🪔 नमस्कार मित्रों! सनातन धर्म के अत्यंत पावन और प्रकाशमय महापर्व दीपावली 2026 की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
क्या आप जानते हैं कि वर्ष 2026 में दीपावली कब मनाई जाएगी? धनतेरस किस तारीख को है? नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन एक ही दिन पड़ रहे हैं या अलग-अलग दिन? गोवर्धन पूजा और गुजराती नववर्ष कब मनाया जाएगा? यदि आप भी इन सभी सवालों के सटीक और शास्त्रीय उत्तर जानना चाहते हैं, तो यह लेख और वीडियो आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
🎥 वीडियो में देखें: दीपावली 2026 संपूर्ण पूजा कैलेंडर एवं शुभ मुहूर्त
दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि प्रकाश, सुख-समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक आनंद से जुड़ा पावन उत्सव है। भारत के अलग-अलग राज्यों में इस महापर्व को विभिन्न परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। कहीं गोवत्स द्वादशी से उत्सव प्रारंभ होता है, तो कहीं धनतेरस से। वहीं गुजरात में दीपावली का यह उत्सव लाभ पंचमी तक विशेष रूप से मनाया जाता है।
आइए जानते हैं दीपावली 2026 के सात प्रमुख दिनों की तिथियां, उनका धार्मिक महत्व और महालक्ष्मी पूजन का सटीक शुभ मुहूर्त।
📅 दीपावली 2026 पर्व कैलेंडर: एक नज़र में
| दिन | दिनांक एवं वार | प्रमुख पर्व / त्योहार |
|---|---|---|
| दिन 1 | 05 नवम्बर 2026, गुरुवार | गोवत्स द्वादशी एवं वसुबारस (बछ बारस) |
| दिन 2 | 06 नवम्बर 2026, शुक्रवार | धनतेरस, धनत्रयोदशी एवं धन्वंतरि जयंती |
| दिन 3 | 07 नवम्बर 2026, शनिवार | काली चौदस एवं हनुमान पूजा |
| दिन 4 | 08 नवम्बर 2026, रविवार | नरक चतुर्दशी एवं मुख्य दीपावली (महालक्ष्मी पूजन) |
| दिन 5 | 09 नवम्बर 2026, सोमवार | सोमवती अमावस्या स्नान एवं गोवर्धन पूजा |
| दिन 6 | 10 नवम्बर 2026, मंगलवार | गुजराती नववर्ष (बेस्तु वरस) एवं द्यूत क्रीड़ा |
| दिन 7 | 11 नवम्बर 2026, बुधवार | भाई दूज (यम द्वितीया) एवं चित्रगुप्त पूजा |
| विशेष पर्व | 14 नवम्बर 2026, शनिवार | लाभ पंचमी (सौभाग्य पंचमी / लाभ पांचम) |
🪔 दीपावली पूजा कैलेंडर 2026: संपूर्ण विवरण
🪔 दिन 1 – 05 नवम्बर 2026, गुरुवार (गोवत्स द्वादशी एवं वसुबारस)
दीपावली उत्सव की शुरुआत 5 नवम्बर, गुरुवार को गोवत्स द्वादशी के पावन पर्व से होगी। इसे महाराष्ट्र और गुजरात में वसुबारस तथा उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में बछ बारस के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन गाय और बछड़े का विशेष पूजन किया जाता है। सनातन धर्म में गौ माता को अत्यंत पूजनीय और समस्त देवी-देवताओं का स्वरूप माना गया है। इस पर्व पर गौ माता की पूजा और सेवा के साथ परिवार की सुख-समृद्धि एवं संतान के मंगल की कामना की जाती है।
🪔 दिन 2 – 06 नवम्बर 2026, शुक्रवार (धनतेरस, धनत्रयोदशी एवं धन्वंतरि जयंती)
दीपावली उत्सव का दूसरा अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व धनतेरस 6 नवम्बर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसे धनत्रयोदशी, धन्वंतरि त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद एवं आरोग्य का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है। धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएँ खरीदने की परंपरा है। साथ ही संध्या के समय अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है, जिसे 'यम दीपम' कहते हैं। इस दिन परिवार के उत्तम आरोग्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करनी चाहिए।
🪔 दिन 3 – 07 नवम्बर 2026, शनिवार (काली चौदस एवं हनुमान पूजा)
दीपावली उत्सव का तीसरा प्रमुख दिन 7 नवम्बर, शनिवार को काली चौदस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन विशेष रूप से माँ काली की उपासना तथा संकटमोचन हनुमान जी की पूजा का विधान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ काली की आराधना करने से जीवन के भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। वहीं, हनुमान जी की पूजा से भक्तों को बल, साहस, सुरक्षा और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। इस दिन श्रद्धालु अपनी क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार रात्रि दीपदान और हनुमान जी की विशेष आराधना करते हैं।
🪔 दिन 4 – 08 नवम्बर 2026, रविवार (नरक चतुर्दशी एवं मुख्य दीपावली – महालक्ष्मी पूजन)
अब बात करते हैं दीपावली के सबसे महत्वपूर्ण दिन की। वर्ष 2026 में मुख्य दीपावली और महालक्ष्मी पूजन का पावन पर्व 8 नवम्बर, रविवार को मनाया जाएगा।
इसी दिन प्रातः काल नरक चतुर्दशी, छोटी दीपावली, रूप चतुर्दशी और तमिल दीपावली मनाई जाएगी, तथा संध्या काल में मुख्य दीपावली, महालक्ष्मी-गणेश पूजन, शारदा पूजा, चोपड़ा पूजन, केदार गौरी व्रत और बंगाल की प्रसिद्ध काली पूजा संपन्न होगी।
📜 अमावस्या तिथि और लक्ष्मी पूजन का शास्त्रीय नियम:
शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, दीपावली पर माता महालक्ष्मी की पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। उज्जैन के द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या 8 नवम्बर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगी और 9 नवम्बर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। चूंकि 8 नवम्बर की संध्या और रात्रि में अमावस्या तिथि व्याप्त है, इसी कारण 8 नवम्बर, रविवार को ही मुख्य महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
🕉️ उज्जैन मानक समय के अनुसार महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त:
- प्रदोष काल का समय: शाम 5 बजकर 45 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।
- वृषभ स्थिर लग्न और महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 6 बजकर 9 मिनट से रात 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।
स्थिर लग्न में किया गया पूजन घर व व्यापार में स्थायी लक्ष्मी का वास कराता है, इसलिए यह समय माता लक्ष्मी, भगवान गणेश एवं माता सरस्वती के पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं तथा व्यापारी वर्ग में चोपड़ा पूजन और नए बही-खातों की पूजा की जाती है।
🪔 दिन 5 – 09 नवम्बर 2026, सोमवार (सोमवती अमावस्या स्नान एवं गोवर्धन पूजा)
दीपावली कैलेंडर का पांचवां दिन 9 नवम्बर, सोमवार को है। इस दिन सूर्योदय काल में अमावस्या तिथि होने से सोमवती अमावस्या का पुण्यकारी दीपावली स्नान-दान और देवपूजन किया जाएगा।
साथ ही, दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ होने के कारण, उज्जैन के द्रिक पंचांग के सात-दिवसीय कैलेंडर में गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा का पर्व भी इसी दिन दर्शाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की पावन कथा इस पर्व से जुड़ी है। इस दिन गौ माता के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा की जाती है तथा भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट के रूप में छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं। गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, गौ वंश और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है।
🪔 दिन 6 – 10 नवम्बर 2026, मंगलवार (गुजराती नववर्ष – बेस्तु वरस एवं द्यूत क्रीड़ा)
10 नवम्बर, मंगलवार को उदयव्यापिनी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर गुजराती नववर्ष मनाया जाएगा। गुजरात में इसे 'बेस्तु वरस' या 'नूतन वर्ष' के नाम से जाना जाता है। यह नया वर्ष विक्रम संवत 2083 के पावन शुभारंभ से जुड़ा है।
इस दिन लोग मंदिरों में देव-दर्शन कर अपने परिवार, मित्रों और परिचितों को नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ देते हैं। घरों और प्रतिष्ठानों में सुख, शांति और व्यापारिक उन्नति की मंगल कामना की जाती है। व्यापारी वर्ग के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन पुराने बही-खातों का समापन और नए व्यापारिक संकल्पों की शुरुआत होती है। द्रिक पंचांग में इस दिन पौराणिक परंपरा के अनुसार 'द्यूत क्रीड़ा' का भी उल्लेख मिलता है।
🪔 दिन 7 – 11 नवम्बर 2026, बुधवार (भाई दूज – यम द्वितीया एवं चित्रगुप्त पूजा)
दीपावली उत्सव का सातवाँ प्रमुख दिन 11 नवम्बर, बुधवार को भाई दूज के रूप में मनाया जाएगा। इसे भैया दूज, भाऊ बीज और यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की मंगल कामना करती हैं, तथा भाई अपनी बहनों को उपहार देकर प्रेम और सम्मान प्रकट करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान यमराज अपनी बहन यमुना जी के घर गए थे, जिस कारण इस पर्व का नाम 'यम द्वितीया' पड़ा। इसी पावन दिन कायस्थ समाज और व्यापार जगत में कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता भगवान चित्रगुप्त जी और कलम-दवात की विशेष पूजा की जाती है।
⭐ विशेष पर्व – 14 नवम्बर 2026, शनिवार (लाभ पंचमी – सौभाग्य पंचमी एवं लाभ पांचम)
दीपावली के इस विस्तारित उत्सव में एक और अत्यंत शुभ पर्व आता है, जिसे लाभ पंचमी कहा जाता है। वर्ष 2026 में लाभ पंचमी 14 नवम्बर, शनिवार को मनाई जाएगी। इसे सौभाग्य पंचमी, ज्ञान पंचमी और गुजरात में 'लाभ पांचम' के नाम से जाना जाता है।
गुजरात के व्यापारिक समाज में इस दिन का विशेष महत्व है। दीपावली के अवकाश के बाद व्यापारी वर्ग इसी शुभ दिन अपने प्रतिष्ठानों को पुनः खोलकर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करता है तथा नए बही-खातों में कार्य प्रारंभ करता है। मान्यता है कि इस दिन शुभ कार्यों की शुरुआत करने से जीवन और व्यापार में वर्ष भर लाभ, सौभाग्य एवं समृद्धि बनी रहती है।
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