24 April 2020

भगवान परशुराम जयंती कब हैं 2020। परशुराम जयंती 2020 में कब हैं। Parshuram jayanti kab ki hai। 2020 Parshuram jayanti। शुभ मुहूर्त

भगवान परशुराम जयंती कब हैं 2020। परशुराम जयंती 2020 में कब हैं। Parshuram jayanti kab ki hai। 2020 Parshuram jayanti। शुभ मुहूर्त #ParshuRamJayanti

 parshu ram jayanti kab ki hai 2020
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भगवान विष्णु जी के छठे अवतार की जयंती परशुराम जयंती के रूप में मनाई जाती हैं। यह पर्व वैशाख के मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया के शुभ दिवस आता हैं। यह माना जाता हैं कि परशुराम का जन्म प्रदोष काल के समय हुआ था। अतः जिस दिन प्रदोष काल के समय तृतीया आती हैं, उसे परशुराम जयंती समारोह के लिए उपर्युक्त माना जाता हैं। जिस दिन परशुरामजी अवतरित हुए थे उस दिन को परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता हैं। साथ ही, यह शुभ दिवस देश के अधिकांश प्रदेशों में अक्षय तृतीया के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। जैसे राम भगवान विष्णु के अवतार थे उसी प्रकार परशुराम भी विष्णु के अवतार थे अतः परशुराम को विष्णु तथा राम जी के समान शक्तिशाली माना जाता हैं। भगवान विष्णु जी के छठे अवतार का उद्देश्य पापी, विनाशकारी तथा अधार्मिक राजाओं का वध कर के पृथ्वी को भार मुक्त करना था। इस प्रकार, भगवान परशुराम जी ने क्रूर क्षत्रियों के अत्याचारों के विनाश हेतु पृथ्वी पर जन्म लिया था।
परशुराम दो शब्दों को जोड़ कर बना हैं, परशुराम अर्थात कुल्हाड़ी तथा राम इन दो शब्दों को मिलने पर कुल्हाड़ी के साथ राम अर्थ निकलता हैं।
परशुराम के अनेक नाम हैं जैसे- रामभद्र ,भार्गव ,भृगुपति (ऋषिभृगु के वंशज), जमदग्न्य (जमदग्नि के पुत्र) के नाम से जाना जाता हैं।
अन्य सभी अवतारों के विपरीत हिंदू मान्यता के अनुसार, परशुराम अभी भी पृथ्वी पर जीवित हैं। अतः श्रीराम तथा कृष्ण भगवान के विपरीत, परशुरामजी की पूजा किसी-किसी स्थान पर नहीं की जाती हैं। किन्तु, दक्षिण भारत में, उडुपी के समीप पवित्र स्थान पजाका में, एक प्रमुख मंदिर हैं, जहां परशुराम की पूजा पूर्ण श्रद्धा से की जाती हैं। भारत के पश्चिमी तट पर कई मंदिर हैं जो भगवान परशुराम को समर्पित हैं। कोंकण तथा चिप्लून के परशुराम जी के मंदिरों में परशुराम-जयंती अत्यंत धूमधाम से मनायी जाते हैं।
कल्कि पुराण में कहा गया हैं कि भगवान विष्णु के 10 वें तथा अंतिम अवतार श्री कल्कि के गुरु परशुरामजी होंगे। यह प्रथम समय नहीं हैं कि, भगवान विष्णु के छठे अवतार एक अन्य अवतार से मिलेंगे। रामायण के अनुसार, परशुराम सीता तथा भगवान राम के स्वयंवर समारोह में आए तथा भगवान विष्णु के 7 वें अवतार से मिले।

इस वर्ष, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 25 अप्रैल, शनिवार की दोपहर 11 बजकर 51 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 26 अप्रैल, रविवार की दोपहर 01 बजकर 22 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

इस वर्ष, 2020 में भगवान परशुराम जयंती का पर्व या परशुराम जन्मोत्सव 25 अप्रैल, शनिवार के दिन मनाया जाएगा।

इस वर्ष, भगवान परशुराम जयंती के शुभ दिवस पर भगवान परशुराम जी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त, 25 अप्रैल, शनिवार की प्रातः 07 बजकर 36 मिनिट से 09 बजकर 10 मिनिट तक का रहेगा।

परशुराम जयंती के अन्य महत्वपूर्ण समय इस प्रकार हैं-
25 अप्रैल 2020, शनिवार
अभिजित मुहूर्त:- 11:59 से 12:51
राहुकाल:- 09:11 से 10:48
सूर्योदय:- 05:58 सूर्यास्त:- 19:24
चन्द्रोदय:- 06:52 चन्द्रास्त:- 20:54

       

भगवान परशुराम जयंती पूजा सामग्री

भगवान परशुराम जी की मूर्ति या प्रतिमा, चौकी या लकड़ी का पटरा, धूपबत्ती, शुद्ध घी का दीपक, नैवेद्य, अखंडित अक्षत, चंदन, वस्त्र, कपूर, पुष्प, पुष्पमाला, शुद्ध जल से भरा एक लोटा आदि Parshuram Jayanti Puja सामग्री हैं।

भगवान परशुराम जयंती पूजा विधि

parshu ram
परशुराम जयंती के दिन साधक को प्रातः काल उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उसके बाद पूजा स्थल को शुद्ध कर ले। उसके बाद उत्तर या पूर्व मुखी होकर आसन पर बैठ जाये। फिर चौकी या लकड़ी के पटरे पर श्री परशुराम जी की प्रतिमा या मूर्ति को स्थापित करें। अब हाथ में अक्षत, जल, एक सिक्का तथा पुष्प लेकर नीचे बताये गए निम्न मंत्र के द्वारा परशुराम जयंती पूजा व्रत का संकल्प करें :

मम ब्रह्मत्व प्राप्तिकामनया परशुराम पूजनमहं करिष्ये

इसके बाद हाथ के सिक्का, पुष्प तथा अक्षत को श्री परशुराम जी के चरणों में अर्पित कर दें। उसके बाद षोडशोपचार विधि से पूजन करके नैवेद्य अर्पित करें। तथा फिर धुपबत्ती तथा शुद्ध घी का दीपक जलाये तथा निम्न परशुराम जयंती पुजा मंत्र के द्वारा श्री परशुराम जी को अर्घ्य अर्पित करें
जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो।
गृहाणार्घ्य मया दत्तं कृपया परमेश्वर ॥

उसके बाद आप बताये गए मंत्र की एक माला का जाप भी करें।
भगवान परशुराम जयंती पूजा मंत्र
ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम:।।

उसके बाद श्री परशुराम जी की कथा सुने तथा चालीसा तथा आरती करें।

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