Showing posts with label date and time. Show all posts
Showing posts with label date and time. Show all posts

23 May 2021

रोहिणी नक्षत्र व्रत कब है 2021 लिस्ट | Rohini Nakshatra Vrat kab hai 2021 Dates List | Jain Calendar Festivals

रोहिणी नक्षत्र व्रत कब है 2021 लिस्ट | Rohini Nakshatra Vrat kab hai 2021 Dates List | Jain Calendar Festivals
 
rohini vrat 2021 dates list
Rohini Nakshatra Vrat


॥ ॐ ह्रीं श्रीवासुपूज्य जिनेन्द्राय नम: ॥

 

रोहिणी व्रत

रोहिणी व्रत जैन समुदाय का एक महत्वपूर्ण दिन है। रोहिणी व्रत का पालन मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है। नक्षत्र रोहिणी, हिन्दु एवं जैन कैलेण्डर में वर्णित, सत्ताईस नक्षत्रों में से एक है।
जिस दिन सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र पड़ता है, उस दिन यह व्रत किया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि जो भी रोहिणी व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, वह सभी प्रकार के दुखों एवं दरिद्रता से मुक्त हो जाते हैं। इस व्रत का पारण रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने पर मार्गशीर्ष नक्षत्र में किया जाता है।
प्रत्येक वर्ष में बारह रोहिणी व्रत होते हैं। आमतौर पर रोहिणी व्रत का पालन तीन, पाँच या सात वर्षों तक लगातार किया जाता है। रोहिणी व्रत की उचित अवधि पाँच वर्ष, पाँच महीने है। उद्यापन के द्वारा ही इस व्रत का समापन किया जाना चाहिए।
 

रोहिणी उपवास 2021

विक्रम सम्वत 2077 - 2078
 
24 जनवरी 2021
रविवार
रोहिणी व्रत
 
20 फरवरी 2021
शनिवार
रोहिणी व्रत
 
20 मार्च 2021
शनिवार
रोहिणी व्रत
 
16 अप्रैल 2021
शुक्रवार
रोहिणी व्रत
 
13 मई 2021
गुरुवार
रोहिणी व्रत
 
10 जून 2021
गुरुवार
रोहिणी व्रत
 
07 जुलाई 2021
बुधवार
रोहिणी व्रत
 
03 अगस्त 2021
मंगलवार
रोहिणी व्रत
 
31 अगस्त 2021
मंगलवार
रोहिणी व्रत
 
27 सितम्बर 2021
सोमवार
रोहिणी व्रत
 
24 अक्तूबर 2021
रविवार
रोहिणी व्रत
 
20 नवम्बर 2021
शनिवार
रोहिणी व्रत
 
18 दिसम्बर 2021
शनिवार
रोहिणी व्रत
 
 
 
Om Shri Srivasupujya Jinendraya Namah
 

Rohini fast

Rohini Vrat is an important day for the Jain community. The Rohini Vrat is mainly observed by women for the longevity of their husbands. Nakshatra Rohini is one of the twenty-seven Nakshatras mentioned in the Hindu and Jain calendar.
On the day Rohini Nakshatra falls after sunrise, this fast is observed. It is believed that whoever follows the Rohini fast devotedly, gets rid of all kinds of sorrows and impoverishment. This fast is observed in Margashirsha Nakshatra at the end of Rohini Nakshatra.
There are twelve Rohini fasts in each year. The Rohini Vrat is generally observed continuously for three, five or seven years. The proper duration of Rohini fast is five years, five months. This fast should be concluded by Udipana.
 

Rohini fasting 2021

Vikram Samvat 2077 - 2078
 
24 January 2021
Sunday
Rohini fast
 
20 February 2021
Saturday
Rohini fast
 
20 March 2021
Saturday
Rohini fast
 
16 April 2021
Friday
Rohini fast
 
13 May 2021
Thursday
Rohini fast
 
10 June 2021
Thursday
Rohini fast
 
07 July 2021
Wednesday
Rohini fast
 
03 August 2021
Tuesday
Rohini fast
 
31 August 2021
Tuesday
Rohini fast
 
27 September 2021
Monday
Rohini fast
 
24 October 2021
Sunday
Rohini fast
 
20 November 2021
Saturday
Rohini fast
 
18 December 2021
Saturday
Rohini fast

24 January 2020

रोहिणी व्रत कब है 2020 लिस्ट | Rohini Vrat kab hai 2020 Dates List | Jain Calendar Festivals

रोहिणी व्रत कब है 2020 लिस्ट | Rohini Vrat kab hai 2020 Dates List | Jain Calendar Festivals

rohini vrat 2020 dates list
rohini vrat dates list
॥ ॐ ह्रीं श्रीवासुपूज्य जिनेन्द्राय नम: ॥

रोहिणी व्रत
रोहिणी व्रत जैन समुदाय का एक महत्वपूर्ण दिन है। रोहिणी व्रत का पालन मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु के लिए किया जाता है। नक्षत्र रोहिणी, हिन्दु एवं जैन कैलेण्डर में वर्णित, सत्ताईस नक्षत्रों में से एक है।
जिस दिन सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र पड़ता है, उस दिन यह व्रत किया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि जो भी रोहिणी व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, वह सभी प्रकार के दुखों एवं दरिद्रता से मुक्त हो जाते हैं। इस व्रत का पारण रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने पर मार्गशीर्ष नक्षत्र में किया जाता है।
प्रत्येक वर्ष में बारह रोहिणी व्रत होते हैं। आमतौर पर रोहिणी व्रत का पालन तीन, पाँच या सात वर्षों तक लगातार किया जाता है। रोहिणी व्रत की उचित अवधि पाँच वर्ष, पाँच महीने है। उद्यापन के द्वारा ही इस व्रत का समापन किया जाना चाहिए।

2020 रोहिणी उपवास

08 जनवरी 2020
बुधवार
रोहिणी व्रत

04 फरवरी 2020
मंगलवार
रोहिणी व्रत

03 मार्च 2020
मंगलवार
रोहिणी व्रत

30 मार्च 2020
सोमवार
रोहिणी व्रत

26 अप्रैल 2020
रविवार
रोहिणी व्रत

23 मई 2020
शनिवार
रोहिणी व्रत

20 जून 2020
शनिवार
रोहिणी व्रत

17 जुलाई 2020
शुक्रवार
रोहिणी व्रत

13 अगस्त 2020
बृहस्पतिवार
रोहिणी व्रत

10 सितम्बर 2020
बृहस्पतिवार
रोहिणी व्रत

07 अक्तूबर 2020
बुधवार
रोहिणी व्रत

03 नवम्बर 2020
मंगलवार
रोहिणी व्रत

30 नवम्बर 2020
सोमवार
रोहिणी व्रत

28 दिसम्बर 2020
सोमवार
रोहिणी व्रत

16 July 2019

चन्द्र ग्रहण 2019 | खग्रास चन्द्र ग्रहण सूतक समय | चन्द्र ग्रहण कब लगेगा | Chandra Grahan 2019 | Lunar Eclipse

चन्द्र ग्रहण 2019 | खग्रास चन्द्र ग्रहण सूतक समय | चन्द्र ग्रहण कब लगेगा | Chandra Grahan 2019 | Lunar Eclipse

chandra grahan in india
chandra grahan july 2019 in india

ग्रहण के समय इस मंत्र का जाप करें

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै



सनातन हिन्दु धर्म के अनुसार चन्द्रग्रहण एक धार्मिक घटना हैं जिसका धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व हैं। जो चन्द्रग्रहण खुली आँखों से स्पष्ट दृष्टिगत न हो तो उस चन्द्रग्रहण का धार्मिक महत्व नहीं होता हैं। केवल प्रच्छाया वाले चन्द्रग्रहण, जो कि नग्न आँखों से दृष्टिगत होते हैं, ऐसे चंद्रग्रहण धार्मिक कर्मकाण्ड हेतु विचारणीय होते हैं।
ज्योतिष तथा खगोलीय शास्त्र में किसी भी ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता हैं। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन तथा सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन होता हैं। ज्योतिष शास्त्रियों तथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण तब होता हैं जब राहु तथा केतु सूर्य एवं चन्द्रमा का ग्रास करते हैं। स्कन्द पुराण के अवन्ति खंड के अनुसार उज्जैन राहु तथा केतु की जन्म भूमि हैं, अर्थात सूर्य तथा चन्द्रमा को ग्रसित करने वाले यह दोनों छाया ग्रह उज्जैन में ही जन्मे थे।
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का विशेष पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई अर्थात मंगलवार के दिवस मनाई जाएगी। भारतीय संस्कृति में गुरु को देवता तुल्य माना गया हैं। वहीं, 16 जुलाई अर्थात मंगलवार की मध्यरात्रि को चंद्र ग्रहण रहेगा। अतः चंद्र ग्रहण के नौ घंटे पूर्व 16 जुलाई से ही सूतक प्रारम्भ होने के कारण साँय 4:30 बजे से मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। अतः गुरु पूर्णिमा का पर्व साँय 4:30 बजे से पूर्व मना लेना चाहिये।

कृपया ध्यान दें-
chandra grahan in india
chandra grahan
जब चन्द्र ग्रहण मध्यरात्रि अर्थात 12 बजे से पूर्व लग जाता हैं किन्तु मध्यरात्रि के पश्चात समाप्त होता हैं अर्थात जब चन्द्र ग्रहण अंग्रेजी कैलेण्डर में दो दिनों का अधिव्यापन करता हैं, तो जिस दिन चन्द्रग्रहण अधिकतम रहता हैं उस दिन की दिनांक चन्द्रग्रहण हेतु दर्शायी जाती हैं। ऐसी स्थिति में चन्द्रग्रहण की उपच्छाया तथा प्रच्छाया का स्पर्श पिछले दिवस अर्थात मध्यरात्रि से पूर्व हो सकता हैं।
चन्द्रग्रहण आपके नगर में दर्शनीय नहीं हो किन्तु दूसरे देशों अथवा शहरों में दर्शनीय हो तो कोई भी ग्रहण से सम्बन्धित कर्मकाण्ड नहीं किया जाता हैं। किन्तु यदि मौसम के कारण चन्द्रग्रहण दर्शनीय न हो तो ऐसी स्थिति में चन्द्रग्रहण के सूतक का अनुसरण किया जाता हैं तथा ग्रहण से सम्बन्धित सभी सावधानियों का पालन किया जाता हैं।

खग्रास चन्द्र ग्रहण विवरण
इस वर्ष 16 जुलाई 2019 के दिवस आषाढ़ पूर्णिमा का चन्द्र ग्रहण हैं।
जो कि सम्पूर्ण भारत में खग्रास के रूप में दिखाई देगा।
यह आंशिक चन्द्र ग्रहण अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका, हिन्द महासागर, प्रशान्त महासागर, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका, एशिया तथा यूरोप के अधिकांश देश तथा उत्तरी अमेरिका के कुछ पूर्वी हिस्सों से दर्शनीय होगा।
यह आंशिक चन्द्र ग्रहण वर्ष 2019 में द्वितीय चन्द्र ग्रहण होगा।
यह 0.65 परिमाण का आंशिक ग्रहण हैं, अतः अधिकतम ग्रहण के दौरान चन्द्रमा का लगभग आधा भाग पृथ्वी की उपच्छाया से छिप जायेगा।
उपच्छाया के अन्दर चन्द्रमा का हिस्सा केवल पृथ्वी के वायुमण्डल के माध्यम से अपवर्तित सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होगा।
आंशिक चन्द्र ग्रहण भारत, पाकिस्तान, नेपाल, मॉरीशस तथा सिंगापुर से दिखाई देगा।
अधिकांश उत्तरी अमेरिका तथा ग्रीनलैंड से कोई भी ग्रहण दिखाई नहीं देगा।


ग्रहण का स्थानीय सूतक, स्पर्श, मोक्ष आदि के समय इस प्रकार हैं

सूतक प्रारम्भ 16:32 दोपहर सभी हेतु
सूतक प्रारम्भ 20:32 रात्रि केवल बच्चों, गर्भवती स्त्री, अस्वस्थ तथा अशक्त व्यक्ति तथा वृद्धजनों हेतु
ग्रहण स्पर्श 01:32 मध्यरात्रि
परमग्रास ग्रहण मध्य 03:01 रात्रि
प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श 04:29
ग्रहण मोक्ष 04:30 रात्रि
उपच्छाया से प्रथम स्पर्श - 12:15 मध्यरात्रि
ग्रहणकाल की अवधि 2 घण्टे 58 मिनट
उपच्छाया की अवधि 05 घण्टे 33 मिनट
चन्द्र ग्रहण का परिमाण - 0.65
उपच्छाया चन्द्र ग्रहण का परिमाण 1.70
सूतक समाप्त - 04:30 सभी हेतु

यह चंद्रग्रहण प्रत्येक राशि के जातकों को इस प्रकार फल प्रदान करेगा।

मेष - मिश्र            वृष    - अशुभ
मिथुन - मिश्र        कर्क - शुभ
सिंह - मिश्र          कन्या - अशुभ
तुला - शुभ          वृश्चिक - मिश्र
धनु - अशुभ         मकर - अशुभ
कुंभ - शुभ           मीन - शुभ