02 April 2020

कामदा एकादशी कब है 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Kamada Ekadashi 2020 Kamda Ekadashi Vrat

कामदा एकादशी कब है 2020 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Kamada Ekadashi 2020 #EkadashiVrat

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वैदिक विधान कहता हैं कि, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का भिन्न भिन्न महत्व होता हैं तथा प्रत्येक एकादशीयों की एक पौराणिक कथा भी होती हैं। एकादशियों को वास्तव में मोक्षदायिनी माना गया हैं। भगवान श्रीविष्णु जी को एकादशी तिथि अति प्रिय मानी गई हैं चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुकल पक्ष की। इसी कारण एकादशी के दिन व्रत करने वाले प्रत्येक भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा-दृष्टि सदा बनी रहती हैं, अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान श्रीविष्णु जी की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं, साथ ही रात्री जागरण भी करते हैं। किन्तु इन प्रत्येक एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी हैं जिस एकादशी का व्रत जातक की प्रत्येक कामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता हैं। अतः चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के रूप में जाना जाता हैं। यह एकादशी प्रत्येक प्रकार के कष्टों का निवारण करने वाली तथा मनोवांछित फल प्रदान करने वाली होने के कारण ही कामदा कही जाती हैं। इसका शाब्दिक अर्थ भी हैं काम तथा दा अर्थात प्रत्येक प्रकार के कामनाओ को पूर्ण करने वाला व्रत। कामदा एकादशी अत्यंत शीघ्र फलदायी होने कारण ही इस एकादशी को फलदा एकादशी भी कहा जाता हैं, चैत्र नवरात्रि तथा राम नवमी के पश्चात हिन्दू नववर्ष की यह प्रथम एकादशी हैं। हिन्दु धर्म में ब्राह्महत्या करना सबसे भयंकर पाप माना गया हैं। किन्तु, पौराणिक विधान हैं कि, ब्राह्महत्या का पाप भी कामदा एकादशी का व्रत करने से नष्ट किया जा सकता हैं। इस व्रत में भगवान श्री विष्णु जी की पूजा अर्चना की जाती हैं। इस व्रत को भगवान् जी का उत्तम व्रत कहा गया हैं। कामदा एकादशी के फलों के विषय में कहा जाता हैं कि, यह एकादशी सर्व पाप विमोचिनी हैं। कामदा एकादशी के प्रभाव से पापों का शमन होता हैं तथा संतान की प्राप्ति भी संभव हो जाती हैं। इस व्रत को करने से परलोक में स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। जिस प्रकार से अग्नि लकड़ी को जला देती हैं उसी प्रकार से इस व्रत को करने से मनुष्य के प्रत्येक पापों का नाश हो जाता हैं तथा संतान सुख के साथ-साथ अन्य प्रकार के पुण्य की भी प्राप्ति होती हैं। मनुष्य को इस व्रत के करने से वैकुंठ की प्राप्ति संभव हो जाती हैं। यह भी कहा गया हैं कि कामदा एकादशी पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली हैं। मान्यता यह भी हैं कि, कामदा एकादशी का व्रत रखने व्रती को प्रेत योनि से भी मुक्ति प्राप्त हो सकती हैं। इस व्रत में नमक खाना वर्जित माना जाता हैं। कामदा एकादशी हिंदू संवत्सर की प्रथम एकादशी होती हैं। अतः इसका महत्व अधिक बढ़ जाता हैं।


कामदा एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ती करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण ना किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिवस सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता हैं।

ध्यान रहे,
१- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।
२- यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।
३- द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।
४- एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
५- व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।
६- व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
७- जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की प्रथम एक चौथाई अवधि होती हैं।
८- यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।


इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 03 अप्रैल, शुक्रवार की मध्यरात्रि 12 बजकर 57 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 04 अप्रैल, शनिवार की रात्रि 10 बजकर 29 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2020 में कामदा एकादशी का व्रत 04 अप्रैल, शनिवार के दिन किया जाएगा।

इस वर्ष, कामदा एकादशी व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 05 अप्रैल, रविवार की प्रातः 06 बजकर 21 मिनिट से 08 बजकर 46 मिनिट तक का रहेगा।
द्वादशी समाप्त होने का समय – 19:24
  

कामदा एकादशी का व्रत कब किया जाता हैं?

चैत्र नवरात्रि तथा राम नवमी के पश्चात यह प्रथम एकादशी हैं। अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार वर्तमान में यह मार्च या अप्रैल के महीने में आती हैं।
सनातन हिन्दू पंचाङ्ग के अनुसार कामदा एकादशी का व्रत सम्पूर्ण उत्तरी भारत-वर्ष में पूर्णिमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष के एकादशी के दिन किया जाता हैं। साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिणी भारत में अमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन आता हैं। वहीं, अङ्ग्रेज़ी कलेंडर के अनुसार यह व्रत मार्च या अप्रैल के महीने में आता हैं।

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