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04 May 2019

शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय | shani ko khush karne ke upay in hindi | shanidev ko kaise prasann kare

शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय shanidev ko kaise prasann kare


shanidev ko kaise prasann kare
shanidev ko kaise prasann kare
 सनातन हिन्दु पंचांग में नये चन्द्रमा के दिवस को अमावस्या कहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण दिवस होता हैं क्योंकि कई धार्मिक कृत्य केवल अमावस्या तिथि के दिवस ही किये जाते हैं।
अमावस्या जब सोमवार के दिवस आती हैं तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं तथा अमावस्या जब शनिवार के दिवस आती हैं तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं।
पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए अमावस्या के समस्त दिवस श्राद्ध की रस्मों को करने के लिए उपयुक्त हैं। कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिवस उपयुक्त होता हैं।

इस दिवस पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं तथा सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

तिल से बने पकवान, उड़द से बने पकवान गरीबों को दान करें।

उड़द दाल की खिचड़ी दरिद्रनारायण को दान करें।

अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम तथा 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें।

शनि यंत्र, शनि लॉकेट, काले घोड़े की नाल का छल्ला धारण करें।

इस दिवस नीलम या कटैला रत्न धारण करें। जो फल प्रदान करता हैं।

काले रंग का श्वान को भोजन दे।अगर हो सके इस दिवस से पालें तथा उसकी सेवा करें। अत्यंत ही फायदेमंद साबित होगा।
💥पवित्र नदी के जल से या नदी में स्नान कर शनिदेव का आवाहन तथा उनके दर्शन करे।

💥श्री शनिदेव का आह्वान करने के लिए हाथ में नीले पुष्प, बेल पत्र, अक्षत व जल लेकर इस मंत्र अदभुद वैदिक मंत्र का जाप करते हुए प्रार्थना करें- 

"ह्रीं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। 
छायार्मात्ताण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्"।। 

🌿ह्रीं बीजमय, नीलांजन सदृश आभा वाले, रविपुत्र, यम के अग्रज, छाया मार्तण्ड स्वरूप उन शनि को मैं प्रणाम करता हूं तथा मैं आपका आह्वान करता हूँ॥ 

🔥शनि अमावस्या के दिवस प्रात: जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके सात परिक्रमा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

🔥शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे अनुकूल मंत्र हैं --

"ॐ शं शनैश्चराय नम:।" 

इस मंत्र की एक माला का जाप अवश्य करें इस दिवस आप श्री शनिदेव के दर्शन जरूर करें।

🔥शनिदेव की दशा में अनुकूल फल प्राप्ति कराने वाला मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम: 

🔥शनि अमावस्या के दिवस संध्या के समय पीपल के पेड़ पर सप्तधान / सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं तथा सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं, इससे कुंडली के ग्रहो के अशुभ फलो में कमी आती हैं। जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती हैं। 

🔥शनि अमावस्या के दिवस बरगद के पेड की जड में गाय का कच्चा दूध चढाकर उस मिट्टी से तिलक करें। अवश्य धन प्राप्ति होगी। 

🔥उड़द की दाल की काला नमक डाल कर खिचड़ी बनाकर संध्या के समय शनि मंदिर में जाकर भगवान शनिदेव का भोग लगाएं फिर इसे प्रसाद के रूप में बाँट दें तथा स्वयं भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। 

🔥शनिवार के दिवस काले उड़द की दाल की खिचड़ी काला नमक डाल कर खाएं इससे भी शनि दोष के कारण होने वाले कष्टों में कमी आती हैं।

🔥इस दिवस मनुष्य को सरसों का तेल, उडद, काला तिल, देसी चना, कुलथी, गुड शनियंत्र तथा शनि संबंधी समस्त पूजा सामग्री अपने ऊपर वार कर शनिदेव के चरणों में चढाकर शनिदेव का तैलाभिषेक करना चाहिए।

🔥शनिश्चरी अमावस्या को सुबह या शाम शनि चालीसा का पाठ या हनुमान चालीसा , बजरंग बाण का पाठ करें।

🔥तिल से बने पकवान, उड़द से बने पकवान गरीबों को दान करें तथा पक्षियों को खिलाएं
 
🔥उड़द दाल की खिचड़ी दरिद्रनारायण को दान करें।

🔥अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम तथा 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें। इससे आर्थिक संकट दूर होते हैं नौकरी, व्यापार में धनलाभ, सफलता की प्राप्ति होती हैं। 

🔥शनि अमावस्या के दिवस संपूर्ण श्रद्धा भाव से पवित्र करके घोडे की नाल या नाव की पेंदी की कील का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें।

🔥शनि अमावस्या के दिवस 108 बेलपत्र की माला भगवान शिव के शिवलिंग पर चढाए। साथ ही अपने गले में गौरी शंकर रुद्राक्ष 7 दानें लाल धागें में धारण करें।

🔥जिनके ऊपर शनि की अशुभ दशा हो ऐसे जातक को मांस , मदिरा, बीडी- सिगरेट नशीला पदार्थ आदि का सेवन न करे।

शनि अमावस्या पर करें शनिदेव व पितृदेव की आराधना- 4 May 2019 | shani amavasya upay in hindi

शनि अमावस्या पर करें शनिदेव व पितृदेव की आराधना- 4 May 2019

शनिदेव व पितृदेव की आराधना - 4 May 2019
shani amavasya upay in hindi


🎡 अमावस्या अगर शनिवार के दिवस पड़ रही हो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता हैं। 4 May 2019 के दिवस शनिश्चरी अमावस्या का ही संयोग हैं। ज्योतिषाचार्यों का मानना हैं कि यह अमावस्या कई मायनों में अहम हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनिदोष हैं वो लोग इस दिवस तय विधि विधान के अनुसार पूजा करके उससे मुक्ति पा सकते हैं। अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती हैं जिसमें मांगलिक कृत्य करना शुभ माना गया हैं। हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी इसी अमावस्या के पश्चात होती हैं।

🎠 शनि की साढ़े साती का प्रभाव भी किया जा सकता हैं कम -ये भी माना जाता हैं कि अगर किसी भी जातक के ऊपर शनि की साढ़ेसाती या फिर ढैय्या चल रही हो तो इस दिवस कुछ उपाय करने से उनका प्रभाव भी कम हो जाता हैं। इसके अलावा इस दिवस शनिदेव के पूजा से उन्हें खुश करके मनचाहा फल भी प्राप्त किया जा सकता हैं। 

😊 पितरों को खुश करने का दिवस - ज्योतिषाचार्यों का मानना हैं कि अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं। ऐसे में इस दिवस अपने पितरों को भी प्रसन्न करने का सही समय हैं। ऐसा माना जा रहा हैं कि शनिश्चरी अमावस्या के दिवस किए गए शांति उपाय तुरंत फलकारी होते हैं।  यदि पितरों का प्रकोप न हो तो भी इस दिवस किया गया श्राद्ध मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता हैं, क्योंकि शनिदेव की अनुकंपा से पितरों का उद्धार बडी सहजता से हो जाता हैं।

👆🔔 सहस्त्र गुना प्राप्त होता हैं फल - तंत्र शास्त्रों में कहा गया हैं कि इन दिवस किए गए पूजा तथा पितरों के लिए किए गए तर्पण से सहस्त्र गुना फल प्राप्त होता हैं। इस दिवस पवित्र नदियों में स्नान तथा विभिन्न प्रकार के अनाजों का दान करना फलकारी माना गया हैं। 

📯 घर में सकारात्मक ऊर्जा को होता हैं संचार - अपने पितरों का स्मरण कर करने तथा विधि विधान के अनुरूप पूजा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती हैं। कहा जाता हैं कि इस दिवस किए गए पूजा से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं एवं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं।

🏆 शनिश्चरी अमावस्या पर विशेष उपाय: - 🏆


💥पवित्र नदी के जल से या नदी में स्नान कर शनिदेव का आवाहन तथा उनके दर्शन करे।

💥श्री शनिदेव का आह्वान करने के लिए हाथ में नीले पुष्प, बेल पत्र, अक्षत व जल लेकर इस मंत्र अदभुद वैदिक मंत्र का जाप करते हुए प्रार्थना करें- 

"ह्रीं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। 
छायार्मात्ताण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्"।। 

🌿ह्रीं बीजमय, नीलांजन सदृश आभा वाले, रविपुत्र, यम के अग्रज, छाया मार्तण्ड स्वरूप उन शनि को मैं प्रणाम करता हूं तथा मैं आपका आह्वान करता हूँ॥ 

🔥शनि अमावस्या के दिवस प्रात: जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके सात परिक्रमा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

🔥शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे अनुकूल मंत्र हैं --

"ॐ शं शनैश्चराय नम:।" 

इस मंत्र की एक माला का जाप अवश्य करें इस दिवस आप श्री शनिदेव के दर्शन जरूर करें।

🔥शनिदेव की दशा में अनुकूल फल प्राप्ति कराने वाला मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम: 

🔥शनि अमावस्या के दिवस संध्या के समय पीपल के पेड़ पर सप्तधान / सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं तथा सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं, इससे कुंडली के ग्रहो के अशुभ फलो में कमी आती हैं। जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती हैं। 

🔥शनि अमावस्या के दिवस बरगद के पेड की जड में गाय का कच्चा दूध चढाकर उस मिट्टी से तिलक करें। अवश्य धन प्राप्ति होगी। 

🔥उड़द की दाल की काला नमक डाल कर खिचड़ी बनाकर संध्या के समय शनि मंदिर में जाकर भगवान शनिदेव का भोग लगाएं फिर इसे प्रसाद के रूप में बाँट दें तथा स्वयं भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। 

🔥शनिवार के दिवस काले उड़द की दाल की खिचड़ी काला नमक डाल कर खाएं इससे भी शनि दोष के कारण होने वाले कष्टों में कमी आती हैं।

🔥इस दिवस मनुष्य को सरसों का तेल, उडद, काला तिल, देसी चना, कुलथी, गुड शनियंत्र तथा शनि संबंधी समस्त पूजा सामग्री अपने ऊपर वार कर शनिदेव के चरणों में चढाकर शनिदेव का तैलाभिषेक करना चाहिए।

🔥शनिश्चरी अमावस्या को सुबह या शाम शनि चालीसा का पाठ या हनुमान चालीसा , बजरंग बाण का पाठ करें।

🔥तिल से बने पकवान, उड़द से बने पकवान गरीबों को दान करें तथा पक्षियों को खिलाएं
 ।
🔥उड़द दाल की खिचड़ी दरिद्रनारायण को दान करें।

🔥अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम तथा 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें। इससे आर्थिक संकट दूर होते हैं नौकरी, व्यापार में धनलाभ, सफलता की प्राप्ति होती हैं। 

🔥शनि अमावस्या के दिवस संपूर्ण श्रद्धा भाव से पवित्र करके घोडे की नाल या नाव की पेंदी की कील का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें।

🔥शनि अमावस्या के दिवस 108 बेलपत्र की माला भगवान शिव के शिवलिंग पर चढाए। साथ ही अपने गले में गौरी शंकर रुद्राक्ष 7 दानें लाल धागें में धारण करें।

🔥जिनके ऊपर शनि की अशुभ दशा हो ऐसे जातक को मांस , मदिरा, बीडी- सिगरेट नशीला पदार्थ आदि का सेवन न करे।

🔥व्रत में दिवस में दूध, लस्सी तथा फलों के रस ग्रहण करें। 

🙏सायंकाल हनुमानजी या भैरवजी का दर्शन करें।🙏

🔥इस दिवस दान का अत्यंत ही महत्त्व हैं।इस दिवस महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया शनि स्तोत्र का पाठ करके शनि की कोई भी वस्तु जैसे काला तिल, काला कपड़ा, चमड़े के जूते, लोहे की वस्तु, काला चना, काला कंबल, नीला फूल दान करने से शनि साल भर कष्टों से बचाए रखते हैं।
  
🔥जो लोग इस दिवस यात्रा में जा रहे हैं तथा उनके पास समय की कमी हैं वह सफर में शनि नवाक्षरी मंत्र अथवा कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:।।मंत्र का जप करने का प्रयास करते हैं करें तो शनिदेव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती हैं।

🔥शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव का विधिवत पूजा कर समस्त लोग पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं। शनिदेव क्रूर नहीं अपितु कल्याणकारी हैं। भविष्यपुराण के अनुसार शनि अमावस्या शनिदेव को अधिक प्रिय रहती हैं।

शनैश्चरी अमावस्या विशेष | Shani Amavasya 2019

शनैश्चरी अमावस्या विशेष | Shani Amavasya 2019

Shani Amavasya hindi
Shani Amavasya 2019

शनि अमावस्या के दिवस श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंती हैं। इस वर्ष 4 मई 2019 को शनिवार के दिवस शनि अमावस्या मनाई जाएगी, यह पितृकार्येषु अमावस्या के रुप में भी जानी जाती हैं। कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता हैं जब शनिवार के दिवस अमावस्या का समय हो जिस कारण इसे शनि अमावस्या कहा जाता हैं।

श्री शनिदेव भाग्यविधाता हैं, यदि निश्छल भाव से शनिदेव का नाम लिया जाये तो जातक के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। श्री शनिदेव तो इस चराचर जगत में कर्मफल दाता हैं जो जातक के कर्म के आधार पर उसके भाग्य का निर्णय करते हैं। इस दिवस शनिदेव का पूजा सफलता प्राप्त करने एवं दुष्परिणामों से छुटकारा पाने हेतु अत्यंत उत्तम होता हैं। इस दिवस शनिदेव का पूजा समस्त मनोकामनाएं पूरी करता हैं।

शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव का विधिवत पूजा कर समस्त लोग पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं। इस दिवस विशेष अनुष्ठान द्वारा पितृदोष तथा कालसर्प दोषों से मुक्ति प्राप्त की जा सकतीहैं। इसके अलावा शनि का पूजा तथा तैलाभिषेक कर शनि की साढेसाती, ढैय्या तथा महादशा जनित संकट तथा आपदाओं से भी मुक्ति प्राप्त की जा सकतीहैं,

शनि अमावस्या महत्व

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शनि अमावस्या ज्योतिषशास्त्र के अनुसार साढ़ेसाती एवं ढ़ैय्या के दौरान शनि जातक को अपना शुभाशुभ फल प्रदान करता हैं। शनि अमावस्या अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इस दिवस शनिदेव को प्रसन्न करके जातक शनि के कोप से अपना बचाव कर सकते हैं। पुराणों के अनुसार शनि अमावस्या के दिवस शनिदेव को प्रसन्न करना अत्यंत आसान होता हैं। शनि अमावस्या के दिवस शनि दोष की शांति अत्यंत ही सरलता कर सकते हैं।

इस दिवस महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया शनि स्तोत्र का पाठ करके शनि की कोई भी वस्तु जैसे काला तिल, लोहे की वस्तु, काला चना, कंबल, नीला फूल दान करने से शनि साल भर कष्टों से बचाए रखते हैं। जो लोग इस दिवस यात्रा में जा रहे हैं तथा उनके पास समय की कमी हैं वह सफर में शनि नवाक्षरी मंत्र अथवा कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:।।मंत्र का जप करने का प्रयास करते हैं करें तो शनिदेव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती हैं।

पितृदोष से मुक्ति

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शनि अमावस्या पितृदोष मुक्ति के लिये उत्तम दिवस हैं। पितृ शांति के लिये अमावस्या तिथि का विशेष महत्व हैं तथा अमावस्या अगर शनिवार के दिवस पड़े तो इसका महत्व तथा अधिक बढ़ जाता हैं। शनिदेव को अमावस्या अधिक प्रिय हैं। शनिदेव की कृपा का पात्र बनने के लिए शनिश्चरी अमावस्या को समस्त को विधिवत आराधना करनी चाहिए। भविष्यपुराण के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिदेव को अधिक प्रिय रहती हैं।

शनैश्चरी अमावस्या के दिवस पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। जिन जातकयों की कुण्डली में पितृदोष या जो भी कोई पितृ दोष की पिडा़ को भोग रहे होते हैं उन्हें इस दिवस दान इत्यादि विशेष कर्म करने चाहिए। यदि पितरों का प्रकोप न हो तो भी इस दिवस किया गया श्राद्ध आने वाले समय में मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता हैं, क्योंकि शनिदेव की अनुकंपा से पितरों का उद्धार बडी सहजता से हो जाता हैं।

शनि अमावस्या पूजा

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पवित्र नदी के जल से या नदी में स्नान कर शनिदेव का आवाहन तथा दर्शन करना चाहिए। शनिदेव का पर नीले पुष्प, बेल पत्र, अक्षत अर्पण करें। शनिदेव को प्रसन्न करने हेतु शनि मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नम:”, अथवा ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिवस सरसों के तेल, उडद, काले तिल, कुलथी, गुड शनियंत्र तथा शनि संबंधी समस्त पूजा सामग्री को शनिदेव पर अर्पित करना चाहिए तथा शनिदेव का तैलाभिषेक करना चाहिए। शनि अमावस्या के दिवस शनि चालीसा,  हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए। जिनकी कुंडली या राशि पर शनि की साढ़ेसाती व ढैया का प्रभाव हो उन्हें शनि अमावस्या के दिवस पर शनिदेव का विधिवत पूजा करना चाहिए।

शनैश्चरी अमावस्या पर शनि मंत्र- स्रोत्र द्वारा उपाय

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शनैश्चरी अमावस्या के दिवस शनि मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना परम कल्याणकारक माना गया हैं जप से पहले शरीर तथा आसान शुद्धि के बाद निम्न विनियोग करे इसके बाद जप आरम्भ करें।

विनियोग👉 शन्नो देवीति मंत्रस्य सिन्धुद्वीप ऋषि: गायत्री छंद:, आपो देवता, शनि प्रीत्यर्थे जपे विनियोग:।नीचे लिखे गये कोष्ठकों के अन्गों को उंगलियों से छुयें। अथ देहान्गन्यास:-शन्नो शिरसि (सिर), देवी: ललाटे (माथा)।अभिषटय मुखे (मुख), आपो कण्ठे (कण्ठ), भवन्तु ह्रदये (ह्रदय), पीतये नाभौ (नाभि), शं कट्याम (कमर), यो: ऊर्वो: (छाती), अभि जान्वो: (घुटने), स्त्रवन्तु गुल्फ़यो: (गुल्फ़), न: पादयो: (पैर)।अथ करन्यास:-शन्नो देवी: अंगुष्ठाभ्याम नम:।अभिष्टये तर्ज्जनीभ्याम नम:।आपो भवन्तु मध्यमाभ्याम नम:।पीतये अनामिकाभ्याम नम:।शंय्योरभि कनिष्ठिकाभ्याम नम:।स्त्रवन्तु न: करतलकरपृष्ठाभ्याम नम:।अथ ह्रदयादिन्यास:-शन्नो देवी ह्रदयाय नम:।अभिष्टये शिरसे स्वाहा।आपो भवन्तु शिखायै वषट।पीतये कवचाय हुँ।(दोनो कन्धे)।शंय्योरभि नेत्रत्राय वौषट।स्त्रवन्तु न: अस्त्राय फ़ट।ध्यानम:-नीलाम्बर: शूलधर: किरीटी गृद्ध्स्थितस्त्रासकरो धनुश्मान।चतुर्भुज: सूर्यसुत: प्रशान्त: सदाअस्तु मह्यं वरदोअल्पगामी।।शनि गायत्री:-औम कृष्णांगाय विद्य्महे रविपुत्राय धीमहि तन्न: सौरि: प्रचोदयात।वेद मंत्र:- औम प्राँ प्रीँ प्रौँ स: भूर्भुव: स्व: औम शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तु न:।औम स्व: भुव: भू: प्रौं प्रीं प्रां औम शनिश्चराय नम:।

शनि बीज जप मंत्र 👉  ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम:। संख्या 23000 जाप।

शनि स्तोत्रम

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शनि अष्टोत्तरशतनामावलि

ॐ शनैश्चराय नमः ॥ ॐ शान्ताय नमः ॥ ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥ ॐ शरण्याय नमः ॥ ॐ वरेण्याय नमः ॥ ॐ सर्वेशाय नमः ॥ ॐ सौम्याय नमः ॥ ॐ सुरवन्द्याय नमः ॥ ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ॥ ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः ॥ ॐ सुन्दराय नमः ॥ ॐ घनाय नमः ॥ ॐ घनरूपाय नमः ॥ ॐ घनाभरणधारिणे नमः ॥ ॐ घनसारविलेपाय न मः ॥ ॐ खद्योताय नमः ॥ ॐ मन्दाय नमः ॥ ॐ मन्दचेष्टाय नमः ॥ ॐ महनीयगुणात्मने नमः ॥ ॐ मर्त्यपावनपदाय नमः ॥ ॐ महेशाय नमः ॥ ॐ छायापुत्राय नमः ॥ ॐ शर्वाय नमः ॥ ॐ शततूणीरधारिणे नमः ॥ ॐ चरस्थिरस्वभा वाय नमः ॥ ॐ अचञ्चलाय नमः ॥ ॐ नीलवर्णाय नमः ॥ ॐ नित्याय नमः ॥ ॐ नीलाञ्जननिभाय नमः ॥ ॐ नीलाम्बरविभूशणाय नमः ॥ ॐ निश्चलाय नमः ॥ ॐ वेद्याय नमः ॥ ॐ विधिरूपाय नमः ॥ ॐ विरोधाधारभूमये नमः ॥ ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमः ॥ ॐ वज्रदेहाय नमः ॥ ॐ वैराग्यदाय नमः ॥ ॐ वीराय नमः ॥ ॐ वीतरोगभयाय नमः ॥ ॐ विपत्परम्परेशाय नमः ॥ ॐ विश्ववन्द्याय नमः ॥ ॐ गृध्नवाहाय नमः ॥ ॐ गूढाय नमः ॥ ॐ कूर्माङ्गाय नमः ॥ ॐ कुरूपिणे नमः ॥ ॐ कुत्सिताय नमः ॥ ॐ गुणाढ्याय नमः ॥ ॐ गोचराय नमः ॥ ॐ अविद्यामूलनाशाय नमः ॥ ॐ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः ॥ ॐ आयुष्यकारणाय नमः ॥ ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः ॥ ॐ विष्णुभक्ताय नमः ॥ ॐ वशिने नमः ॥ ॐ विविधागमवेदिने नमः ॥ ॐ विधिस्तुत्याय नमः ॥ ॐ वन्द्याय नमः ॥ ॐ विरूपाक्षाय नमः ॥ ॐ वरिष्ठाय नमः ॥ ॐ गरिष्ठाय नमः ॥ ॐ वज्राङ्कुशधराय नमः ॥ ॐ वरदाभयहस्ताय नमः ॥ ॐ वामनाय नमः ॥ ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः ॥ ॐ श्रेष्ठाय नमः ॥ ॐ मितभाषिणे नमः ॥ ॐ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः ॥ ॐ पुष्टिदाय नमः ॥ ॐ स्तुत्याय नमः ॥ ॐ स्तोत्रगम्याय नमः ॥ ॐ भक्तिवश्याय नमः ॥ ॐ भानवे नमः ॥ ॐ भानुपुत्राय नमः ॥ ॐ भव्याय नमः ॥ ॐ पावनाय नमः ॥ ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ॥ ॐ धनदाय नमः ॥ ॐ धनुष्मते नमः ॥ ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः ॥ ॐ तामसाय नमः ॥ ॐ अशेषजनवन्द्याय नमः ॥ ॐ विशेशफलदायिने नमः ॥ ॐ वशीकृतजनेशाय नमः ॥ ॐ पशूनां पतये नमः ॥ ॐ खेचराय नमः ॥ ॐ खगेशाय नमः ॥ ॐ घननीलाम्बराय नमः ॥ ॐ काठिन्यमानसाय नमः ॥ ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमः ॥ ॐ नीलच्छत्राय नमः ॥ ॐ नित्याय नमः ॥ ॐ निर्गुणाय नमः ॥ ॐ गुणात्मने नमः ॥ ॐ निरामयाय नमः ॥ ॐ निन्द्याय नमः ॥ ॐ वन्दनीयाय नमः ॥ ॐ धीराय नमः ॥ ॐ दिव्यदेहाय नमः ॥ ॐ दीनार्तिहरणाय नमः ॥ ॐ दैन्यनाशकराय नमः ॥ ॐ आर्यजनगण्याय नमः ॥ ॐ क्रूराय नमः ॥ ॐ क्रूरचेष्टाय नमः ॥ ॐ कामक्रोधकराय नमः ॥ ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः ॥ ॐ परिपोषितभक्ताय नमः ॥ ॐ परभीतिहराय न मः ॥ ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः ॥

इसका 108 पाठ करने से शनि सम्बन्धी समस्त पीडायें समाप्त हो जाती हैं। तथा पाठ कर्ता धन धान्य समृद्धि वैभव से पूर्ण हो जाता हैं। तथा उसके समस्त बिगडे कार्य बनने लगते हैं। यह सौ प्रतिशत अनुभूत हैं।
इसके अतिरिक्त दशरथकृत शनि स्तोत्र का यथा सामर्थ्य पाठ भी शनि जनित अरिष्ट से शांति दिलाता हैं।

दशरथकृत शनि स्तोत्र

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नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते। 2

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते। 3

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने। 4

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च। 5

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते। 6

तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।7

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्। 8

देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:। 9

प्रसाद कुरु मे सौरे ! वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल:।10

शनैश्चरी अमावस्या पर शनिदेव को प्रसन्न करने के शास्त्रोक्त  उपाय।

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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार समस्त जातक की कुंडली में 9 ग्रह होते हैं जो अपना प्रभाव दिखाते हैं।

इन ग्रहों की स्थिति परिवर्तन के वजह से मनुष्य को समय समय पर अच्छे व बुरे दोनों परिणाम प्राप्त होते हैं।

इन 9 ग्रह में से केवल शनिदेव ऐसे हैं जिनके प्रभाव से मनुष्य घबरा जाता हैं।

हिन्दू धर्मशास्‍त्रों में भी शनिदेव का चरित्र भी दण्डाधिकारी के रूप में माना गया हैं जो कि कर्म तथा सत्य को जीवन में अपनाने की ही प्रेरणा देता हैं।

किन्तु अगर आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो शास्‍त्रों में अत्यंत सारे उपाय बताए गए हैं जिससे शनिदेव प्रसन्‍न हो जाएंगे।

शनिदेव के प्रसन्‍न होने से आपका जीवन सफल हो जाएगा। तो आइए जानते हैं उन उपायों को

अगर आप शनि को प्रसन्न करना चाहते हैं तो शनैश्चरी अमावस्या के दिवस पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं तथा दोनों हाथों से पीपल के पेड़ को स्‍पर्श करें।

इस दौरान पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें तथा शनि मंत्र ऊं शं शनैश्‍चराय नम:का जाप करते रहना चाहिए, यह आपकी साढ़ेसाती की समस्त परेशानियों को दूर ले जाता हैं।

साढ़ेसाती के प्रकोप से बचने के लिए इस दिवस उपवास रखने वाले जातक को दिवस में एक बार नमक विहीन भोजन करना चाहिए।

   उपाय

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अगर आपकी कोई विशेष मनोकामना हैं तो शनैश्चरी अमावस्या के दिवस आप अपने लंबाई का लाल रंग का धागा लेकर इसे आम के पत्‍ते पर लपेट दें।

इस पत्‍ते तथा लपेटे हुए धागे को लेकर अपनी मनोकामना को मन में आवाहन करें तथा उसके बाद इस पत्‍ते तथा धागे को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इससे आपकी मनोकामना जल्‍द पूरी होगी।

   उपाय

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अक्‍सर ऐसा होता हैं कि लोग अत्यंत संघर्ष व मेहनत करते हैं किन्तु उन्‍हें सफलता हाथ नहीं लगती या लोग जो सोचते हैं वो हो नहीं पाता ऐसे में लोग न चाहते हुए भी अपने भाग्‍य को कोसने लगते हैं।

कहते हैं कि भाग्य बिल्कुल भी साथ नहीं देता तथा दुर्भाग्य निरन्तर पीछा कर रहा हैं।

कहा जाता हैं कि इंसान के पिछले कर्मों के अच्छे-बुरे परिणामों का फल भी आपके भाग्‍य का निर्धारण करता हैं इसलिए आपको इन समस्त बातों को छोड़कर निष्काम भाव से सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए।

किन्तु आज एक उपाय जो हम आपको बताने जा रहे हैं उसे करने से आपका सोया हुआ भाग्‍य जाग जाएगा।

शनैचरी अमावस्या से आरंभ कर लगातार 41 दिवस रोज सुबह गाय का दुध लेकर नहाने से पहले इसे अपने सिर पर थोड़ा सा रख लें।

तथा फिर नहा लें अगर आप ऐसा रोज करेंगे तो आपका सोया हुआ भाग्‍य जाग जाएगा।

इतना ही नहीं आप जो भी काम सोचेंगे वो पूरा हो जाएगा। आपकी जीवन में आ रही रूकावटें खत्‍म हो जाएगी। बस अधिक से अधिक संयम रखने का प्रयास करें।

अमावस्या पर देवताओं तथा पितरों की पूर्ण कृपा प्राप्त करें | amavasya par pitra dosh ke upay

अमावस्या पर देवताओं तथा पितरों की पूर्ण कृपा प्राप्त करें 🙏 amavasya par pitra dosh ke upay

amavasya par pitra dosh ke upay
pitra dosh ke upay
🚩ज्योतिष एवं तंत्र शास्त्र में अमावस्या तिथि का अत्यंत महत्व हैं। अमावस्या तिथि को हर तरफ घोर अन्धकार छाया होता हैं, ऐसे में यदि कोई मनुष्य नियमपूर्वक स्वच्छ वस्त्र धारण करके अमावस्या की रात्रि में कुछ स्थानों में दीपक का प्रकाश करें तो उस जातक को ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं।


🔔हिन्दु धर्म शास्त्रो के अनुसार मनुष्य पर मुख्य रूप से तीन प्रकार के ऋण होते हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। इनमें पितृ ऋण को सबसे प्रमुख माना गया हैं। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा परिवार के वह समस्त दिवंगत सदस्य जो पितरों में शामिल हो गए हैं वह समस्त पितृ ऋण में आते हैं।पितृ ऋण से मुक्ति के लिए , पितरों की तृप्ति के लिए, उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रत्येक अमावस्या  पर कुछ उपाय अवश्य ही करने चाहिए।

⧴🚩शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में इन पाँच स्थानों में तेल का दीपक जलाने से दैवीय कृपा प्राप्त होती हैं, माँ लक्ष्मी का स्थाई निवास होता हैं। ⧴

🚩 हिंदू धर्म में तुलसी को सर्वाधिक पवित्र तथा माता स्वरुप माना जाता हैं। सामान्यता समस्त हिन्दु परिवारों में तुलसी अवश्य ही मिलती हैं, तुलसी माँ को घर-घर में पूजा जाता हैं। भगवान श्री विष्णु तथा उनके समस्त अवतारों को तुलसी के बिना भोग सम्पूर्ण ही नहीं समझा जाता हैं। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में तुलसी के निकट एक दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए। इससे भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते हैं एवं माँ लक्ष्मी भी उस घर को कभी भी छोड़ कर नहीं जाती हैं। 

🚩हिन्दु धर्म शास्त्रों एवं वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार को अत्यंत साफ तथा सजा कर रखना चाहिए, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती हैं। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर एक एक दीपक अवश्य ही जलाएं, इससे घर में प्रेम, हर्ष - उल्लास तथा ऊर्जा का वातावरण बनता हैं, माँ लक्ष्मी की असीम कृपा बनती हैं। 

🚩शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में घर की छत पर भी एक दीपक अवश्य ही जलाएं इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती हैं, घर में किसी भी अशुभ शक्तियों का प्रवेश नहीं होता हैं।अमावस की रात में घर की छत पर दीपक जलाने से माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती हैं। 

🚩अमावस्या की रात्रि को सर्वत्र गहन अंधकार होता हैं। अमावस्या की गहन अँधेरी रात को घर के मंदिर में भी एक दीपक अवश्य ही जलाएं, इससे हमें अपने इष्ट देवता, कुल देवता तथा समस्त देवताओं की पूर्ण कृपा प्राप्त होती हैं घर धन धान्य से भरा रहता हैं🚩

🙏🙏पीपल पर देवताओं तथा पितरों दोनों का वास माना गया हैं। अमावस्या की रात को पीपल के नीचे एक दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए इससे शनि, राहु - केतु का प्रकोप शान्त होता हैं, कुंडली के ग्रहों के शुभ फल मिलते हैं एवं पितरों की भी पूर्ण कृपा मिलती हैं। यदि पीपल का पेड़ किसी मंदिर में हो तो तथा भी उत्तम हैं। 👆🏆🔥🔔🚩🙏

⧴ 💥💥अमावस्या पर पाएं पितरों की पूर्ण कृपा प्राप्त करें⧴ 🔥🔥 


🙏पितरों को अमावस, का देवता माना गया हैं। शास्त्रों के अनुसार हर अमावस्या के दिवस पितृ अपने घर अपने वंशजो के पास आते हैं तथा उनसे अपने निमित धर्म - कर्म, दान - पुण्य की आशा करते हैं। यदि हम उनके निमित अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं तो वह प्रसन्न होते हैं तथा हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त होता हैं।

यदि आपके पितृ देवता प्रसन्न होंगे तभी आपको अन्य देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त हो सकती हैं। पितरों की कृपा के बिना कठिन परिश्रम के बाद भी जीवन में अस्थिरता रहती हैं, मेहनत के उचित फल प्राप्त नहीं होती हैं। 

🏆हर अमावस के दिवस एक ब्राह्मण को अपने घर पर बुलाकर प्रेम पूर्वक भोजन अवश्य ही कराएं। इससे आपके पितर सदैव प्रसन्न रहेंगे, आपके कार्यों में अड़चने नहीं आएँगी, घर में धन की कोई भी कमी नहीं रहेंगी तथा आपका घर - परिवार को टोने-टोटको के अशुभ प्रभाव से भी बचा रहेगा। 

🏆हर अमावस्या  पर पितरों का तर्पण अवश्य ही करना चाहिए। तर्पण करते समय एक पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल , कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद तथा सफेद फूल आदि डाल कर पितरों का तर्पण करना चाहिए। तर्पण, में तिल तथा कुशा सहित जल हाथ में लेकर दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके तीन बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि, तपरान्तयामि कहकर पितृ तीर्थ यानी अंगूठे की ओर जलांजलि देते हुए जल को धरती में किसी बर्तन में छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती हैं। ध्यान रहे तर्पण का जल तर्पण के बाद किसी वृक्ष की जड़ में चड़ा देना चाहिए वह जल इधर उधर बहाना नहीं चाहिए। 

🏆पितृ दोष निवारण के लिये यदि कोई जातक अमावस्या के दिवस पीपल के पेड़ पर जल में दूध, गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल मिलाकर सींचते हुए पुष्प, जनेऊ अर्पित करते हुये ऊँ नमो भगवते वासुदेवाएं नमः" मंत्र का जाप करते हुये 7 बार परिक्रमा करे।

तत्पश्चात् ॐ पितृभ्यः नमः मंत्र का जप करते हुए अपने अपराधों एवं त्रुटियों के लिये क्षमा मांगे तो पितृ दोष से उत्पन्न समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता हैं। पितर प्रसन्न होते हैं एवं उनका पूर्ण आशीर्वाद भी प्राप्त होता हैं। 

तथा अगर सोमवती अमावस्या हो तो पीपल की 108 बार परिक्रमा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता हैं। 

🏆शास्त्रो के अनुसार प्रत्येक अमावस्या को पित्तर अपने घर पर आते हैं अतः इस दिवस हर जातक को यथाशक्ति उनके नाम से दान करना चाहिए। इस दिवस बबूल के पेड़ पर संध्या के समय पितरों के निमित्त भोजन रखने से भी पित्तर प्रसन्न होते हैं। 

⧴🏆पितरों को खीर अत्यंत पसंद होती हैं इसलिए प्रत्येक माह की अमावस्या को खीर बनाकर ब्राह्मण को भोजन के साथ खिलाने पर महान पुण्य की प्राप्ति होती हैं, जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती हैं। इस दिवस संध्या के समय पितरों के निमित थोड़ी खीर पीपल के नीचे भी रखनी चाहिए। ⧴

🏆प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी नियमपूर्वक खिलाने चाहिए, इससे घर में शुभता एवं हर्ष का वातावरण बना रहता हैं। तथा पितरो का पूर्ण आशीर्वाद भी प्राप्त होता हैं।

जीवन की समस्त परे‍शानियां दूर करेंगे अमावस्या के यह आसान उपाय

जीवन की समस्त परे‍शानियां दूर करेंगे अमावस्या के यह आसान उपाय

अमावस्या के यह आसान उपाय
अमावस्या आसान उपाय
ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या को विशेष तिथि माना गया हैं। मान्यता हैं कि इस दिवस किए गए  उपाय, टोटके विशेष ही शुभ फल प्रदान करते हैं। अत: जीवन में आ रही समस्त परेशानियों को दूर करने के लिए अमावस्या पर यह उपाय अवश्य आजमाने चाहिए। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं बहुउपयोगी टोटके।।।


अमावस्या के दिवस भूखे प्राणियों को भोजन कराने का विशेष महत्व हैं।

अमावस्या के दिवस सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह  आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता हैं।

इस दिवस काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप-कर्मों का क्षय होगा तथा पुण्य-कर्म उदय होंगे। यही पुण्य-कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक  होंगे।

इस दिवस कालसर्प दोष निवारण हेतु सुबह स्नान के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें। सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। कालसर्प दोष से राहत  पाने का यह अचूक उपाय हैं।

बेरोजगार जातक अगर अमावस्या की रात यह उपाय करें तो निश्चित ही उसे रोजगार प्राप्त  होगा। इसके लिए 1 नींबू को साफ करके सुबह से ही अपने घर के मंदिर में रख दें। फिर रात  के समय इसे 7 बार बेरोजगार जातक के सिर से उतार लें तथा 4 बराबर भागों में काट लें। फिर एक चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में इसको फेंक दें। इस उपाय से बेरोजगार जातक को लाभ की संभावना बनेगी।

जिसे कालसर्प दोष हो, उन जातकयों को अमावस्या के दिवस किसी अच्छे पंडित से अपने घर में शिवपूजा एवं हवन करवाना चाहिए।

शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीये में थोड़ी-सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय हैं।

अमावस्या वाली रात्रि को 5 लाल फूल तथा 5 जलते हुए दीये बहती नदी के पानी में छोड़ें। इस उपाय से धन का लाभ प्राप्त होने के प्रबल योग बनेंगे।
  अमावस्या की रात्रि अगर आप काले कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाते हैं तथा उसी समय वह कुत्ता यह रोटी खा लेता हैं तो इस उपाय से आपके समस्त दुश्मन उसी समय से शांत होना शुरू  हो जाएंगे।

इस दिवस शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके सेवन से आपके शरीर तथा भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।