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21 March 2020

चैत्र नवरात्र कब से चालू है 2020 Chaitra Navratri kab se Start hai 2020 में नवरात्रि कितनी तारीख को है

चैत्र नवरात्र कब से चालू है 2020 Chaitra Navratri kab se Start hai 2020 में नवरात्रि कितनी तारीख को है #Navratri

chaitra navratri kab se start hai
Chaitra Navratri
मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे।

जय माता दी
जय श्री कालका माँ

इस विडियो मे हम आपको बताएँगे-
१-  चैत्र नवरात्रि कब से प्रारम्भ हैं?
२-  चैत्र नवरात्रि के महत्वपूर्ण मुहूर्त
३-  चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त
४-  नौ देवियो की पूजा नौ तिथि के अनुसार
५-  नौ दिवस के नौ भोग (प्रसाद)
६-  नौ दिनों के लिए नौ शुभ रंग
७-  चैत्र नवरात्री का महत्व
८-  नवरात्रि के कुछ विशेष नियम

नवरात्र हिन्दुओं का एक पवित्र त्यौहार हैं। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं तथा इन दिनों में माता के नौ रुपों की पूजा की जाती हैं।

चैत्र नवरात्रि कब से प्रारम्भ हैं?

इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 24 मार्च, मंगलवार की दोपहर 02 बजकर 57 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 25 मार्च, बुधवार की साँय 05 बजकर 26 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2020 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 25 मार्च, बुधवार के शुभ दिवस से हो रहा हैं। तथा यह नवरात्र 02 अप्रैल, गुरुवार तक रहेंगे।

प्रारंभ:- 25 मार्च 2020, बुधवार
समापन:- 02 अप्रैल 2020, गुरुवार

नवरात्र के प्रथम दिन अर्थात 25 मार्च, बुधवार के दिन को माता दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा होगी। पार्वती तथा हेमवती भी माँ शैलपुत्री के अन्य नाम हैं।

इस वर्ष 2020 में देवी दुर्गा माताजी का आगमन नाव पर होगा तथा उनका प्रस्थान मनुष्य की सवारी पर होगा।

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त

इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, 25 मार्च, बुधवार की प्रातः 06 बजकर 27 मिनिट से 07 बजकर 26 मिनिट तक लाभ तथा अमृत योग में रहेगा। यदि इस समय आप कलश स्थापना करेंगे तो यह अति शुभ फलदायक सिद्ध होगा।


चैत्र नवरात्रि के महत्वपूर्ण मुहूर्त- 25 मार्च 2020

अभिजीत मुहूर्त:- नहीं हैं
राहुकाल:- 12:33-14:04
सूर्योदय:- 06:29 सूर्यास्त:- 18:36
चन्द्रोदय:- 07:07 चन्द्रास्त:- 19:33

नौ देवियो की पूजा नौ तिथि के अनुसार

नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं, तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती हैं।

25 मार्च, बुधवार (पहला दिन):- घट स्थापन,चंद्र दर्शन, नववर्ष, गुड़ी पड़वा, उगादी तथा माँ शैलपुत्री की पूजा
26 मार्च, गुरुवार (दूसरा दिन):- सिन्धारा दूज तथा माता ब्रह्राचारिणी की पूजा
27 मार्च, शुक्रवार (तीसरा दिन):- गौरी तीज,सौभाग्य तीज तथा माँ चन्द्रघंटा की पूजा
28 मार्च, शनिवार (चौथा दिन):- वरद विनायक चौथ तथा माँ कूष्मांडा की पूजा
29 मार्च, रविवार (पाँचवाँ दिन):- लक्ष्मी पंचमी, नाग पूजा तथा माँ स्कंदमाता की पूजा
30 मार्च, सोमवार (छटा दिन):- यमुना छठ, स्कन्द षष्ठी तथा माता कात्यायनी की पूजा
31 मार्च, मंगलवार (सातवाँ दिन):- महा सप्तमी तथा माता कालरात्रि की पूजा
01 अप्रैल, बुधवार (आठवाँ दिन):- दुर्गा अष्टमी, अन्नपूर्णा अष्टमी, सन्धि पूजा तथा माँ महागौरी की पूजा
02 अप्रैल, गुरुवार (नौवाँ दिन):- नवरात्रि का अंतिम दिन, राम नवमी तथा माँ सिद्धिदात्रि की पूजा   03 अप्रैल, शुक्रवार (दसवाँ दिन):- नवरात्रि व्रत पारण

नौ दिवस के नौ भोग (प्रसाद)

जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन, मां दुर्गा के भिन्न-भिन्न रूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार नवरात्रि के नौ दिनों में माता को प्रत्येक दिन के अनुसार नौ भोग या प्रसाद अर्पित करने से माता जी प्रत्येक प्रकार की समस्याओं का नाश कर देती हैं।
25 मार्च, बुधवार (पहला दिन):- केले
26 मार्च, गुरुवार (दूसरा दिन):- देसी घी (गाय के दूध से बने)
27 मार्च, शुक्रवार (तीसरा दिन):- नमकीन मक्खन
28 मार्च, शनिवार (चौथा दिन):- मिश्री
29 मार्च, रविवार (पाँचवाँ दिन):- खीर या दूध
30 मार्च, सोमवार (छटा दिन):- माल-पोआ
31 मार्च, मंगलवार (सातवाँ दिन):- शहद
01 अप्रैल, बुधवार (आठवाँ दिन):- गुड़ या नारियल
02 अप्रैल, गुरुवार (नौवाँ दिन):- धान का हलवा

नौ दिनों के लिए नौ शुभ रंग

शुभकामना के लिए तथा प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ भिन्न-भिन्न रंग पहने जाते हैं।
25 मार्च, बुधवार (पहला दिन):- हरा
26 मार्च, गुरुवार (दूसरा दिन):- नीला
27 मार्च, शुक्रवार (तीसरा दिन):- लाल
28 मार्च, शनिवार (चौथा दिन):- नारंगी
29 मार्च, रविवार (पाँचवाँ दिन):- पीला
30 मार्च, सोमवार (छटा दिन):- नीला
31 मार्च, मंगलवार (सातवाँ दिन):- बैंगनी रंग
01 अप्रैल, बुधवार (आठवाँ दिन):- गुलाबी
02 अप्रैल, गुरुवार (नौवाँ दिन):- सुनहरा रंग

चैत्र नवरात्री का महत्व

यह माना जाता हैं कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।

नवरात्रि के कुछ विशेष नियम

नवरात्रि के नौ पावन दिनो के दौरान कुछ विशेष नियमो का पालन अवश्य करना चाहिए, जो की इस प्रकार हैं।
        1- चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक प्रार्थना तथा उपवास माना जाता हैं।
2- त्योहार के आरंभ होने से पूर्व, अपने घर में देवी माँ का स्वागत करने के लिए घर की साफ-सफाई अच्छे से करनी चाहिए।
3- नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवन व्यतीत करना चाहिए।
4- नवरात्रि के दौरान भूमि शयन करना चाहिए।
5- नवरात्रि के दौरान सात्त्विक आहार ग्रहण करना चाहिए।
6- नवरात्रि के उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाना चाहिए।
7- नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

16 September 2019

शारदीय नवरात्रि कब है | Navratri kab hai 2019 | Durga Puja | Ghat Sthapana | Shardiya Navratra 2019 #Navratri

शारदीय नवरात्रि कब है | Navratri kab hai 2019 | Durga Puja | Ghat Sthapana | Shardiya Navratra 2019 #Navratri

2019 Durga Puja
Navratri kab hai 2019 Durga Puja
सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥
        जय माता दी  
जय श्री कालका माँ
नवरात्र हिन्दुओं का अत्यंत पवित्र तथा प्रमुख त्यौहार हैं। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक होती हैं तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती हैं। माताजी के नौ रूप इस प्रकार हैं- माँ शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा माँ, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, माँ महागौरी तथा सिद्धिदात्रि माँ। प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्र आते हैं, तथा गुप्त नवरात्र भी आते हैं। पहले नवरात्र का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष से होता हैं। तथा अगले नवरात्र शारदीय नवरात्रे कहलाते हैं, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक रहते हैं। इन नवरात्रों के पश्चात दशहरा या विजयादशमी पर्व मनाया जाता हैं। यह नवरात्र आश्विन मास के शरद ऋतू में आते हैं, अतः इन नवरात्रों को शारदीय नवरात्र कहा जाता हैं। यह नवरात्र को सभी नवरात्रों में सर्वाधिक प्रमुख तथा महत्वपूर्ण माना गया हैं, अतः शारदीय नवरात्रों को महा-नवरात्रि भी कहा जाता हैं। यह त्यौहार गुजरात तथा बंगाल के साथ-साथ सम्पूर्ण भारत-वर्ष में अत्यंत धूम-धाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। माताजी के इस त्योहार को सम्पूर्ण उत्तर भारत में नवरात्र कहा जाता हैं, वहीं पश्चिम बंगाल तथा उसके आसपास के राज्यों में इसे दुर्गा पूजा के नाम से जाना जाता हैं, साथ ही गुजरात में यह पर्व अत्यंत उत्साह के साथ, डांडिया तथा गरबा खेलकर, धूमधाम से मनाया जाता हैं। दोनों ही नवरात्रों में माताजी का पूजन विधिवत् किया जाता हैं। देवी के पूजन करने की विधि दोनों ही नवरात्रों में लगभग एक समान ही रहती हैं। इस त्यौहार पर सुहागन या कन्या, सभी अपने सामर्थ्य अनुसार दो, तीन या सम्पूर्ण नौ दिनों तक का व्रत रखते हैं तथा दसवें दिन कन्या पूजन के पश्चात व्रत खोला जाता हैं। नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का संकल्प किया जाता हैं। अतः व्रत का संकल्प लेते समय उसी प्रकार संकल्प लें जीतने दिन आपको व्रत रखना हैं। व्रत-संकल्प के पश्चात ही घट स्थापना की विधि प्रारंभ की जाती हैं। घट स्थापना सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में ही करना चाहिए, ऐसा करने से घर में सुख तथा समृद्धि व्याप्त रहती हैं।

हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा से पहले भगवान गणेश जी की पूजा का विधान हैं, अतः नवरात्र की शुभ पूजा से पहले कलश के रूप में श्री गणेश महाराज को स्थापित किया जाता हैं। नवरात्र के आरंभ की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश या घट की स्थापना की जाती हैं। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता हैं।
आइये हम आपको बताते हैं, देवी माताजी के शारदीय नवरात्र के कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-

कलश स्थापना करते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए-

कृपया ध्यान दे:-
1.     नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता हैं, वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए। लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग पूजा में नहीं करना चाहिए।
2.     नवरात्र में कलश स्थापना किसी भी समय किया जा सकता हैं। नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा समय प्रारंभ हो जाता हैं, अतः यदि जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाते हैं तो वे सम्पूर्ण दिवस किसी भी समय कलश स्थापित कर सकते हैं।
3.     नवरात्रों में माँ भगवती की आराधना “दुर्गा सप्तसती” से की जाती है, परन्तु यदि समयाभाव है तो भगवान् शिव रचित “सप्तश्लोकी दुर्गा” का पाठ अत्यंत ही प्रभाव शाली है एवं दुर्गा सप्तसती का पाठ सम्पूर्ण फल प्रदान करने वाला है।

शारदीय नवरात्र 2019 के कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

29 सितम्बर रविवार शुभ के दिवस से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो रहा हैं। तथा यह पर्व 08 अक्तूबर मंगलवार के दिन तक मनाया जाएगा। नवरात्र के प्रथम दिन अर्थात 29 सितम्बर रविवार के दिन को माता दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा होगी। पार्वती तथा हेमवती भी माँ शैलपुत्री के अन्य नाम हैं। इस वर्ष 2019 में देवी दुर्गा माताजी का आगमन हाथी पर होगा तथा उनका प्रस्थान चरणायुध पर होगा।
इस वर्ष, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 28 सितम्बर, शनिवार के रात्रि 11 बजकर 56 मिनिट से आरंभ हो कर 29 सितम्बर, रविवार की रात्रि 08 बजकर 14 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।
अतः इस वर्ष 2019 में शारदीय नवरात्र के कलश स्थापना करने का शुभ मुहूर्त 29 सितम्बर, रविवार की प्रातः 06 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक का रहेगा। यदि इस, चित्रा नक्षत्र के सर्वश्रेष्ट मुहूर्त में आप कलश स्थापना करेंगे तो आपके लिए यह लाभदायक एवं अत्यंत शुभ रहेगा।
आशा करता हु मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी, यह जानकारी अपने दोस्तों के साथ इस विडियो के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा शेयर करे तथा हमारे चेंनल को सब्सक्राइब जरूर करे
धन्यवाद!

 नवरात्र तिथि | Dates of Navratra

पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 29 सितम्बर 2019, दिन रविवार
दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि, 30 सितम्बर 2019, दिन सोमवार.
तीसरा नवरात्र, तृतीया तिथि, 1 अक्तूबर 2019, दिन मंगलवार.
चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 2 अक्तूबर 2019, बुधवार.
पांचवां नवरात्र पंचमी तिथि , 3 अक्तूबर 2019, बृहस्पतिवार.
छठा नवरात्र, षष्ठी तिथि, 4 अक्तूबर 2019, शुक्रवार.
सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि, 5 अक्तूबर 2019, शनिवार
आठवां नवरात्र, अष्टमी तिथि, 6 अक्तूबर 2019, रविवार
नौवां नवरात्र, नवमी तिथि, 7 अक्तूबर 2019, सोमवार
         दशहरा, दशमी तिथि, 8 अक्तूबर 2019, मंगलवार

02 July 2019

नवरात्र कलश स्थापना शुभ मुहूर्त | गुप्त नवरात्र 2019 | Ghat Sthapana kab hai | Gupt Navratra 2019

नवरात्र कलश स्थापना शुभ मुहूर्त | गुप्त नवरात्र 2019 | Ghat Sthapana kab hai | Gupt Navratra 2019
ghatasthapana pujan
gupt navratri 2019 dates in hindi
       ॥  जय माता दी 
जय श्री कालका माँ

नमो देवी महाविद्ये नमामि चरणौ तव।
सदा ज्ञानप्रकाशं में देहि सर्वार्थदे शिवे॥
        सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
        त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥
         
नवरात्र हिन्दुओं का अत्यंत पवित्र तथा प्रमुख त्यौहार हैं। देवी दुर्गा माँ को शक्ति का प्रतीक माना जाता हैं। मान्यता हैं कि, माताजी स्वयं ही इस चराचर संसार में शक्ति का संचार निरंतर करती रहती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार प्रत्येक वर्ष में मुख्य दो बार नवरात्र आते हैं, तथा अन्य गुप्त नवरात्र भी आते हैं। प्रथम नवरात्र का प्रारंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष से होता हैं। तथा अगले नवरात्र शारदीय नवरात्रे कहलाते हैं, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक रहते हैं। वहीं, गुप्त नवरात्र माघ, पौष तथा आषाढ़ के मास में मनाए जाते हैं। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक होती हैं तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती हैं। माताजी के नौ रूप इस प्रकार हैं- माँ शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा माँ, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, माँ महागौरी तथा सिद्धिदात्रि माँ। ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती हैं। गुप्त नवरात्र के दौरान साधक महाविद्या अर्थात तंत्र साधना के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी तथा कमला देवी की पूजा करते हैं।
जब चातुर्मास में भगवान विष्णु शयन काल की अवधि के बीच होते हैं तब देव शक्तियां क्षीण होने लगती हैं। उस समय पृथ्वी पर रुद्र, वरुण, यम आदि का प्रकोप बढ़ने लगता हैं इन विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती हैं। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के स्वरूपों की साधना पूर्ण श्रद्धा से की जाती हैं। मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान देवी के पूजन करने की विधि अन्य नवरात्र के समान ही रहती हैं। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन दोनों पहर मां दुर्गा की पूजा की जाती हैं। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता हैं अर्थात व्रत का पारण किया जाता हैं।
नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का संकल्प किया जाता हैं। अतः व्रत का संकल्प लेते समय उसी प्रकार संकल्प लें, जीतने दिन आपको व्रत रखना हैं। व्रत-संकल्प के पश्चात ही घट-स्थापना की विधि प्रारंभ की जाती हैं। घट-स्थापना सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में ही करना चाहिए, ऐसा करने से घर में सुख, शांति तथा समृद्धि व्याप्त रहती हैं।
हिन्दू धर्म में प्रत्येक पूजा से पूर्व भगवान गणेश जी की पूजा का विधान हैं, अतः नवरात्र की शुभ पूजा से पूर्व कलश के रूप में श्री गणेश महाराज को स्थापित किया जाता हैं। नवरात्र के आरंभ की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश या घट की स्थापना की जाती हैं। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता हैं।

कलश स्थापना करते समय इन विशेष नियमो का ध्यान अवश्य रखना चाहिए-

कृपया ध्यान दे:-

1.  नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता हैं, वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए। लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग पूजा में नहीं करना चाहिए।
2.  नवरात्र में कलश स्थापना किसी भी समय किया जा सकता हैं। नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा समय प्रारंभ हो जाता हैं, अतः यदि जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाते हैं तो वे सम्पूर्ण दिवस किसी भी समय कलश स्थापित कर सकते हैं।
3.  कलश स्थापना करने से पूर्व, अपने घर में देवी माँ का स्वागत करने के लिए, घर की साफ-सफाई अच्छे से करनी चाहिए।
4.  नवरात्रों में माँ भगवती की आराधना “दुर्गा सप्तसती” से की जाती हैं, परन्तु यदि समयाभाव हैं तो भगवान् शिव रचित “सप्तश्लोकी दुर्गा” का पाठ अत्यंत ही प्रभाव शाली हैं एवं दुर्गा सप्तसती का पाठ सम्पूर्ण फल प्रदान करने वाला हैं।
5.  नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवन व्यतीत करना चाहिए। अतः नवरात्रि के दौरान भूमि शयन करना चाहिए तथा सात्त्विक आहार, जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दूध-दही तथा फल आदि ग्रहण करना चाहिए।

गुप्त नवरात्रि 2019
इस वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 02 जुलाई, मंगलवार की मध्यरात्रि 12 बजकर 45 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 03 जुलाई, बुधवार की रात्रि 10 बजकर 04 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।
अतः इस वर्ष 2019 में गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 03 जुलाई, बुधवार के दिन से हो रहा हैं। तथा यह नवरात्र 11 जुलाई, गुरुवार तक रहेंगे।
नवरात्र के प्रथम दिन अर्थात 03 जुलाई, बुधवार के दिन माता दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा होगी। पार्वती तथा हेमवती भी माँ शैलपुत्री के अन्य नाम हैं।
इस वर्ष 2019 में देवी दुर्गा माताजी का आगमन नाव पर होगा तथा उनका प्रस्थान मनुष्य के सवारी पर होगा।

गुप्त नवरात्रि घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त
इस वर्ष, 2019 में, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि घट-स्थापना अर्थात कलश स्थापना करने का शुभ मुहूर्त, 03 जुलाई, बुधवार की प्रातः 05 बजकर 44 मिनिट से 06 बजकर 47 मिनिट तक का रहेगा। यदि इस सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में आप कलश स्थापना करेंगे तो यह अति लाभदायक एवं शुभ फलदायक सिद्ध होगा।

नवरात्रि पारण
इस वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 10 जुलाई, बुधवार की मध्यरात्रि 02 बजकर 02 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 11 जुलाई, गुरुवार की मध्यरात्रि 01 बजकर 02 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।
अतः इस वर्ष, गुप्त नवरात्रि व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 11 जुलाई, गुरुवार की प्रातः 05 बजकर 54 मिनिट के पश्चात का रहेगा।

आशा करता हूँ मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी, यह जानकारी अपने दोस्तों के साथ इस विडियो के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा शेयर करे तथा हमारे चेंनल को सब्सक्राइब जरूर करें।
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02 April 2019

चैत्र नवरात्रि कब हैं 2019 | Chaitra Navratri 2019 kab hai | 2019 दुर्गा पूजा कब है | Durga Puja 2019

चैत्र नवरात्रि कब हैं 2019 | Chaitra Navratri 2019 kab hai | 2019 दुर्गा पूजा कब है | Durga Puja 2019

chaitra navratri 2019
chaitra navratri kab hai
मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे।

॥ जय माता दी ॥
जय श्री कालका माँ

इस विडियो मे हम आपको बताएँगे-
१-  चैत्र नवरात्रि कब से प्रारम्भ हैं?
२-  चैत्र नवरात्रि के महत्वपूर्ण मुहूर्त
३-  चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त
४-  नौ देवियो की पूजा नौ तिथि के अनुसार
५-  नौ दिवस के नौ भोग (प्रसाद)
६-  नौ दिनों के लिए नौ शुभ रंग
७-  चैत्र नवरात्री का महत्व
८-  नवरात्रि के कुछ विशेष नियम

नवरात्र हिन्दुओं का एक पवित्र त्यौहार हैं। नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं तथा इन दिनों में माता के नौ रुपों की पूजा की जाती हैं।

चैत्र नवरात्रि कब से प्रारम्भ हैं?

इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 05 अप्रैल, शुक्रवार की दोपहर 02 बजकर 20 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 06 अप्रैल, शनिवार की दोपहर 03 बजकर 23 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2019 में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 06 अप्रैल, शनिवार के दिन से हो रहा हैं। तथा यह नवरात्र 14 अप्रैल, रविवार तक रहेंगे।
प्रारंभ:- 06 अप्रैल 2019, शनिवार
समापन:- 14 अप्रैल 2019, रविवार
               

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त

इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, 06 अप्रैल, शनिवार की प्रातः 06 बजकर 11 मिनिट से 09 बजकर 16 मिनिट तक अमृत योग में रहेगा। यदि इस समय आप कलश स्थापना करेंगे तो यह अति शुभ फलदायक सिद्ध होगा।


चैत्र नवरात्रि के महत्वपूर्ण मुहूर्त- 6 अप्रैल 2019

अभिजीत मुहूर्त:- 11:51-12:49
राहुकाल:- 09:17-10:50
सूर्योदय:- 06:10    सूर्यास्त:- 18:37
चन्द्रोदय:- 06:51   चन्द्रास्त:- 19:37

नौ देवियो की पूजा नौ तिथि के अनुसार

नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं, तथा इन नौ दिनों में माताजी के नौ भिन्न-भिन्न स्वरुपों की पूजा की जाती हैं।

६ अप्रैल (पहला दिन):-   घट स्थापन,चंद्र दर्शन तथा माँ शैलपुत्री की पूजा
७ अप्रैल (दूसरा दिन):-    सिन्धारा दूज तथा माता ब्रह्राचारिणी की पूजा
८ अप्रैल (तीसरा दिन):-   गौरी तीज,सौभाग्य तीज तथा माँ चन्द्रघंटा की पूजा
९ अप्रैल (चौथा दिन):-   वरद विनायक चौथ तथा माँ कूष्मांडा की पूजा
१० अप्रैल (पांचवा दिन):- लक्ष्मी पंचमी, नाग पूजा तथा माँ स्कंदमाता की पूजा
११ अप्रैल (छटा दिन):-   यमुना छठ, स्कन्द षष्ठी तथा माता कात्यायनी की पूजा
१२ अप्रैल (सातवां दिन):-  महा सप्तमी तथा माता कालरात्रि की पूजा
१३ अप्रैल (आठवां दिन):-  दुर्गा अष्टमी, अन्नपूर्णा अष्टमी, सन्धि पूजा तथा माँ महागौरी की पूजा
१४ अप्रैल (नौंवा दिन):- नवरात्रि का अंतिम दिन, नवरात्री पारण, राम नवमी तथा माँ सिद्धिदात्री की पूजा

नौ दिवस के नौ भोग (प्रसाद)

जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन, मां दुर्गा के भिन्न-भिन्न रूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार नवरात्रि के नौ दिनों में माता को प्रत्येक दिन के अनुसार नौ भोग या प्रसाद अर्पित करने से माता जी प्रत्येक प्रकार की समस्याओं का नाश कर देती हैं।  
६ अप्रैल (पहला दिन):- केले
७ अप्रैल (दूसरा दिन):- देसी घी (गाय के दूध से बने)
८ अप्रैल (तीसरा दिन):- नमकीन मक्खन
९ अप्रैल (चौथा दिन):- मिश्री
१० अप्रैल (पांचवा दिन):- खीर या दूध
११ अप्रैल (छटा दिन):- माल-पोआ
१२ अप्रैल (सातवां दिन):-  शहद
१३ अप्रैल (आठवां दिन):-  गुड़ या नारियल
१४ अप्रैल (नौंवा दिन):- धान का हलवा

नौ दिनों के लिए नौ शुभ रंग

शुभकामना के लिए तथा प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ भिन्न-भिन्न रंग पहने जाते हैं।
६ अप्रैल (पहला दिन):- हरा
७ अप्रैल (दूसरा दिन):- नीला
८ अप्रैल (तीसरा दिन):- लाल
९ अप्रैल (चौथा दिन):- नारंगी
१० अप्रैल (पांचवा दिन):- पीला
११ अप्रैल (छटा दिन):- नीला
१२ अप्रैल (सातवां दिन):-  बैंगनी रंग
१३ अप्रैल (आठवां दिन):-  गुलाबी
१४ अप्रैल (नौंवा दिन):- सुनहरा रंग


चैत्र नवरात्री का महत्व

यह माना जाता हैं कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।

नवरात्रि के कुछ विशेष नियम

नवरात्रि के नौ पावन दिनो के दौरान कुछ विशेष नियमो का पालन अवश्य करना चाहिए, जो की इस प्रकार हैं।
        1- चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक प्रार्थना तथा उपवास माना जाता हैं।
2- त्योहार के आरंभ होने से पूर्व, अपने घर में देवी माँ का स्वागत करने के लिए घर की साफ-सफाई अच्छे से करनी चाहिए।
3- नवरात्रि के दौरान सात्विक जीवन व्यतीत करना चाहिए।
4- नवरात्रि के दौरान भूमि शयन करना चाहिए।
5- नवरात्रि के दौरान सात्त्विक आहार ग्रहण करना चाहिए।
6- नवरात्रि के उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाना चाहिए।
7- नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखना चाहिए।