🔱 ॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः ॥ 🚩
॥ Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah ॥
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
भावार्थ:
हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। ॐ शांति, शांति, शांति॥
🪔💥 आप सभी को सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🪔💥
✨ दीपों का यह पावन महापर्व आपके जीवन को सुख, समृद्धि, सौहार्द, उत्तम स्वास्थ्य, शांति तथा अपार खुशियों की रोशनी से जगमग करे। 💐
दीपावली महालक्ष्मी-गणेश पूजन एवं शुभ मुहूर्त 2026
🪔 दीपावली का धार्मिक महत्त्व और पौराणिक आरंभ
दीपावली (दिवाली) सनातन हिन्दू धर्म का सर्वाधिक पवित्र और प्रमुख त्योहार है। यह महापर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का शाश्वत प्रतीक है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह उत्सव केवल भारतवर्ष में ही नहीं, अपितु संपूर्ण विश्व में अत्यंत उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने घी के दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया था। वहीं दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार, इसी पावन तिथि पर समुद्र मंथन से माता महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
देश के विभिन्न अंचलों में इस पर्व को लक्ष्मी-गणेश पूजा, अमावस्या लक्ष्मी पूजा, चोपड़ा पूजा, शारदा पूजा, केदार गौरी व्रत, दिवाली देवपूजा तथा बंगाल में काली पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से माता लक्ष्मी, भगवान श्री गणेश और धन के देवता कुबेर के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि, यमराज, हनुमान जी, माँ काली तथा देवी सरस्वती की आराधना की जाती है।
✨ पंचदिवसीय दीपोत्सव: दीपावली के पाँच पावन दिन
अमांत हिन्दू पंचांग के अनुसार दीपावली का उत्सव आश्विन (या पूर्णिमांत कार्तिक) मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक पूरे पाँच दिनों तक चलता है:
| दिवस | पर्व का नाम | विशेष महत्त्व |
|---|---|---|
| पहला दिन | धनत्रयोदशी (धनतेरस) | भगवान धन्वंतरि व कुबेर पूजन एवं शुभ खरीदारी |
| दूसरा दिन | नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | यम दीपदान, अभ्यंग स्नान व हनुमान पूजन |
| तीसरा दिन | महालक्ष्मी पूजा (मुख्य दीपावली) | लक्ष्मी-गणेश पूजन, चोपड़ा पूजन व दीपोत्सव |
| चौथा दिन | गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) | भगवान श्रीकृष्ण व गोवर्धन पर्वत का पूजन |
| पाँचवाँ दिन | भैया दूज (यम द्वितीया) | भाई-बहन के पवित्र स्नेह व मंगल कामना का पर्व |
इन पाँच दिनों में तीसरा दिन अर्थात् लक्ष्मी पूजा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है। पंचदिवसीय उत्सव की शुरुआत से पूर्व आप धनतेरस की पौराणिक कथा और उसका धार्मिक महत्त्व तथा धनतेरस के त्यौहार पर क्या खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है अवश्य जानें, ताकि पूरे दीपोत्सव का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
🕉️ दीपावली 2026: अमावस्या तिथि और लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त
धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार, श्री महालक्ष्मी पूजन के लिए वह अमावस्या तिथि सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है जो सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल से प्रारंभ होकर अर्धरात्रि तक व्याप्त रहे। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। साथ ही, यदि पूजा स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) के दौरान की जाए, तो माता लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से निवास करती हैं।
📅 दीपावली 2026 की मुख्य तिथि एवं समय
- दीपावली महापर्व तिथि: 08 नवम्बर 2026, रविवार
- कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 08 नवम्बर 2026 (रविवार) को प्रातः 11:27 बजे से
- कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवम्बर 2026 (सोमवार) को दोपहर 12:31 बजे तक
- 🌟 लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त: सायं 06:09 बजे से रात्रि 08:07 बजे तक (प्रदोष काल एवं स्थिर वृषभ लग्न का सर्वोत्तम संयोग)
इस वर्ष 08 नवम्बर 2026, रविवार को ही मुख्य दीपावली, नरक चतुर्दशी, तमिल दीपावली, महालक्ष्मी पूजन, केदार गौरी व्रत, चोपड़ा पूजा, शारदा पूजा तथा काली पूजा संपन्न की जाएगी। प्रदोष काल और स्थिर लग्न के इस सम्मिलित मुहूर्त में पूजन करने से उत्तम आरोग्य, अखंड धन-संपदा तथा व्यापार व आय में निरंतर वृद्धि की प्राप्ति होती है।
विशेष नोट: कुछ तांत्रिक परंपराओं और विशेषज्ञ पंडितों द्वारा महानिशिता काल (अर्धरात्रि) में पूजन किया जाता है, किंतु गृहस्थ और सामान्य भक्तों के लिए प्रदोष काल एवं वृषभ लग्न का समय ही शास्त्रोक्त और सर्वोत्तम है। लक्ष्मी पूजन के लिए चौघड़िया मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि चौघड़िया मुख्यतः यात्रा आदि कार्यों के लिए देखे जाते हैं।
📜 दीपावली के दिन का संपूर्ण पंचांग (08 नवम्बर 2026, रविवार)
- प्रदोष काल मुहूर्त: सायं 17:45 से 20:19 तक
- वृषभ काल (स्थिर लग्न) मुहूर्त: सायं 18:09 से 20:07 तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:48 से 12:33 तक
- सांयकालीन चौघड़िया मुहूर्त:
- शुभ (उत्तम): सायं 17:45 से 19:21 तक
- अमृत (सर्वोत्तम): रात्रि 19:21 से 20:58 तक
- सूर्योदय: प्रातः 06:36 बजे | सूर्यास्त: सायं 17:45 बजे
- चन्द्रोदय: प्रातः 06:35 बजे | चन्द्रास्त: सायं 16:50 बजे
- राहुकाल (अशुभ समय): सायं 16:21 से 17:45 बजे तक
🏙️ भारत के प्रमुख शहरों में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त (2026)
सूर्यास्त और लग्न का समय भौगोलिक स्थान के अनुसार कुछ मिनट भिन्न होता है। अपने शहर के अनुसार लक्ष्मी पूजन का सटीक समय नीचे दी गई तालिका में देखें:
| शहर का नाम | लक्ष्मी पूजा का शुभ समय (24-घंटे प्रारूप) | मानक समय (सायं से रात्रि) |
|---|---|---|
| मुम्बई (Mumbai) | 18:27 से 20:27 | 06:27 PM – 08:27 PM |
| पुणे (Pune) | 18:24 से 20:24 | 06:24 PM – 08:24 PM |
| अहमदाबाद (Ahmedabad) | 18:22 से 20:20 | 06:22 PM – 08:20 PM |
| नडियाद (Nadiad) | 18:21 से 20:19 | 06:21 PM – 08:19 PM |
| नई दिल्ली (New Delhi) | 17:54 से 19:50 | 05:54 PM – 07:50 PM |
| नोएडा (Noida) | 17:54 से 19:49 | 05:54 PM – 07:49 PM |
| गुरुग्राम (Gurugram) | 17:55 से 19:51 | 05:55 PM – 07:51 PM |
| चण्डीगढ़ (Chandigarh) | 17:52 से 19:46 | 05:52 PM – 07:46 PM |
| जयपुर (Jaipur) | 18:03 से 19:59 | 06:03 PM – 07:59 PM |
| कोलकाता (Kolkata) | 17:20 से 19:18 | 05:20 PM – 07:18 PM |
| हैदराबाद (Hyderabad) | 18:07 से 20:08 | 06:07 PM – 08:08 PM |
| चेन्नई (Chennai) | 18:07 से 20:09 | 06:07 PM – 08:09 PM |
| बेंगलुरु (Bengaluru) | 18:17 से 20:20 | 06:17 PM – 08:20 PM |
🏺 लक्ष्मी पूजा की तैयारी, चौकी स्थापना और चोपड़ा पूजन
माँ लक्ष्मी वहीं वास करती हैं जहाँ स्वच्छता, पवित्रता और सद्भाव होता है। इसलिए दीपावली से कई दिन पूर्व ही घरों और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई व सजावट शुरू कर दी जाती है।
- प्रातःकालीन कर्म एवं उपवास: दिवाली के दिन प्रातः शीघ्र स्नान कर कुल देवी-देवताओं और पूर्वजों का स्मरण व पूजन किया जाता है। अमावस्या तिथि होने के कारण कई परिवारों में पितरों के निमित्त तर्पण व श्राद्ध-पूजन भी होता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर सायंकाल लक्ष्मी पूजन के पश्चात ही भोजन ग्रहण करते हैं।
- मुख्य द्वार एवं कलश सज्जा: घर और दुकानों को गेंदे के फूलों तथा अशोक, आम व केले के पत्तों के तोरण से सजाया जाता है। मुख्य द्वार के दोनों ओर नारियल युक्त मंगल कलश स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा चौकी की स्थापना: पूजा स्थल पर ऊँचे आसन (चौकी) के दाहिनी ओर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान श्री गणेश और माता महालक्ष्मी की प्रतिमाएँ स्थापित करें। चौकी के बाईं ओर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर नवग्रहों की स्थापना करें तथा लाल वस्त्र पर गेहूँ या आटे से सोलह टीले (मातृकाओं के प्रतीक) बनाएँ।
- चोपड़ा पूजन (बही-खाता पूजन): गुजराती व्यापारी समुदाय सहित देशभर के व्यवसायी दीपावली की रात्रि को शुभ मुहूर्त में चोपड़ा पूजन करते हैं। इसमें माता लक्ष्मी और सरस्वती के समक्ष नए बही-खातों पर केसर-रोली से स्वस्तिक व 'शुभ-लाभ' अंकित कर आगामी वर्ष में व्यापारिक समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
पूजा की संपूर्ण चरणबद्ध जानकारी के लिए हमारी विशेष मार्गदर्शिका दीपावली पूजन विधि तथा सिद्ध लक्ष्मी पूजा मंत्र अवश्य देखें।
📿 सिद्ध लक्ष्मी बीज मंत्र एवं ध्यान मंत्र
लक्ष्मी पूजन के समय कमलगट्टे या स्फटिक की माला से माता महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है:
1. लक्ष्मी बीज मंत्र:
॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः ॥
(Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah)
2. महालक्ष्मी महामंत्र:
॥ ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
(Om Shreeng Mahalaxmaye Namah)
3. लक्ष्मी ध्यान एवं प्रार्थना मंत्र:
॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः ॥
भावार्थ: परमात्मा स्वरूपा, माया एवं शक्ति स्वरूपा तथा ऐश्वर्य और समृद्धि प्रदान करने वाली भगवती महालक्ष्मी को हमारा बारंबार प्रणाम है।
🎥 वीडियो में देखें: दीपावली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त 2026
दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त और महत्त्वपूर्ण जानकारी को संक्षेप में समझने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें:
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🌏 दीपावली की परंपराएँ, क्षेत्रीय विविधता और सर्वधर्म समभाव
दीपावली का पर्व भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का अद्भुत संगम है:
- पारिवारिक मिलन व उत्साह: इस अवसर पर लोग नए वस्त्र और आभूषण पहनते हैं, घरों को मिट्टी के दीपों व रंगोली से सजाते हैं तथा परिवार व मित्रों के साथ मिठाइयाँ, सूखे मेवे और उपहार साझा करते हैं।
- क्षेत्रीय विविधता: उत्तर और पश्चिम भारत में जहाँ लक्ष्मी-गणेश पूजन और दीपोत्सव की प्रधानता होती है, वहीं दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में नरक चतुर्दशी को मुख्य पर्व के रूप में मनाया जाता है। पूर्वी भारत और कोलकाता में इस रात्रि को महाकाली की भव्य आराधना की जाती है। इसके अतिरिक्त वाराणसी की देव दीपावली और दक्षिण का कार्तिगाई दीपम भी इसी प्रकाश परंपरा के विस्तार हैं।
- अन्य धर्मों में महत्त्व: सनातन धर्म के साथ-साथ जैन और सिख समुदाय में भी इस दिन का गहरा ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्त्व है। जैन धर्म में यह दिन 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष (निर्वाण) दिवस के रूप में मनाया जाता है, जबकि सिख समुदाय इसे छठे गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी की रिहाई के उपलक्ष्य में 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाता है।
- सार्वजनिक जीवन एवं मुहूर्त ट्रेडिंग: भारत में दीपावली राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) होता है। यद्यपि सरकारी कार्यालय, स्कूल और शेयर बाजार सामान्य कामकाज के लिए बंद रहते हैं, तथापि भारतीय शेयर बाजारों (BSE/NSE) में सायंकाल एक घंटे के लिए विशेष 'मुहूर्त ट्रेडिंग' (Muhurat Trading) का आयोजन किया जाता है, जिसे निवेशक पूरे वर्ष के लिए अत्यंत शुभ मानते हैं।
🙏 निष्कर्ष एवं मंगल कामना
दीपावली केवल बाहरी दीप जलाने का ही नहीं, बल्कि अंतर्मन के अज्ञान और अहंकार रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान, करुणा और सकारात्मकता का आलोक फैलाने का महापर्व है। इस वर्ष 08 नवम्बर 2026 (रविवार) को प्रदोष काल एवं वृषभ लग्न के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से भगवान श्री गणेश और माता महालक्ष्मी का पूजन करें।
🪔 आप सभी पाठकों एवं भक्तजनों को दीपावली 2026 की पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ! माता महालक्ष्मी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे। 🚩
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