30 December 2018

सफला एकादशी कब हैं 2019 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Safala Ekadashi 2019 #EkadashiVrat

सफला एकादशी कब हैं 2019 | एकादशी तिथि व्रत पारण का समय | तिथि व शुभ मुहूर्त | Safala Ekadashi 2019 #EkadashiVrat

Saphala Ekadashi Vrat 2019
Safala Ekadashi 2019
वैदिक विधान कहता हैं की, दशमी को एकाहार, एकादशी में निराहार तथा द्वादशी में एकाहार करना चाहिए। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार सम्पूर्ण वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं, किन्तु अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का भिन्न भिन्न महत्व होता हैं तथा प्रत्येक एकादशीयों की एक पौराणिक कथा भी होती हैं। एकादशियों को वास्तव में मोक्षदायिनी माना गया हैं। भगवान श्रीविष्णु जी को एकादशी तिथि अति प्रिय मानी गई हैं चाहे वह कृष्ण पक्ष की हो अथवा शुकल पक्ष की। इसी कारण एकादशी के दिन व्रत करने वाले प्रत्येक भक्तों पर प्रभु की अपार कृपा-दृष्टि सदा बनी रहती हैं, अतः प्रत्येक एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान श्रीविष्णु जी की पूजा करते हैं तथा व्रत रखते हैं, साथ ही रात्री जागरण भी करते हैं। किन्तु इन प्रत्येक एकादशियों में से एक ऐसी एकादशी भी हैं जिस दिन भगवान विष्णु जी के विभिन्न नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए फलों के द्वारा उनका पूजन किया जाता हैं। अतः पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को “सफला एकादशी” कहा जाता हैं। इस एकदाशी को “पौष कृष्ण एकदशीभी कहा जाता हैं। सफला एकादशी का व्रत अपने नाम के अनुसार मनोवांछित फल प्रदान करने वाला हैं। सफला एकादशी के दिन भगवान श्रीविष्णु जी को ऋतु-फल निवेदित करना चाहिए तथा धूप-दीप आदि से से श्रीहरिकी अर्चना करना चाहिए। हिन्दू धर्मानुसार इस व्रत के पुण्य से मनुष्य के प्रत्येक कार्य सफल होते हैं तथा उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। पद्मपुराण का कथन हैं की, सफला एकादशी के अनुष्ठान से विष्णु भगवान को अत्यंत शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता हैं तथा पूर्ण उपवास एवं रात्रि जागरण से राजसूय यज्ञ के समान फलों की प्राप्ति होती हैं। सफला एकादशी सम्पूर्ण विश्व के संरक्षक भगवान विष्णु जी को समर्पित हैं। अतः इस दिन भगवान नारायण की विधिपूर्वक पूजा-आरती करनी चाहिए। तथापि धन प्राप्ति एवं आर्थिक समृद्धि के लिए सफला एकादशी के दिन माँ लक्ष्मीजी की भी पूजा की जाती हैं। युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण जी ने स्वयं कहाँ हैं की, “बडे-बडे यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं प्राप्त होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से प्राप्त होता हैं।” अतः एकादशी का व्रत सभी मनुष्यो को अवश्य करना चाहिए। क्यों की, एकादशी समस्त व्रतों में श्रेष्ठ तथा कल्याण करने वाली मानी गई हैं। सफला एकादशी के दिन दीप-दान भी अवश्य करें। एकादशी का रात्रि में जागरण करने से जो फल प्राप्त होता हैं, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं प्राप्त होता। अतः रात्री में हरी नाम भजते हुए यथासंभव जागरण करना चाहिए। सफला एकादशी के दिन चावल, लहसुन, शराब तथा अन्य नशीली चीजो का सेवन वर्जित हैं। भगवान श्री कृष्ण इस व्रत की महिमा बताते हुए कहते हैं की, “सफला एकादशी के व्रत से जातक को जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती हैं तथा वह जीवन का सुख भोगकर मृत्यु के पश्चात विष्णु-लोक को प्राप्त होता हैं। इस दिन पूर्ण श्रद्धा से व्रत करके भक्त अपने पापों को नष्ट कर सकते हैं। जो जातक सच्चे भक्ति-भाव से एकादशी-व्रत करता हैं, वह निश्चय ही प्रभु की कृपा के पात्र बन जाता हैं।” पद्मपुराणके उत्तरखण्डमें सफला एकादशी के व्रत की कथा विस्तार-पूर्वक वर्णित हैं। इस एकादशी के प्रताप से ही लुम्पक जैसा महापापी भी भगवान श्रीहरि की कृपा से वैकुंठ का अधिकारी बन गया था।


सफला एकादशी व्रत का पारण

एकादशी के व्रत की समाप्ती करने की विधि को पारण कहते हैं। कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधिवत पारण ना किया जाए। एकादशी व्रत के अगले दिवस सूर्योदय के पश्चात पारण किया जाता हैं।

ध्यान रहे,
१. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना अति आवश्यक हैं।
२.  यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व समाप्त हो रही हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात ही करना चाहिए।
३. द्वादशी तिथि के भीतर पारण ना करना पाप करने के समान माना गया हैं।
४.  एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
५. व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता हैं।
६. व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्यान के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए।
७. जो भक्तगण व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत समाप्त करने से पूर्व हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि होती हैं।
८. यदि जातक, कुछ कारणों से प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो उसे मध्यान के पश्चात पारण करना चाहिए।

इस वर्ष 2018 में नहीं किन्तु वर्ष 2019 में 2 बार सफला एकदशी का व्रत मनाया जाएगा, प्रथम व्रत जनवरी में तथा द्वितीय दिसम्बर के महीने में आयेगा। अतः

इस वर्ष पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 31 दिसम्बर, सोमवार की मध्यरात्रि 01 बजकर 16 मिनिट से प्रारम्भ हो कर, 01 जनवरी, मंगलवार की मध्यरात्रि 01 बजकर 28 मिनिट तक व्याप्त रहेगी।

अतः इस वर्ष 2019 में सफला एकादशी का व्रत 01 जनवरी, मंगलवार के दिन किया जाएगा।
               
इस वर्ष, सफला एकादशी व्रत का पारण अर्थात व्रत तोड़ने का शुभ समय, 02 जनवरी, बुधवार की प्रातः 07 बजकर 40 मिनिट से 09 बजकर 28 मिनिट तक का रहेगा।

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