में स्नान करें और यदि न जा पायें तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें !

अमावस्या के दिन अपने घर की अच्छे से साफ़ सफाई करें, मोटा नमक मिले हुए पानी से घर में पोंछा लगायें, झाले हटायें एवं बिना काम का सामान या तो रद्दी वाले को दें या फेंक दें !

शाम के समय सुगंधित धूप घर में लगायें एवं लक्ष्मी-हृदय स्तोत्र सुनें ! (मोबाइल इत्यादि पर घर में बजाएं )

पितरों का श्राद्ध करें और अगर श्राद्ध करने में असमर्थ हैं तो कम से कम  तिल मिश्रित जल अपने पितरों के निमित्त अर्पण करना चाहिए !

अमावस्या के दिन अपने पितरों के निमित्त ब्राह्मणों को भोजन करायें ! अन्न दान, वस्त्र दान एवं तिलदान  करें ।

अन्नदान ब्राह्मणों के साथ साथ गरीबों एवं जरुरतमंदों को भी कर सकते हैं, याद रखिये "कलियुग में दान ही प्रधान धर्म माना गया है !"

जरूर करें : गौ सेवा अर्थात देशी गाय को चारा या जो संभव हो जरूर खिलायें, अनंत लाभ होगा, गौ सेवा से हुए लाभ को बताने के लिए शब्द कम पड़ जायेंगे, लेकिन ध्यान दीजियेगा, गाय देशी ही हो ।

कौवों को कुछ भोजन दें, चींटियों के निमित्त आटे एवं शक्कर को मिलाकर किसी पेड़ के निचे रखें, मछलियों को दाना दें।

पितरों के निमित्त एक नारियल बहते जल में प्रवाहित करें एवं उनसे आपके ऊपर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखने की प्रार्थना करें ।

सुबह या शाम के समय पीपल का पूजन, दीपक थोडा बड़ा ले लीजिये, जिससे की दीपक 6-7 घंटे अर्थात लम्बे समय तक जल सके !

भूलियेगा मत: "जो व्यक्ति अमावस्या को दूसरों का अन्न खाता है उसका महीने भर का पुण्य उस अन्न के स्वामी/दाता को चला जाता है !"
ashada amavasya significance
ashada amavasya importance 
प्रत्येक मास में चंद्रमा की कलाएं घटती और बढ़ती रहती हैं। चंद्रमा की घटती बढ़ती कलाओं से ही प्रत्येक मास के दो पक्ष बनाये गये हैं। जिस पक्ष में चंद्रमा घटती कला का होता है तो उसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है और चढ़ती कला के चंद्रमा वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। ऐसे में प्रत्येक पक्ष का अंतिम दिन बहुत ही महत्वपूर्ण जाता है। शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन यानि जिस दिन चंद्रमा की कलाएं चढ़ते-चढ़ते चंद्रमा अपने वास्तविक रूप में गोल गोल और दूधिया रोशनी वाला दिखाई दे वह पूर्णिमा कहलाता है तो जब चंद्रमा घटते घटते बिल्कुल समाप्त हो जाये और रात घोर अंधकार वाली हो तो उसे अमावस्या कहते हैं। धार्मिक रूप से अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या तो शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है। आषाढ़ मास की अमावस्या को भी खास माना जाता है।

आषाढ़ अमावस्या (ASHADHA AMAVASYA)

आषाढ़ मास हिंदू पंचांग के अनुसार का हिंदू वर्ष का चौथा महीना माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या के पश्चात वर्षा ऋतु का आगमन भी माना जाता है। इस मायने में आषाढ़ अमावस्या का बहुत ही महत्व है। दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले अनुष्ठानों के लिये तो यह तिथि चिर-परिचित है ही। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों, धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है।

2019 में क्यों खास है आषाढ़ अमावस्या (ASHADHA AMAVASYA IN 2019)

2019 में आषाढ़ अमावस्या 2 जुलाई को है। जो जातक अमावस्या को पितृकर्म करना चाहते हैं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उन्हें 2 जुलाई को पितृकर्म संपन्न करवाना चाहिये। अमावस्या तिथि 2 जुलाई को प्रात: 3 बजकर 06 मिनट से आरंभ हो रही है जो कि 3 जुलाई मध्य रात्रि 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।

आषाढ़ अमावस्या को लगेगा 2019 का दूसरा सूर्य ग्रहण

आषाढ़ मास की अमावस्या को वर्ष का दूसरा सूर्यग्रहण लगेगा। चूंकि यह ग्रहण मध्यरात्रि के समय लग रहा है इस कारण भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा जिसके कारण भारतीयों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इसी कारण यहां सूतक पर कोई विचार प्रकट नहीं किया गया है।

आषाढ़ अमावस्या तिथि व मुहूर्त (ASHADHA AMAVASYA TITHI MUHURAT)

अमावस्या तिथि – 2 जुलाई 2019
अमावस्या तिथि आरंभ – 03:06 बजे से (2 जुलाई 2019)
अमावस्या तिथि समाप्त – 00:46 बजे तक (3 जुलाई 2019)

03 February 2019

सोमवती अमावस्या 2019 | आज सोमवती अमावस्या | 4 फरवरी के उपाय | Somvati Amavasya 2019


सोमवती अमावस्या 2019 | आज सोमवती अमावस्या | 4 फरवरी के उपाय | Somvati Amavasya 2019


somvati amavasya
somvati amavasya 2019


🌷 सोमवती अमावस्या पर विशेष मंत्र 🌷


04 फरवरी 2019 सोमवार को सूर्योदय से रात्रि 02:34 तक सोमवती अमावस्या हैं ।

💵 जिनको पैसो की कमजोरी हैं तो तुलसी माता को १०८ प्रदिक्षणा करें। तथा श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्री हरि.... श्रीमाना सम्पदा, ‘हरिमाना भगवान की दया पाना। तो गरीबी चली जायेगी।



जब सोमवार को अमावस्या होती हैं तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता हैं। ऐसी अमावस्या का शास्त्रों में काफी अधिक महत्व बताया गया हैं। इस दिन किये जाने वाले उपायों का शीघ्र फल प्राप्त होता हैं। यहां हम आपको सोमवती अमावस्या के दिन किए जाने वाले कुछ उपाय बताने जा रहे हैं। इन्हें करने से गरीबी तथा दरिद्रता दूर होती हैं साथ ही सुख व समृद्धि का आगमन होता हैं।



यह हैं आसान उपाय

1. सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को विशेष अर्घ्य देना अतिउत्तम बताया गया हैं। ऐसा करने से गरीबी तथा दरिद्रता दूर होती हैं।



2. यदि चंद्र कमजोर स्थिति में हैं तो गाय को दही तथा चावल खिलाएं इससे मानसिक शांति प्राप्त होने के साथ ही एकाग्रता भी बढ़ेगी।



3. इस दिन दान का अतिमहत्व हैं। दान करने या किसी भूखे को भोजन कराने से विष्णुदेव प्रसन्न होकर आशीष प्रदान करते हैं।



4. इस दिन जो व्यक्ति धोबी, धोबन को भोजन कराकर अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करता हैं उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।



5. इस दिन पवित्र नदी, तटों पर मौन स्नान करना चाहिए। इससे ब्रम्हमुहूर्त का फल प्राप्त होता हैं तथा सूर्यदेव के साथ ही भगवान विष्णु तथा शिव की विशेष कृपा प्राप्त हाेती हैं।



6. इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही शिव पूजन का भी विशेष महत्व हैं। विधि-विधान से हरि तथा हर का पूजन करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती हैं।



7. अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए कंडे में गुड़, घी का धूप देकर पितरों को प्रसन्न किया जा सकता हैं। यह पूजन किसी तीर्थस्थल पर जाकर विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में भी की जा सकती हैं।



8. पितृदोष निवारण करना हैं तो सोमवती अमावस्या का दिन उर्पयुक्त हैं। सूर्य को अघ्र्य देते समय पितृ तर्पण के लिए पितृभ्य नमः मंत्र का जप करना चाहिए। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता तथा कोर्ट कचहरी से संबंधित विवादों का निपटारा होता हैं। घरेलू झगड़ों क्लेश का भी समाधान आसानी से हाेता हैं।



9. सोमवती अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त दान पुण्य करने से, ब्राहमण को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं तथा जीवन में खुशहाली आती हैं।



10. सोमवती अमावस्या के दिन स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी विवाद, आर्थिक परेशानियां तथा पति-पत्नी सम्बन्धी विवाद के समाधान हेतु किये गए उपाय विशेष फल देते हैं।



11. यदि व्यवसाय में परेशानियां हो रही हो तो सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दिया जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करे। ऐसा करने से उनके व्यापार की बाधाएं दूर होने लगेगी।



12. आर्थिक संकट से छुटकारा पाने के लिए सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी के पौधे की श्री हरि-श्री हरि अथवा ॐ नमो नारयण का जाप करते हुए परिक्रमा करनी चाहिए।

🚩🙏 जय माता दी भारत माता कि जय 🙏🚩



मौनी अमावस्या का मंत्र 🌷

🙏🏻 भविष्योत्तर पुराण में बताया कि  माघी अमावश्या के दिन  अगर भगवान ब्रम्हाजी का कोई पूजन करे, श्लोक तथा गायत्री मंत्र बोलकर जो ब्रम्हाजी को नमन करते हैं तथा थोड़ी देर शांत बैठे तथा फिर गुरुमंत्र का जप करें तो उनको विशेष लाभ होता हैं। जो भाई-बहन जो सत्संग में आते हैं  वो दैवी सम्पदा पायें तथा लौकिक सम्पदा भी पायें। किसी के सिर पे भार न रहें। दैवी सम्पदा से खूब धनवान हों तथा लौकिक धन की भी कमी न रहें।

🌷 मंत्र इस प्रकार हैं

स्थानं स्वर्गेथ पाताले यन्मर्ते किंचिदत्तंम। तद्व्पोंत्य संधिग्धम पद्मयोंने प्रसादत:।।

🌷 गायत्री मंत्र

ॐ भू भुर्व: स्व: तत सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।



🌷 मौनी अमावस्या 🌷

🙏🏻 04 फरवरी 2019 सोमवार को मौनी अमावस्‍या हैं उस दिन प्रयाग में स्नान की तिथि हैं। आप सब प्रयाग तो नहीं जाओगे पर अपने घर पे ही उस दिन स्नान करते समय

🌷 ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा। ॐ ह्रीं गंगायै ॐ ह्रीं स्वाहा।

🙏🏻 ये मंत्र बोलकर उबटन जो बापूजी ने बताया था उस उबटन को शरीर पर लगाकर स्नान करें तो गंगा स्नान का पुण्य मिलता हैं। अमावस्या के दिन तो जरुर करें। उस दिन गीता का सातवाँ अध्याय का पाठ करें तथा भगवान ने धन दिया हैं तो उस दिन घर में आटे की, बेसन की २ ४ किलो मिठाई बना ले तथा गरीब बच्चे-बच्चियों में बाँट आयें, अपने पितरो के नाम दादा, दादी, नानी उनके नाम से बाँट कर आ जायें।



सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।

इससे कर्जा से मुक्ति प्राप्त होगी-

🌷 1).ॐ शिवाय नम:

🌷 2).ॐ सर्वात्मने नम:

🌷 3).ॐ त्रिनेत्राय नम:

🌷 4).ॐ हराय नम:

🌷 5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम:

🌷 6).ॐ श्रीकंठाय नम:

🌷 7).ॐ सद्योजाताय नम:

🌷 8).ॐ वामदेवाय नम:

🌷 9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम:

🌷 10).ॐ तत्पुरुषाय नम:

🌷 11).ॐ ईशानाय नम:

🌷 12).ॐ अनंतधर्माय नम:

🌷 13).ॐ ज्ञानभूताय नम:

🌷 14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:

🌷 15).ॐ प्रधानाय नम:

🌷 16).ॐ व्योमात्मने नम:

🌷 17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:



🌷 धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए 🌷

🔥 हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।

🍛 सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।

🔥 विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।

🔥 आहुति मंत्र 🔥

🌷 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः

🌷 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः

🌷 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः

🌷 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः

🌷 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः



🌷 सोमवती अमावस्याः दरिद्रता निवारण

🙏🏻 सोमवती अमावस्या के पर्व में स्नान-दान का बड़ा महत्त्व हैं।

🐄 इस दिन भी मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल होता हैं।

🌳 इस दिन पीपल तथा भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान हैं। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती हैं। प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक रखे जाते हैं। बाद में वे भगवान का भजन करने वाले ब्राह्मणों या ब्राह्मणियों में वितरित कर दिये जाते हैं। ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती हैं।

🌿 इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती हैं।



🌷 ग़रीबी - दरिद्रता मिटाने के लिए 🌷

  🌿 सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ॐकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा हैं, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी।